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फुटबॉल को दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल कहा जाता है, लेकिन यह खेल जितना रोमांचक है, उतना ही विवादों से भी भरा रहा है। एक गलत ऑफसाइड, पेनल्टी पर विवाद या रेफरी की चूक कई बार पूरे मैच का नतीजा बदल देती थी।

FIFA World Cup : फुटबॉल को दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल कहा जाता है, लेकिन यह खेल जितना रोमांचक है, उतना ही विवादों से भी भरा रहा है। एक गलत ऑफसाइड, पेनल्टी पर विवाद या रेफरी की चूक कई बार पूरे मैच का नतीजा बदल देती थी। करोड़ों दर्शक टीवी स्क्रीन पर साफ-साफ गलती देख लेते थे, लेकिन मैदान पर मौजूद रेफरी के पास अपना फैसला बदलने का कोई विकल्प नहीं होता था। इसी समस्या का समाधान है VAR यानी वीडियो असिस्टेंट रेफरी। आज फुटबॉल में VAR केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि न्याय और तकनीक के मेल का प्रतीक बन चुका है। हालांकि इसके समर्थक और आलोचक दोनों हैं, लेकिन यह तय है कि इसने खेल को पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी बनाया है। FIFA World Cup
VAR का पूरा नाम Video Assistant Referee है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें मैदान के बाहर बैठे रेफरी और वीडियो विशेषज्ञ कई कैमरों की मदद से मैच की हर महत्वपूर्ण घटना पर नजर रखते हैं। अगर उन्हें लगता है कि मैदान पर मौजूद मुख्य रेफरी से कोई बड़ी गलती हुई है, तो वे तुरंत उसे सूचित करते हैं। इसके बाद मुख्य रेफरी चाहे तो मैदान के किनारे लगी स्क्रीन पर घटना को दोबारा देख सकता है या फिर सीधे VAR टीम की सलाह पर फैसला बदल सकता है। सरल शब्दों में कहें तो VAR फुटबॉल का "थर्ड अंपायर" है, जैसा क्रिकेट में DRS या थर्ड अंपायर होता है। FIFA World Cup
फुटबॉल में तकनीक को शामिल करने की मांग वर्षों से उठती रही थी। खासकर 2010 के विश्व कप में इंग्लैंड और जर्मनी के मैच ने इस बहस को तेज कर दिया। इंग्लैंड के खिलाड़ी फ्रैंक लैम्पर्ड का शॉट गोललाइन पार कर गया था, लेकिन रेफरी ने गोल नहीं दिया। टीवी रिप्ले में पूरी दुनिया ने देखा कि गेंद गोललाइन के अंदर थी, लेकिन मैच का फैसला बदल नहीं सका।
इसके बाद फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA और International Football Association Board ने तकनीकी समाधान तलाशना शुरू किया। कई वर्षों के परीक्षण के बाद 2018 में रूस में आयोजित 2018 FIFA World Cup में पहली बार VAR का इस्तेमाल किया गया और तभी से यह विश्व कप का स्थायी हिस्सा बन गया। FIFA World Cup
हर फैसले में VAR दखल नहीं देता। इसके लिए चार खास परिस्थितियां तय की गई हैं। पहली स्थिति गोल से जुड़ी होती है। यदि गोल होने से पहले ऑफसाइड, फाउल या हैंडबॉल की आशंका हो, तो VAR उस पूरे मूव की जांच करता है। दूसरी स्थिति पेनल्टी से जुड़ी होती है। अगर रेफरी ने गलत पेनल्टी दे दी हो या साफ पेनल्टी को नजरअंदाज कर दिया हो, तो VAR हस्तक्षेप करता है। तीसरी स्थिति सीधे रेड कार्ड से जुड़ी होती है। यदि किसी खिलाड़ी को गंभीर फाउल के बावजूद रेड कार्ड नहीं मिला या गलती से किसी अन्य खिलाड़ी को कार्ड दे दिया गया, तो VAR इसकी समीक्षा करता है। चौथी स्थिति गलत पहचान यानी Mistaken Identity की होती है। उदाहरण के लिए, अगर रेफरी ने गलत खिलाड़ी को कार्ड दिखा दिया हो, तो VAR उसे सुधारने में मदद करता है। FIFA World Cup
विश्व कप में स्टेडियम के चारों ओर दर्जनों हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए जाते हैं। इन कैमरों से आने वाली हर तस्वीर एक विशेष वीडियो ऑपरेशन रूम तक पहुंचती है, जहां VAR टीम बैठी होती है। जैसे ही कोई विवादित घटना होती है, VAR टीम अलग-अलग एंगल से वीडियो देखती है। यदि उन्हें लगता है कि मैदान पर मौजूद रेफरी से कोई "स्पष्ट और गंभीर गलती" हुई है, तो वे उसके कान में लगे कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए संदेश भेजते हैं। इसके बाद मुख्य रेफरी दो विकल्प चुन सकता है। वह VAR टीम की सलाह को सीधे स्वीकार कर सकता है या फिर मैदान के किनारे लगी मॉनिटर स्क्रीन पर घटना को खुद देखकर अंतिम फैसला ले सकता है। अंतिम निर्णय हमेशा मैदान पर मौजूद मुख्य रेफरी का ही होता है। FIFA World Cup
रूस में आयोजित 2018 विश्व कप VAR के लिए एक बड़ी परीक्षा था। शुरुआती संदेहों के बावजूद इस तकनीक ने कई विवादित फैसलों को सही साबित किया। उस विश्व कप में पेनल्टी की संख्या बढ़ गई, क्योंकि कैमरों की मदद से बॉक्स के अंदर होने वाले छोटे-छोटे फाउल भी पकड़ में आने लगे। कई गोल ऑफसाइड होने के कारण रद्द किए गए और कई टीमों को ऐसे पेनल्टी मिले, जो पहले शायद कभी नहीं मिलते। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि VAR ने रेफरी की विश्वसनीयता बढ़ाई और खेल को अधिक निष्पक्ष बनाया। FIFA World Cup
इस सवाल का जवाब आसान नहीं है। VAR के समर्थकों का कहना है कि इससे गलत फैसले कम हुए हैं। पहले जहां एक रेफरी की चूक पूरी टीम के सपनों को तोड़ सकती थी, वहीं अब तकनीक की मदद से ऐसी गलतियों को सुधारा जा सकता है। लेकिन आलोचकों की राय अलग है। उनका मानना है कि VAR के कारण खेल की रफ्तार प्रभावित होती है। गोल होने के बाद खिलाड़ी और दर्शक तुरंत जश्न नहीं मना पाते, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं VAR गोल रद्द न कर दे। कई बार ऑफसाइड के बेहद मामूली अंतर पर गोल रद्द होने से भी बहस छिड़ जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तकनीक खेल की भावना से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है? FIFA World Cup
2022 के विश्व कप में VAR को और आधुनिक बनाने के लिए Semi-Automated Offside Technology का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में गेंद के अंदर सेंसर लगाए गए और खिलाड़ियों के शरीर की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए विशेष कैमरे लगाए गए। इससे ऑफसाइड का फैसला कुछ ही सेकंड में लिया जाने लगा और मानवीय त्रुटि की संभावना काफी कम हो गई। यह तकनीक दिखाती है कि आने वाले वर्षों में फुटबॉल और तकनीक का रिश्ता और मजबूत होने वाला है। FIFA World Cup
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