टीम का ऐलान 5 नवंबर को किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि जहां विकेटकीपर ऋषभ पंत चोट से उबरकर टीम में वापसी करने में सफल रहे, वहीं लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद शमी को एक बार फिर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सीजन में शमी ने शुरुआती तीन मुकाबलों में 15 विकेट चटकाए हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो टेस्ट स्क्वॉड में जगह मिली और ना ही इंडिया-ए टीम में। यही बात उनके बचपन के कोच मोहम्मद बदरूद्दीन को नागवार गुजरी है। उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा - “यह बिल्कुल साफ है कि शमी को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। जब कोई खिलाड़ी लाल गेंद क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन कर रहा हो और तीन मैचों में 15 विकेट ले, तो उसे अनफिट कैसे कहा जा सकता है? चयनकर्ता शायद परफॉर्मेंस नहीं, कुछ और देख रहे हैं।
बदरूद्दीन ने आगे कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर शमी को किन आधारों पर टीम से बाहर रखा गया। उन्होंने यह भी बताया कि लगातार अनदेखी के कारण शमी मानसिक रूप से परेशान हैं, लेकिन उनका जज्बा अभी भी बरकरार है। जब कोई खिलाड़ी परफॉर्म करे और फिर भी टीम में जगह न मिले, तो स्वाभाविक है कि वह टूट जाता है। लेकिन मैं यकीन के साथ कह सकता हूं - शमी ऐसी वापसी करेगा कि सब आलोचक खामोश हो जाएंगे।
शमी ने भी पहले ही यह साफ किया था कि वे पूरी तरह फिट हैं और इसका प्रमाण उनके रणजी और दलीप ट्रॉफी प्रदर्शन में देखा जा सकता है। बावजूद इसके, चयनकर्ताओं का यह तर्क कि उनकी फिटनेस पर संदेह है, अब क्रिकेट गलियारों में बहस का विषय बन चुका है।