कम उम्र में संन्यास लेने वाले आर्यमान बिड़ला कौन हैं? जानिए पूरा सफर

आईपीएल 2026 की शुरुआत से पहले पिछले साल की आईपीएल विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की कमान अब आर्यमान बिड़ला के हाथों में है। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक कारोबारी परिवार के सदस्य या आईपीएल फ्रेंचाइजी से जुड़े नाम तक सीमित नहीं है।

आर्यमान बिड़ला
आर्यमान बिड़ला
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar25 Mar 2026 11:44 AM
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IPL 2026 : आईपीएल 2026 की शुरुआत से पहले पिछले साल की आईपीएल विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की कमान अब आर्यमान बिड़ला के हाथों में है। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक कारोबारी परिवार के सदस्य या आईपीएल फ्रेंचाइजी से जुड़े नाम तक सीमित नहीं है। बहुत कम लोग जानते हैं कि आर्यमान खुद भी क्रिकेट की दुनिया का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी, मगर बेहद कम उम्र में ही क्रिकेट से दूरी बना ली। आज 28 वर्ष के आर्यमान बिड़ला एक बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन कभी वह भी बल्ले से अपना भविष्य बनाने का सपना देखते थे। सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने महज 22 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया?

मानसिक स्वास्थ्य बना क्रिकेट छोड़ने की सबसे बड़ी वजह

आर्यमान बिड़ला ने वर्ष 2019 में क्रिकेट से अनिश्चितकालीन ब्रेक लेने का फैसला किया था। उस समय उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि वह अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देना चाहते हैं। बढ़ते दबाव और निजी संतुलन को देखते हुए उन्होंने खेल से कुछ समय दूर रहने का निर्णय लिया, लेकिन बाद में यह दूरी स्थायी हो गई और उनका क्रिकेट करियर वहीं थम गया। उनका यह फैसला उस दौर में काफी चर्चा में रहा, क्योंकि भारतीय क्रिकेट में मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने वाले खिलाड़ी बहुत कम रहे हैं। आर्यमान ने अपने निर्णय से यह संदेश दिया कि पेशेवर सफलता से पहले मानसिक संतुलन और व्यक्तिगत स्वास्थ्य अधिक महत्वपूर्ण है।

खिलाड़ी के रूप में भी IPL से रहा नाता

आर्यमान बिड़ला का आईपीएल से रिश्ता नया नहीं है। RCB से मालिकाना भूमिका में जुड़ने से पहले वह खिलाड़ी के तौर पर भी इस लीग का हिस्सा रह चुके हैं। वर्ष 2018 में उन्हें राजस्थान रॉयल्स ने अपनी टीम में शामिल किया था। हालांकि, उस सीजन में उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिल सकी और वह मैदान पर उतरने का मौका नहीं पा सके।

घरेलू क्रिकेट में भी आजमा चुके थे किस्मत

आईपीएल में शामिल होने से पहले आर्यमान घरेलू क्रिकेट में कदम रख चुके थे। उन्होंने 2017 में मध्य प्रदेश की ओर से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। उनका पहला मुकाबला ओडिशा के खिलाफ था। इसके बाद 2018 में उन्होंने हैदराबाद के विरुद्ध लिस्ट ए क्रिकेट में भी अपना पहला मैच खेला। हालांकि, घरेलू स्तर पर उनका प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा, लेकिन वह उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाए जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी।

आंकड़ों में कैसा रहा आर्यमान का करियर?

आर्यमान बिड़ला का पेशेवर क्रिकेट करियर लंबा नहीं चल सका। उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए कुल 9 फर्स्ट क्लास और 4 लिस्ट ए मुकाबले खेले। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 27.60 की औसत से 414 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 1 शतक और 1 अर्धशतक भी निकला। वहीं, लिस्ट ए क्रिकेट में उनका प्रदर्शन ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा और 4 मैचों में उन्होंने केवल 36 रन बनाए। इस प्रारूप में उनका औसत 12.00 रहा। IPL 2026

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आईपीएल 2026 होगा और भी रणनीतिक, नए नियमों से बढ़ेगा रोमांच

आईपीएल 2026 सिर्फ चौकों-छक्कों का रोमांच लेकर नहीं आ रहा, बल्कि इस बार खेल के कई नियम भी मुकाबलों की दिशा तय करते नजर आ सकते हैं। टूर्नामेंट का 19वां सीजन पिछले संस्करणों से अलग और ज्यादा रणनीतिक होने वाला है।

IPL 2026 में बड़ा बदलाव
IPL 2026 में बड़ा बदलाव
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userअभिजीत यादव
calendar25 Mar 2026 11:30 AM
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IPL 2026 : आईपीएल 2026 सिर्फ चौकों-छक्कों का रोमांच लेकर नहीं आ रहा, बल्कि इस बार खेल के कई नियम भी मुकाबलों की दिशा तय करते नजर आ सकते हैं। टूर्नामेंट का 19वां सीजन पिछले संस्करणों से अलग और ज्यादा रणनीतिक होने वाला है। बीसीसीआई ने नए सीजन से पहले ऐसे कई अहम प्रावधानों पर काम किया है, जिनका सीधा असर खिलाड़ियों की भूमिका, कप्तानों के फैसलों और मैच के संचालन पर पड़ सकता है। साफ है कि इस बार आईपीएल में सिर्फ टीमों की ताकत ही नहीं, नियमों की समझ भी जीत और हार के बीच बड़ा फर्क पैदा कर सकती है।

कप्तानों की बैठक में होगा फैसला

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले बुधवार को मुंबई में सभी टीमों के कप्तानों की अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में कई ऐसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, जो मैच के नतीजों पर सीधा असर डाल सकते हैं। माना जा रहा है कि इस बार इनिंग्स टाइमर, बॉल बदलने का नियम, बैट जांच, सलाइवा के इस्तेमाल, दो बाउंसर नियम और रिटायर्ड-आउट से जुड़े प्रावधान मुख्य चर्चा के केंद्र में रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी टीमों को सूचित किया है कि कप्तानों की इस मीटिंग में मैच रेफरी पैनल के प्रमुख जवागल श्रीनाथ और अंपायरिंग पैनल से जुड़े नितिन मेनन खिलाड़ियों और कप्तानों को नियमों की जानकारी देंगे। यह बैठक शाम 4:30 बजे से 6 बजे तक आयोजित होने वाली है।

10वें ओवर के बाद मैच बदलने वाला नियम

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जिस नियम को लेकर है, वह है दूसरी पारी में गेंद बदलने का विशेष विकल्प। शाम के मैचों में दूसरी पारी के दौरान गेंदबाजी करने वाली टीम को 10वें ओवर के बाद एक बार गेंद बदलने की मांग करने का अधिकार दिया जा सकता है। यह फैसला खासतौर पर ओस जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अहम माना जा रहा है, क्योंकि गीली गेंद गेंदबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ा देती है।

कब बदली जाएगी गेंद?

अगर मैच के दौरान गेंद खो जाए, वापस न मिले, बहुत ज्यादा घिस जाए या खेल के लायक न रहे, तो अंपायर उसे बदल सकते हैं। नई गेंद बिल्कुल नई नहीं होगी, बल्कि उसकी जगह उसी स्तर की घिसी हुई दूसरी गेंद दी जाएगी, ताकि खेल का संतुलन बना रहे। इस बदलाव की जानकारी बल्लेबाज और फील्डिंग कप्तान दोनों को दी जाएगी। दूसरी पारी में गेंदबाजी कर रही टीम का कप्तान 10वें ओवर की समाप्ति के बाद गेंद बदलने की मांग कर सकता है। यह अधिकार सिर्फ एक बार मिलेगा। यानी 10वें ओवर के बाद कप्तान के पास रणनीतिक रूप से मैच का रुख बदलने का एक बड़ा अवसर होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि कई कप्तान इस फैसले का इस्तेमाल परिस्थितियों के हिसाब से बेहद सोच-समझकर करेंगे।

अंपायर की भूमिका रहेगी निर्णायक

हालांकि कप्तान गेंद बदलने की मांग जरूर रख सकता है, लेकिन अंतिम फैसला अंपायर के विवेक पर रहेगा। यदि अंपायर यह मानते हैं कि गेंद गीली है, खराब हो चुकी है या उसका आकार बिगड़ गया है, तब वे गेंद बदलने की अनुमति दे सकते हैं। गेंद बदलते समय यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नई गेंद की हालत पुरानी गेंद के करीब हो। यदि अंपायर 10वें ओवर से पहले ही किसी वजह से गेंद बदल देते हैं जैसे गेंद गीली हो जाए, खराब हो जाए, खो जाए या क्षतिग्रस्त हो जाए तो भी फील्डिंग कप्तान का 10वें ओवर के बाद गेंद बदलने का विशेष अधिकार खत्म नहीं होगा। यानी कप्तान बाद में भी अपने इस मौके का इस्तेमाल कर सकेगा।

क्या एक बार से ज्यादा बदली जा सकती है गेंद?

नियमों के मुताबिक, 10वें ओवर के बाद कप्तान का विशेष अनुरोध एक बार के लिए होगा। लेकिन अगर बाद में फिर गेंद की हालत खराब पाई जाती है और कप्तान दोबारा मांग करता है, तो उस स्थिति में गेंद बदलनी है या नहीं, इसका फैसला पूरी तरह अंपायर की संतुष्टि पर निर्भर करेगा। यानी नियम मौजूद रहेगा, लेकिन उसका उपयोग स्वतः नहीं बल्कि परिस्थितियों के आधार पर होगा। IPL 2026

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आईपीएल की सबसे महंगी टीम बनी राजस्थान रॉयल्स, सौदे ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

आईपीएल के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी डील सामने आई है। साल 2008 में पहले ही सीजन में खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली राजस्थान रॉयल्स अब नए मालिकाना ढांचे में जाने वाली है। अमेरिकी कारोबारी काल सोमानी ने इस फ्रेंचाइजी का अधिग्रहण करने का समझौता किया है।

आईपीएल में RR की महाडील
आईपीएल में RR की महाडील
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userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 04:50 PM
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IPL 2026 : आईपीएल के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी डील सामने आई है। साल 2008 में पहले ही सीजन में खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली राजस्थान रॉयल्स अब नए मालिकाना ढांचे में जाने वाली है। अमेरिकी कारोबारी काल सोमानी ने इस फ्रेंचाइजी का अधिग्रहण करने का समझौता किया है। बताया जा रहा है कि यह सौदा 1.63 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 15,300 करोड़ रुपये में तय हुआ है। इस पूरी राशि का भुगतान एकमुश्त किए जाने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अधिग्रहण के पीछे काल सोमानी को अमेरिकी उद्योग जगत के बड़े नामों का भी समर्थन हासिल है। इनमें वॉलमार्ट परिवार से जुड़े कारोबारी रॉब वाल्टन और हैम्प परिवार का नाम शामिल बताया जा रहा है। यह डील आईपीएल 2026 सीजन के समापन के बाद प्रभावी होगी।

आईपीएल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची टीमों की वैल्यू

राजस्थान रॉयल्स की यह बिक्री इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले आईपीएल में इतनी बड़ी रकम का सौदा नहीं हुआ था। पिछले वर्ष टॉरेंट ग्रुप ने गुजरात टाइटंस में 67 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 5,025 करोड़ रुपये में खरीदी थी। उस सौदे के बाद गुजरात फ्रेंचाइजी का कुल मूल्यांकन लगभग 7,500 करोड़ रुपये आंका गया था। गौरतलब है कि सीवीसी कैपिटल पार्टनर्स ने 2021 में गुजरात टाइटंस को 5,625 करोड़ रुपये में खरीदा था और बाद में अपनी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास बरकरार रखी।

मनोज बादले के पास थी सबसे बड़ी हिस्सेदारी

राजस्थान रॉयल्स की स्वामित्व संरचना में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मनोज बादले के पास थी, जो इमर्जिंग मीडिया वेंचर्स के जरिये फ्रेंचाइजी में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते थे। इसके अलावा रेडबर्ड कैपिटल पार्टनर्स और लाचलान मर्डोक जैसे निवेशक भी इसमें शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया पिछले साल के आखिर में शुरू हो गई थी और इस पूरे सौदे में निवेश बैंक द रेन ग्रुप सलाहकार की भूमिका में था।

खरीद की दौड़ में कई दिग्गज शामिल थे

राजस्थान रॉयल्स को खरीदने के लिए केवल एक पक्ष ही मैदान में नहीं था, बल्कि कई बड़े कारोबारी समूह इस रेस में शामिल थे। हाल ही में ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि फ्रेंचाइजी ने 1.7 अरब डॉलर यानी लगभग 15,859 करोड़ रुपये के एक प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। यह ऑफर कथित तौर पर कोलंबिया पैसिफिक कैपिटल पार्टनर्स की ओर से दिया गया था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। IPL 2026

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