3 लगातार विकेट और ‘हैट्रिक’ का रिश्ता क्या है? जानें पूरा इतिहास
क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज लगातार तीन गेंदों पर तीन बल्लेबाजों को आउट कर देता है, तो उसे हैट्रिक कहा जाता है। यह उपलब्धि क्रिकेट की सबसे खास और मुश्किल उपलब्धियों में गिनी जाती है। हर गेंदबाज अपने करियर में यह कारनामा करना चाहता है, लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ही इसे अंजाम दे पाते हैं।

Cricket Facts : क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज लगातार तीन गेंदों पर तीन बल्लेबाजों को आउट कर देता है, तो उसे हैट्रिक कहा जाता है। यह उपलब्धि क्रिकेट की सबसे खास और मुश्किल उपलब्धियों में गिनी जाती है। हर गेंदबाज अपने करियर में यह कारनामा करना चाहता है, लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ही इसे अंजाम दे पाते हैं। इसकी वजह साफ है लगातार तीन गेंदों पर विकेट लेना केवल हुनर का नहीं, बल्कि संयम, रणनीति और दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन का भी खेल है। टेस्ट, वनडे और टी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में अब तक कई हैट्रिक दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन जब भी कोई गेंदबाज यह कमाल करता है, वह पल खास बन जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर क्रिकेट में तीन लगातार विकेट लेने को हैट्रिक ही क्यों कहा जाता है? इस शब्द का इतिहास क्या है? आइए, इसकी दिलचस्प कहानी समझते हैं।
19वीं सदी से जुड़ा है ‘हैट्रिक’ का इतिहास
‘हैट्रिक’ शब्द की जड़ें इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास में मिलती हैं। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1858 में हुई थी। उस समय हीथफील्ड हारमन स्टीफेंसन नाम के गेंदबाज ने एक मैच में लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लेकर सनसनी मचा दी थी। वह उस दौर के बहुमुखी खिलाड़ी थे। बताया जाता है कि शेफील्ड के हाइड पार्क मैदान में खेले गए उस मुकाबले में स्टीफेंसन ने ऑल इंग्लैंड टीम की ओर से खेलते हुए विरोधी टीम के तीन बल्लेबाजों को लगातार तीन गेंदों पर पवेलियन भेज दिया। उस समय यह उपलब्धि इतनी असाधारण मानी गई कि दर्शकों और समर्थकों ने इसे विशेष सम्मान देने का फैसला किया। स्टीफेंसन के इस बेहतरीन प्रदर्शन से प्रभावित होकर दर्शकों ने चंदा इकट्ठा किया और उनके लिए एक टोपी (Hat) खरीदी। मैच के बाद यह टोपी उन्हें सम्मान स्वरूप भेंट की गई। यहीं से इस उपलब्धि का संबंध ‘हैट’ से जुड़ गया। बाद में लगातार तीन सफलताओं को इसी संदर्भ में हैट-ट्रिक कहा जाने लगा। हालांकि इस घटना के बाद ‘हैट्रिक’ शब्द प्रचलन में आने लगा था, लेकिन इसे व्यापक पहचान बाद में मिली। 1878-79 में जब फ्रेड स्पॉफोर्थ ने टेस्ट क्रिकेट में पहली हैट्रिक दर्ज की, तब अखबारों में ‘हैट्रिक’ शब्द प्रमुखता से छपा। इसके बाद यह शब्द क्रिकेट की स्थायी शब्दावली का हिस्सा बन गया। धीरे-धीरे हैट्रिक क्रिकेट प्रेमियों की भाषा में ऐसा शामिल हुई कि आज यह खेल के सबसे लोकप्रिय शब्दों में गिनी जाती है।
सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा ‘हैट्रिक’ का दायरा
आज ‘हैट्रिक’ शब्द का इस्तेमाल केवल क्रिकेट में ही नहीं होता। फुटबॉल, हॉकी और कई अन्य खेलों में भी जब कोई खिलाड़ी लगातार तीन गोल करता है या तीन बड़ी सफलताएं हासिल करता है, तो उसे हैट्रिक कहा जाता है। हालांकि इस शब्द की असली शुरुआत क्रिकेट से ही मानी जाती है। Cricket Facts
Cricket Facts : क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज लगातार तीन गेंदों पर तीन बल्लेबाजों को आउट कर देता है, तो उसे हैट्रिक कहा जाता है। यह उपलब्धि क्रिकेट की सबसे खास और मुश्किल उपलब्धियों में गिनी जाती है। हर गेंदबाज अपने करियर में यह कारनामा करना चाहता है, लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ही इसे अंजाम दे पाते हैं। इसकी वजह साफ है लगातार तीन गेंदों पर विकेट लेना केवल हुनर का नहीं, बल्कि संयम, रणनीति और दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन का भी खेल है। टेस्ट, वनडे और टी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में अब तक कई हैट्रिक दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन जब भी कोई गेंदबाज यह कमाल करता है, वह पल खास बन जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर क्रिकेट में तीन लगातार विकेट लेने को हैट्रिक ही क्यों कहा जाता है? इस शब्द का इतिहास क्या है? आइए, इसकी दिलचस्प कहानी समझते हैं।
19वीं सदी से जुड़ा है ‘हैट्रिक’ का इतिहास
‘हैट्रिक’ शब्द की जड़ें इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास में मिलती हैं। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1858 में हुई थी। उस समय हीथफील्ड हारमन स्टीफेंसन नाम के गेंदबाज ने एक मैच में लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लेकर सनसनी मचा दी थी। वह उस दौर के बहुमुखी खिलाड़ी थे। बताया जाता है कि शेफील्ड के हाइड पार्क मैदान में खेले गए उस मुकाबले में स्टीफेंसन ने ऑल इंग्लैंड टीम की ओर से खेलते हुए विरोधी टीम के तीन बल्लेबाजों को लगातार तीन गेंदों पर पवेलियन भेज दिया। उस समय यह उपलब्धि इतनी असाधारण मानी गई कि दर्शकों और समर्थकों ने इसे विशेष सम्मान देने का फैसला किया। स्टीफेंसन के इस बेहतरीन प्रदर्शन से प्रभावित होकर दर्शकों ने चंदा इकट्ठा किया और उनके लिए एक टोपी (Hat) खरीदी। मैच के बाद यह टोपी उन्हें सम्मान स्वरूप भेंट की गई। यहीं से इस उपलब्धि का संबंध ‘हैट’ से जुड़ गया। बाद में लगातार तीन सफलताओं को इसी संदर्भ में हैट-ट्रिक कहा जाने लगा। हालांकि इस घटना के बाद ‘हैट्रिक’ शब्द प्रचलन में आने लगा था, लेकिन इसे व्यापक पहचान बाद में मिली। 1878-79 में जब फ्रेड स्पॉफोर्थ ने टेस्ट क्रिकेट में पहली हैट्रिक दर्ज की, तब अखबारों में ‘हैट्रिक’ शब्द प्रमुखता से छपा। इसके बाद यह शब्द क्रिकेट की स्थायी शब्दावली का हिस्सा बन गया। धीरे-धीरे हैट्रिक क्रिकेट प्रेमियों की भाषा में ऐसा शामिल हुई कि आज यह खेल के सबसे लोकप्रिय शब्दों में गिनी जाती है।
सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा ‘हैट्रिक’ का दायरा
आज ‘हैट्रिक’ शब्द का इस्तेमाल केवल क्रिकेट में ही नहीं होता। फुटबॉल, हॉकी और कई अन्य खेलों में भी जब कोई खिलाड़ी लगातार तीन गोल करता है या तीन बड़ी सफलताएं हासिल करता है, तो उसे हैट्रिक कहा जाता है। हालांकि इस शब्द की असली शुरुआत क्रिकेट से ही मानी जाती है। Cricket Facts












