
एशिया कप 2025 का रोमांचक फाइनल रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार 28 सितंबर को खेला जाएगा। टूर्नामेंट में अब तक टीम इंडिया ने 6 में से 6 मुकाबले जीतकर अपनी ताकत का परिचय दिया है और पाकिस्तान को भी दो बार शिकस्त दी है। 14 सितंबर को हुए ग्रुप स्टेज मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से हराया, वहीं अगले मुकाबले में 6 विकेट से जीत दर्ज की। अब तीसरी और निर्णायक भिड़ंत यानी फाइनल बची है, जो एशिया की चैम्पियनशिप का ताज तय करेगी। लेकिन जीत के इस सफर में टीम इंडिया को कुछ अहम कमजोरियों पर ध्यान देना होगा। आइए जानते हैं वह 5 बड़ी चुनौतियां, जिनसे निपटना फाइनल में बेहद जरूरी होगा। IND vs PAK Final
एशिया कप के ग्रुप स्टेज में जसप्रीत बुमराह ने अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया, खासकर पाकिस्तान के खिलाफ पहले मुकाबले में उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। लेकिन 22 सितंबर को हुई उनकी दूसरी भिड़ंत में बुमराह का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा; 4 ओवर में उन्होंने 45 रन खर्च किए और कोई विकेट नहीं लिया। वहीं, बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने फिर से अपनी लय हासिल कर दिखाई। फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मुकाबले में बुमराह का फिट और लय में रहना टीम इंडिया के लिए निर्णायक होगा। श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने आराम किया ताकि फाइनल में अपने पूरे दमखम के साथ मैदान पर उतर सकें। पाकिस्तान के खिलाफ बुमराह का खेल भारत की जीत की कुंजी साबित हो सकता है।
एशिया कप में टीम इंडिया की फील्डिंग एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है। अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने 12 आसान कैच छोड़ दिए हैं, जो इस टूर्नामेंट में किसी भी टीम से सबसे ज्यादा हैं। इसके मुकाबले पाकिस्तान ने सिर्फ 3 कैच गंवाए। फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मुकाबले में छोटी-छोटी फील्डिंग की गलती भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में टीम इंडिया को फील्डिंग सुधारना होगा, नहीं तो हाई-प्रेशर फाइनल में यह बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है।
पाकिस्तान के खिलाफ पहले मुकाबले में सूर्यकुमार यादव ने 47 रन की नाबाद पारी खेलकर सबको प्रभावित किया था, लेकिन उसके बाद उनका बल्ला शांत रहा। ओमान के खिलाफ तो वे मैदान पर आए ही नहीं, और पाकिस्तान से भिड़ंत में भी खाता खोलने में नाकाम रहे। बांग्लादेश के खिलाफ केवल 5 रन बनाने के बाद श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 12 रन जोड़े। फाइनल में अगर सलामी जोड़ी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो सूर्या की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। ऐसे में उनका खराब फॉर्म टीम इंडिया के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
अक्षर पटेल और हार्दिक पंड्या का फॉर्म अभी स्थिर नहीं दिख रही है। ग्रुप स्टेज में जीत भले ही टीम इंडिया ने बटोरी हो, लेकिन मध्यक्रम की इस कमजोरी ने फाइनल से पहले चिंता बढ़ा दी है। अगर पारी के बीच विकेट जल्दी गिरते हैं, तो इन दोनों खिलाड़ियों का फॉर्म बनाए रखना टीम की जीत की कुंजी साबित हो सकता है। फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मुकाबले में उनका प्रदर्शन भारतीय मध्यक्रम की मजबूती तय करेगा।
टीम इंडिया की शुरुआत फिलहाल अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल की जोड़ी पर टिकी हुई है। दोनों ने शानदार बल्लेबाजी कर टीम को मजबूत नींव दी है, लेकिन फाइनल जैसे हाई-प्रेशर मुकाबले में सिर्फ इन्हीं दोनों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने पर मध्यक्रम और अन्य बल्लेबाजों को जिम्मेदारी संभालनी होगी, ताकि टीम दबाव में न आए और भारत अपने चैंपियन बनने के सपने को पूरा कर सके।
1985 – बेन्सन एंड हेजेस वर्ल्ड चैम्पियनशिप, मेलबर्न: भारत की 8 विकेट से जीत
1986 – ऑस्ट्रल-एशिया कप, शारजाह: पाकिस्तान ने 1 विकेट से जीता
1994 – ऑस्ट्रल-एशिया कप, शारजाह: पाकिस्तान ने 39 रनों से जीत हासिल की
2007 – टी20 वर्ल्ड कप, जोहानिसबर्ग: भारत की 5 रनों से जीत
2017 – चैम्पियंस ट्रॉफी, ओवल: पाकिस्तान ने 180 रनों से मैच जीता IND vs PAK Final