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इस योजना के लागू होने के बाद पात्र शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को देशभर के आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों को इलाज के दौरान होने वाले बड़े खर्च से राहत मिलेगी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी।

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के लाखों शिक्षकों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य सुविधा शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे। इस योजना के लागू होने के बाद पात्र शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को देशभर के आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों को इलाज के दौरान होने वाले बड़े खर्च से राहत मिलेगी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस नई योजना की शुरुआत 8 जुलाई को वाराणसी से करेंगे। लंबे समय से शिक्षकों के लिए ऐसी स्वास्थ्य योजना की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी और अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह योजना खासतौर पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए शुरू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि इलाज के समय किसी भी शिक्षक को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मॉडल पर तैयार किया गया है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को वही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी जो आयुष्मान भारत योजना में उपलब्ध हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षक और उनके परिवार के सदस्य देशभर में आयुष्मान भारत से जुड़े सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना पहले भुगतान किए इलाज करा सकेंगे। अस्पताल का खर्च तय प्रक्रिया के तहत योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक बोझ काफी कम होने की उम्मीद है।
सरकार ने इस योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाया है ताकि प्रक्रिया आसान और पारदर्शी रहे। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल तैयार किया गया है जहां पात्र शिक्षक अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा सभी जानकारियों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद लाभार्थी का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके बाद आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी करने पर शिक्षक अपना डिजिटल हेल्थ कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और उसी कार्ड के जरिए योजना का लाभ उठा सकेंगे।
योजना को लेकर शिक्षकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के लिए बनाए गए पोर्टल पर अब तक करीब 7,89,032 पात्र लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। इन आवेदनों का सत्यापन संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा किया जा रहा है। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अंतिम मंजूरी देंगे। मंजूरी मिलने के बाद ही लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पोर्टल से जोड़ा जाएगा और आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।
सरकार ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। 3 जुलाई से इस विभाग का डेटा संग्रह पोर्टल चालू हो चुका है। माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सबसे पहले अपना ऑनलाइन पंजीकरण करेंगे। इसके बाद संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य आवेदन का सत्यापन करेंगे और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अंतिम अनुमोदन देंगे। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षक भी डिजिटल कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसका लाभ केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कोई पात्र शिक्षक या उसका परिवार किसी दूसरे राज्य में मौजूद आयुष्मान भारत से जुड़े अस्पताल में इलाज कराना चाहता है, तो वहां भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे बाहर नौकरी या यात्रा के दौरान भी शिक्षकों को इलाज की चिंता नहीं रहेगी। गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़े अस्पतालों में भी बिना तत्काल आर्थिक दबाव के इलाज कराया जा सकेगा।
योगी सरकार इस योजना का दायरा लगातार बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी अलग ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा। इसके बाद विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत पात्र शिक्षक और कर्मचारी भी इस योजना से जुड़ सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिले।
सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत कई शिक्षक लंबे समय से ऐसी स्वास्थ्य सुविधा की मांग कर रहे थे जिसमें इलाज के समय बड़ी रकम का इंतजाम न करना पड़े। यह योजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च को लेकर चिंता कम होगी। डिजिटल प्रक्रिया के कारण आवेदन से लेकर कार्ड डाउनलोड करने तक का पूरा सिस्टम ऑनलाइन रहेगा जिससे पारदर्शिता भी बनी रहेगी और समय की बचत भी होगी।
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