लेकिन अंतिम मुहर बिना बोर्ड की अनुमति के नहीं लग सकती और फिलहाल यही आखिरी ‘नोड’ ट्रेड के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। पूरी क्रिकेट बिरादरी इसी फैसले का इंतज़ार कर रही है कि बीसीसीआई कब हरी झंडी दिखाता है।

आईपीएल 2026 की ट्रेड विंडो खुलते ही कई बड़े खिलाड़ी इधर से उधर हुए शार्दुल ठाकुर का लखनऊ से मुंबई पहुंचना इसकी शुरुआत भर था। लेकिन असली हलचल उस ट्रेड को लेकर है, जिस पर पूरी क्रिकेट दुनिया की नजरें टिकी हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा और राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन की ‘मेगा स्वैप डील’ का प्रोसेस अंदरखाने शुरू तो हो चुका है, लेकिन फिर भी यह सौदा अब तक फाइनल क्यों नहीं हुआ? यही वो सवाल है जिसने फैंस से लेकर फ्रेंचाइजियों तक सभी को बेचैनी में डाल रखा है। आखिर पेंच फंसा कहां है?
असल पेंच बीसीसीआई की मंजूरी में अटका है। ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट बताती है कि जडेजा और संजू सैमसन के बीच होने वाली इस हाई-प्रोफाइल ट्रेड डील पर दोनों फ्रेंचाइजियों की सहमति तो मिल चुकी है, यहां तक कि शामिल सभी खिलाड़ियों ने भी हरी झंडी दे दी है। लेकिन अंतिम मुहर बिना बोर्ड की अनुमति के नहीं लग सकती और फिलहाल यही आखिरी ‘नोड’ ट्रेड के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। पूरी क्रिकेट बिरादरी इसी फैसले का इंतज़ार कर रही है कि बीसीसीआई कब हरी झंडी दिखाता है।
CSK कैंप में भी हलचल तेज है। रिपोर्टों के मुताबिक, एमएस धोनी, कप्तान रुतुराज गायकवाड़ और हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग की मौजूदगी में फ्रेंचाइजी का ‘थिंक टैंक’ शुक्रवार को रिटेंशन पर अंतिम रणनीतिक बैठक करने वाला है। समय कम है और दबाव ज्यादा क्योंकि सभी 10 टीमों को 15 नवंबर तक अपनी रिटेन लिस्ट बीसीसीआई को सौंपनी है। इसके बाद राह सीधे दिसंबर की 16 तारीख की ऑक्शन टेबल तक जाती है, जहां हर फैसले का असर टीमों की पूरी रणनीति बदल सकता है। जडेजा और सैमसन की कीमत का समीकरण भी इस ट्रेड को दिलचस्प बनाता है। आईपीएल 2025 के मेगा ऑक्शन से पहले CSK ने रवींद्र जडेजा को और राजस्थान ने संजू सैमसन को समान राशि 18-18 करोड़ रुपये में रिटेन किया था। यानी बाजार मूल्य के हिसाब से दोनों खिलाड़ी एक ही ब्रैकेट में आते हैं, जो इस स्वैप डील को और भी संतुलित और तगड़ा बनाता है। यही वजह है कि यह ट्रेड कागजों पर पूरी तरह फिट बैठता है, बस मंज़ूरी का इंतज़ार बाकी है। अब सवाल यह भी है कि सैम कर्रन इस ट्रेड की चर्चा में कैसे आ गए? दरअसल, शुरुआती बातचीत में राजस्थान रॉयल्स ने जडेजा के साथ दक्षिण अफ्रीका के युवा सनसनी डेवाल्ड ब्रेविस को भी पैकेज का हिस्सा बनाने की इच्छा जताई थी। लेकिन CSK ने ब्रेविस को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद वार्ता का रुख सैम कर्रन की ओर मुड़ा, ताकि ट्रेड का संतुलन बनाए रखा जा सके। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि तमाम अटकलों के बावजूद जडेजा–सैमसन ट्रेड पर अभी तक किसी भी फ्रेंचाइजी या बीसीसीआई की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है और यही सस्पेंस इस पूरे मामले को और भी रोचक बना देता है।