इसी संदर्भ में दो बड़े उदाहरण हमेशा याद किए जाते हैं महेंद्र सिंह धोनी और चयनकर्ता मोहिंदर अमरनाथ के बीच विवाद, और फिर कप्तान विराट कोहली तथा कोच अनिल कुंबले के बीच तनातनी। दोनों ही मामलों ने भारतीय क्रिकेट टीम के सेट–अप को हिला कर रख दिया था।

Indian cricket Team : भारतीय क्रिकेट टीम इस समय फिर से सुर्खियों में है। मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के फैसलों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। घर की सरजमीं पर भारतीय क्रिकेट टीम को मिली हारों के बाद फैंस सोशल मीडिया पर दोनों को हटाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन टीम इंडिया के इतिहास में ये पहला मौका नहीं है, जब कप्तान और टीम मैनेजमेंट के बीच टकराव ने कोच या चयनकर्ताओं की कुर्सी हिला दी हो। इससे पहले भी एक बार ऐसा हुआ था, जब विवाद बढ़ने पर कोच और चीफ सेलेक्टर दोनों को ही हटना पड़ा और कप्तान अपनी जगह पर बने रहे।
क्रिकेट के गलियारों में लंबे समय से ये चर्चा रहती आई है कि भारतीय क्रिकेट टीम में कप्तान मजबूत हो तो अक्सर निशाने पर कोच या चयनकर्ता ही आते हैं। कई बार ऐसा भी हुआ है कि ड्रेसिंग रूम की अंदरूनी खींचतान बोर्ड की मीटिंग तक जा पहुंची और आखिर में फैसला उन चेहरों के खिलाफ गया, जिन्होंने टीम चुनने या उसे सख्ती से चलाने की कोशिश की थी। इसी संदर्भ में दो बड़े उदाहरण हमेशा याद किए जाते हैं महेंद्र सिंह धोनी और चयनकर्ता मोहिंदर अमरनाथ के बीच विवाद, और फिर कप्तान विराट कोहली तथा कोच अनिल कुंबले के बीच तनातनी। दोनों ही मामलों ने भारतीय क्रिकेट टीम के सेट–अप को हिला कर रख दिया था।
2011 में भारतीय क्रिकेट टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में वनडे वर्ल्ड कप जीता और पूरी दुनिया ने टीम इंडिया की ताकत को महसूस किया। लेकिन इसके बाद धोनी के प्रदर्शन और कप्तानी दोनों पर सवाल उठने लगे। 2012 में स्थिति यहां तक पहुंच गई कि चयन समिति ने तय किया कि अब भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी बदली जानी चाहिए। उस समय के चीफ सेलेक्टर मोहिंदर अमरनाथ और उनकी टीम इस बात के पक्ष में बताए जाते हैं कि धोनी को वनडे कप्तानी से हटाया जाए। लेकिन कहानी यहीं पलट गई। उस दौर के बीसीसीआई अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए चयनकर्ताओं के प्रस्ताव को ही खारिज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी पर कोई आंच नहीं आई, उल्टा अमरनाथ को ही सेलेक्टर पद से हटना पड़ा। यह फैसला इस बात की मिसाल बन गया कि जब बोर्ड के शीर्ष स्तर पर कप्तान के पक्ष में माहौल हो, तो भारतीय क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं की कुर्सी कितनी असुरक्षित हो सकती है।
साल 2017 में एक बार फिर भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम की खामोश लड़ाई सुर्खियों में आ गई। पाकिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में हार के बाद ये खबरें तेज हो गईं कि कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच अनिल कुंबले के बीच रिश्ते सामान्य नहीं रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुंबले की सख्त और अनुशासनप्रिय शैली से कई खिलाड़ी असहज महसूस करने लगे थे। माना जाता है कि भारतीय क्रिकेट टीम में वे फिटनेस, ड्रेसिंग रूम अनुशासन और रणनीति पर बेहद कड़ा रुख अपनाए हुए थे। कोहली ने इस पूरे माहौल को लेकर बीसीसीआई के सामने अपनी आपत्तियां रखीं। हालात इस कदर बिगड़े कि अंततः कुंबले ने ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में एक और ऐसा अध्याय जुड़ गया, जहां कप्तान और कोच के बीच टकराव का अंत कोच की विदाई के रूप में हुआ। Indian cricket Team