
भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल का बल्ला अहमदाबाद टेस्ट में ना चला हो, लेकिन दिल्ली की पिच पर उन्होंने अपनी ताकत का पूरा जलवा दिखाया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने पहली पारी में ऐसा शतक जड़ा कि दर्शक बस तालियों की गड़गड़ाहट में खो गए। यह उनके टेस्ट करियर का 7वां शतक है और वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू मैदान पर उनका पहला शतक भी बन गया। खास बात यह है कि इस टीम के खिलाफ यह उनका दूसरा शतक है। इस पारी में सिर्फ रन ही नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और रणनीति की झलक भी देखने को मिली। आइए जानते हैं, कैसे यशस्वी ने अपनी सूझबूझ और खेल की समझ से 7वें शतक तक का सफर तय किया। Yashasvi Jaiswal
अहमदाबाद टेस्ट में बल्ले से सुस्ती दिखाने वाले यशस्वी जायसवाल ने दिल्ली की पिच पर अपने खेल का जलवा बिखेर दिया। पहले विकेट के लिए राहुल के साथ 15.4 ओवर में 50 रन जोड़कर उन्होंने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। राहुल आउट हुए, लेकिन यशस्वी ने अपनी धैर्य और तकनीक का कमाल दिखाते हुए टिके रहने की शानदार मिसाल पेश की। सिर्फ 82 गेंदों में 10 चौकों की मदद से हाफसेंचुरी पूरी करने के बाद उन्होंने साई सुदर्शन के साथ बेहतरीन शतकीय साझेदारी बनाई और 145 गेंदों में अपना शानदार शतक पूरा किया। इस पारी में संयम, आक्रामकता और खेल की समझ का शानदार मिश्रण देखने को मिला।
यशस्वी जायसवाल ने इस शतक के साथ अपने नाम कई शानदार रिकॉर्ड दर्ज कर दिए हैं। सुनील गावस्कर के बाद वे सबसे तेज़ 3000 टेस्ट रन बनाने वाले भारत के बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए हैं, सिर्फ 71 पारियों में यह मुकाम हासिल कर लिया। 23 साल की उम्र में 7 टेस्ट शतक अपने नाम कर चुके यशस्वी ने यह साबित कर दिया कि वे भारतीय क्रिकेट की आने वाली पीढ़ी के बड़े सितारे हैं। इतनी कम उम्र में उनसे ज्यादा शतक केवल सचिन तेंदुलकर ने जड़े हैं, जिन्होंने 11 सेंचुरी बनाई थीं। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में भी यशस्वी ने रोहित पंत और केएल राहुल (जिन्होंने 6-6 शतक बनाए थे) को पीछे छोड़ते हुए अपने नाम 7 शतकों का शानदार रिकॉर्ड दर्ज किया है। Yashasvi Jaiswal