
सैयद अली सुल्तान शाह दरगाह प्रबंधन ने ग्रामीणों को भेजे नोटिस में कहा है कि जिन ज़मीनों पर वे वर्षों से रह रहे हैं, वे वक्फ की संपत्ति (Waqf Property) हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि ग्रामीणों को वक्फ बोर्ड से औपचारिक समझौता करना होगा और दरगाह को किराया देना पड़ेगा। किराया न देने पर जमीन खाली करने की चेतावनी भी दी गई है, अन्यथा इसे अतिक्रमण माना जाएगा और वक्फ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस मिलने के बाद गांव में नाराजगी फैल गई। ग्रामीणों ने वेल्लोर जिला कलेक्टर कार्यालय तक मार्च किया और कलेक्टर वीआर सुब्बुलक्ष्मी से हस्तक्षेप की मांग की। जिला प्रशासन ने फिलहाल किराया न देने की सलाह दी है और मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। कलेक्टर ने दरगाह के केयरटेकर एफ सैयद साथम और ग्रामीणों से बातचीत की है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे चार पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और उनके पास रजिस्ट्रेशन, टैक्स और अन्य वैध दस्तावेज़ हैं। एक ग्रामीण ने बताया, "हमारी जमीन रजिस्टर्ड है, हमने पानी का टैक्स भी चुकाया है, फिर भी हमें वक्फ संपत्ति (Waqf Property) का नोटिस मिला है।"
यह पहला मामला नहीं है जब तमिलनाडु में वक्फ संपत्ति (Waqf Property) को लेकर विवाद उठा है। वर्ष 2022 में तिरुचिरापल्ली के तिरुचेंदुरई गांव में वक्फ बोर्ड ने लगभग 400 एकड़ जमीन पर दावा किया था, जिसमें चोल युग का एक मंदिर भी शामिल था। तब राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था। Waqf Property :