फ्रेंचाइजियों ने हर मेगा ऑक्शन में विदेशी सितारों पर करोड़ों लुटाए, लेकिन असली परीक्षा तो पिच पर हुई, जहाँ कई नामी खिलाड़ियों का जलवा फीका पड़ गया। ऐसे ही 5 दिग्गज क्रिकेटर्स हैं, जिनका इंटरनेशनल रुतबा आसमान छूता रहा, मगर आईपीएल में वे अपने नाम के मुताबिक असर छोड़ने में नाकाम साबित हुए।

आईपीएल को आज सिर्फ एक टी20 लीग नहीं, बल्कि क्रिकेट की सबसे चमकदार और हाई-वोल्टेज मंच के तौर पर देखा जाता है। 2008 से शुरू हुई इस लीग ने जहां कई अनजान चेहरों को सुपरस्टार बना दिया, वहीं कई बड़े अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को आइना भी दिखा दिया कि यहां सिर्फ बड़ा नाम, पुराना रिकॉर्ड और भारी भरकम कीमत ही मैच नहीं जिता सकते।फ्रेंचाइजियों ने हर मेगा ऑक्शन में विदेशी सितारों पर करोड़ों लुटाए, लेकिन असली परीक्षा तो पिच पर हुई, जहाँ कई नामी खिलाड़ियों का जलवा फीका पड़ गया। ऐसे ही 5 दिग्गज क्रिकेटर्स हैं, जिनका इंटरनेशनल रुतबा आसमान छूता रहा, मगर आईपीएल में वे अपने नाम के मुताबिक असर छोड़ने में नाकाम साबित हुए।
दक्षिण अफ्रीका के विस्फोटक ओपनर हर्शल गिब्स 2009 में डेक्कन चार्जर्स के खिताबी अभियान का हिस्सा रहे, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उनकी आईपीएल यात्रा उतनी यादगार नहीं रही। गिब्स ने लीग में कुल 36 मैच खेले और 27.68 की औसत से 886 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 109.78 रहा, जो टी20 के लिहाज से काफी साधारण माना जाता है। 500 से ज्यादा रन बनाने वाले विदेशी बल्लेबाज़ों में उनका स्ट्राइक रेट सबसे निचले पायदान पर है, जो साफ दिखाता है कि आईपीएल में गिब्स का आक्रामक अंदाज पूरी तरह नज़र नहीं आया।
ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल उन खिलाड़ियों में से हैं, जिन पर फ्रेंचाइज़ियां हर नीलामी में बड़ा दांव लगाती रहीं। ऑलराउंडर टैग, विस्फोटक बल्लेबाज़ी और उपयोगी ऑफ स्पिन – कागज पर वे किसी भी टीम के लिए सोने की खान नजर आए। लेकिन हकीकत यह रही कि 13 सीजन के लंबे करियर में मैक्सवेल सिर्फ दो बार ही 500 से ज्यादा रन बना पाए। कम से कम 10 मैच खेलने वाले पांच सीजन में तो वे 200 रन के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सके। आईपीएल में उनका खेल अक्सर एक–दो शानदार पारियों तक सिमट कर रह गया, जिस निरंतरता की उम्मीद उनसे की जाती थी, वह बार–बार टूटती रही।
श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान अपने दौर के सबसे खतरनाक और इनोवेटिव बल्लेबाजों में शुमार रहे। ‘दिलस्कूप’ शॉट से दुनिया के गेंदबाजों को परेशान करने वाले दिलशान से आईपीएल में भी वैसी ही आतिशी बल्लेबाज़ी की उम्मीद थी। 2008 से 2013 के बीच उन्होंने 52 आईपीएल मैच खेले, लेकिन 27 की औसत और महज 114 के स्ट्राइक रेट के साथ कुल 1153 रन ही बना सके। टी20 फॉर्मेट में जहां उनसे पावरप्ले में ताबड़तोड़ शुरुआत की उम्मीद थी, वहीं वे अक्सर रुक–रुक कर खेलते नजर आए। गेंदबाजी में भी उनका प्रभाव बेहद सीमित रहा और पूरे आईपीएल करियर में उनके खाते में सिर्फ 5 विकेट आए।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और 2021 टी20 विश्व कप विजेता टीम के लीडर आरोन फिंच को आईपीएल में शायद ही किसी और विदेशी खिलाड़ी की तरह इतना ‘घुमाया’ गया हो।
फिंच कुल 9 अलग–अलग टीमों के लिए खेले, लेकिन किसी एक फ्रेंचाइजी के लिए लंबे वक्त तक ‘मेनस्टे’ नहीं बन सके। उन्होंने 92 मैचों में 25 की औसत से 2091 रन बनाए और स्ट्राइक रेट 128 के आसपास रहा।इसके उलट, टी20 इंटरनेशनल में उनका रिकॉर्ड काफी बेहतर है – 34 की औसत और 142 के स्ट्राइक रेट के साथ वे दो बार 150 से ज्यादा की पारी खेल चुके हैं। यह फर्क साफ दिखाता है कि जिस तरह फिंच ने ऑस्ट्रेलिया के लिए बल्लेबाज़ी में धमाल मचाया, वैसा प्रभाव आईपीएल में दोहराने में वे नाकाम रहे।
इंग्लैंड क्रिकेट के चेहरा बदलने वाले कप्तान इयोन मॉर्गन ने 2019 में अपने देश को पहला वनडे विश्व कप दिलाया। आक्रामक सोच, आधुनिक रणनीति और मैच फिनिश करने की काबिलीयत के साथ वे आईपीएल टीमों के लिए भी बड़ी उम्मीद का नाम थे। मॉर्गन ने चार अलग–अलग फ्रेंचाइज़ियों के लिए कुल 83 मैच खेले, लेकिन यहां उनका बल्ला पूरी तरह नहीं चल पाया। उन्होंने 22.66 की औसत और 122 की स्ट्राइक रेट से 1405 रन बनाए, जो उनके अंतरराष्ट्रीय कद के मुकाबले बेहद सामान्य आंकड़े हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी संभालने के बावजूद वे टीम को बैटिंग से वह भरोसा नहीं दे सके, जिसकी उनसे अपेक्षा थी।