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UP Data Center Policy 2026: वर्ष 2021 की नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े डेटा सेंटरों के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं था लेकिन अब सरकार इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की तैयारी में है।

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार अब डेटा सेंटर पॉलिसी 2021 को और आधुनिक बनाते हुए नई डेटा सेंटर पॉलिसी 2026 लाने की तैयारी कर रही है। इस नई नीति में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटर, ग्रीन डेटा सेंटर और एज डेटा सेंटर के लिए अलग से प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का उद्देश्य सिर्फ निवेश बढ़ाना नहीं बल्कि नई तकनीकों को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मजबूत बनाना भी है।
नई डेटा सेंटर पॉलिसी का सबसे बड़ा बदलाव AI आधारित डेटा सेंटरों को लेकर है। वर्ष 2021 की नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े डेटा सेंटरों के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं था लेकिन अब सरकार इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार, AI कम्प्यूटिंग क्षमता विकसित करने वाले डेटा सेंटर पार्कों को 10 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कर्ज सब्सिडी दी जा सकती है। वहीं AI आधारित डेटा सेंटर यूनिटों को 5 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी देने का भी प्रस्ताव है। इससे प्रदेश में आधुनिक तकनीक से जुड़े बड़े निवेश आने की संभावना बढ़ सकती है।
नई नीति में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन और सस्टेनेबल डेटा सेंटरों को भी विशेष प्रोत्साहन देने की तैयारी है। यदि कोई डेटा सेंटर मान्यता प्राप्त संस्था से उच्च स्तर का ग्रीन सर्टिफिकेशन प्राप्त करता है और नवीकरणीय ऊर्जा यानी रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करता है, तो उसे अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार ऐसे डेटा सेंटरों को 5 से 10 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त सब्सिडी मिल सकती है। इसके अलावा प्रदेश के रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों से बिजली लेने वाले डेटा सेंटरों को 25 वर्षों तक 75 प्रतिशत तक अतिरिक्त छूट देने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ बिजली की लागत भी कम हो सकती है।
नई पॉलिसी सिर्फ निवेश बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकार डेटा की सुरक्षा और गुणवत्ता को भी मजबूत करना चाहती है। इसी वजह से टियर-3 और टियर-4 रेटिंग वाले डेटा सेंटरों को प्रमाणन शुल्क का 25 से 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति देने का प्रस्ताव रखा गया है। यह सुविधा मौजूदा नीति में उपलब्ध नहीं थी। इससे कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षित डेटा सेंटर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।
सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए जमीन से जुड़े नियमों में भी बदलाव करने की तैयारी कर रही है। मौजूदा नीति में भूमि सब्सिडी पर परियोजना लागत का 7.5 प्रतिशत या अधिकतम 75 करोड़ रुपये तक की सीमा तय थी। नई नीति में इस सीमा को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी में मिलने वाली छूट का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। पहले यह लाभ केवल भूमि खरीद तक सीमित था लेकिन अब प्रस्ताव है कि भूमि के साथ बने हुए निर्माण क्षेत्र यानी बिल्ट-अप एरिया को भी इसमें शामिल किया जाए। इससे निवेशकों को परियोजना शुरू करने में अधिक सुविधा मिल सकती है।
डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए एज डेटा सेंटरों को पहली बार अलग से प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। नई नीति के तहत इंटरनेट बैंडविड्थ, लीज्ड लाइन और फाइबर कनेक्टिविटी शुल्क पर तीन वर्षों तक 25 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव रखा गया है। हर डेटा सेंटर को इस मद में प्रति वर्ष अधिकतम 2.5 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। इससे छोटे और मध्यम स्तर के डेटा सेंटरों को भी बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य की डेटा सेंटर क्षमता को मौजूदा 644 मेगावाट से बढ़ाकर 2030 तक 2 गीगावाट तक पहुंचाना है। इसके साथ ही प्रदेश में पहले से 21,343 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि नई नीति लागू होने के बाद निवेश और डेटा सेंटर क्षमता दोनों में तेजी से वृद्धि होगी।
नई डेटा सेंटर पॉलिसी 2026 को उत्तर प्रदेश के डिजिटल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AI, ग्रीन एनर्जी, डेटा सुरक्षा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान देकर सरकार राज्य को देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना चाहती है। यदि प्रस्तावित प्रोत्साहन लागू होते हैं तो इससे निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं और उत्तर प्रदेश डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
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