
मैच के दूसरे दिन यशस्वी जायसवाल अपनी पारी को 173 रनों तक ले जाकर दोहरे शतक की ओर तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया। वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जेडन सील्स की ऑफ स्टंप पर फुल लेंथ गेंद पर यशस्वी ने मिड-ऑफ की दिशा में ड्राइव खेला और रन लेने की कोशिश की। लेकिन फील्डर तेजनारायण चंद्रपॉल ने बेहतरीन फील्डिंग करते हुए गेंद को तेजी से उठाकर विकेटकीपर को थ्रो कर दिया।
यशस्वी ने दौड़ तो लगाई, लेकिन नॉन-स्ट्राइकर छोर पर खड़े शुभमन गिल ने उन्हें रन लेने से मना कर दिया। जब तक यशस्वी वापस लौटने की कोशिश करते, गेंद पहले ही विकेटकीपर तक पहुँच चुकी थी। इस हादसे के चलते उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा और उनके चेहरे पर दोहरा शतक चूकने का दुख साफ दिखाई दिया। इस रन आउट ने यशस्वी के दोहरे शतक के सपने को तो तोड़ दिया, लेकिन उनकी खेल शैली और आक्रामक बल्लेबाजी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और भारतीय टीम की पारी को मजबूती प्रदान की।
यशस्वी जायसवाल भले ही दोहरा शतक जड़ने में सफल नहीं हो पाए, लेकिन उनकी इस पारी को भारतीय क्रिकेट फैंस लंबे समय तक याद रखेंगे। उन्होंने 258 गेंदों का सामना करते हुए 175 रन ठोके और दर्शकों को शानदार स्ट्रोक खेल का रोमांच दिया। इस पारी में उन्होंने 22 चौके लगाकर अपनी तकनीक और संयम का बेजोड़ प्रदर्शन किया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यशस्वी ने अपनी इस लंबी पारी में एक भी छक्का नहीं लगाया, जो कि आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में बेहद दुर्लभ होता है। इस पारी ने न केवल उनकी मैच में अहम भूमिका को उजागर किया, बल्कि यह भी साबित किया कि यशस्वी केवल दमदार खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि रणनीति और धैर्य के मामले में भी पारंगत हैं। Yashasvi Jaiswal