AI न्यूज एंकर का बढ़ता चलन, पत्रकारिता के लिए खतरा या अवसर?
भारत
चेतना मंच
19 Jul 2025 12:46 PM
AI Journlism : आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। अब यह पत्रकारिता और मीडिया की दुनिया में भी दस्तक दे चुका है। हाल ही में कई न्यूज चैनलों ने AI आधारित वर्चुअल न्यूज एंकर लॉन्च किए हैं, जो बिना थके, बिना रुके 24 घंटे खबरें पढ़ सकते हैं। इनका चेहरा, आवाज़ और हाव-भाव इतने रियल लगते हैं कि कई बार दर्शक पहचान ही नहीं पाते। लेकिन इस तकनीक ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या एआई एंकर पत्रकारों की जगह ले लेंगे? क्या इससे खबरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा? जहां एक ओर AIके जरिए खबरों का प्रसारण आसान और तेज़ होगा, वहीं दूसरी ओर इसके नैतिक और सामाजिक पहलुओं पर भी गंभीर चर्चा होनी जरूरी है। तो क्या AI न्यूज एंकर पत्रकारिता के लिए अवसर हैं या एक नया खतरा?
क्या हैं एआई न्यूज एंकर?
एआई ( AI ) न्यूज एंकर दरअसल कम्प्यूटर जनरेटेड वर्चुअल एंकर होते हैं, जो बिल्कुल इंसानों की तरह खबरें पढ़ते हैं। इनका चेहरा, आवाज़ और हाव-भाव इतने वास्तविक लगते हैं कि कई बार लोग फर्क भी नहीं कर पाते। इन्हें हजारों खबरें पढ़ने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है, वो भी बिना थके और बिना गलती के
AI न्यूज एंकर से मिलने वाले फायदे
1. 24x7 न्यूज टेलीकास्ट
AI एंकर कभी नहीं थकते। वे दिन-रात खबरें पढ़ सकते हैं, जिससे न्यूज चैनल्स को ब्रेकिंग न्यूज देने में तेजी मिलेगी।
2. कम लागत में अधिक काम
जहां इंसानी एंकर को वेतन, छुट्टियां और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती हैं वहीं एआई एंकर एक बार तैयार होने के बाद लगातार काम कर सकते हैं। इससे मीडिया कंपनियों की लागत में भारी कमी आएगी।
3. कंटेंट पर्सनलाइजेशन
एआई की मदद से हर दर्शक को उसकी पसंद की खबरें पहुंचाई जा सकती हैं। जैसे अगर कोई दर्शक खेल की खबरें देखना चाहता है तो एआई उसे खेल के अपडेट्स ही दिखाएगा।
क्या AI पत्रकारिता पर असर डालेगा?
रोजगार की चिंता
अगर एआई एंकर ज्यादा इस्तेमाल होने लगे तो हजारों पत्रकारों और न्यूज एंकरों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। क्या एआई एंकर खुद रिपोर्टिंग कर सकते हैं? क्या वे सवाल पूछ सकते हैं या घटनाओं को समझ सकते हैं? फिलहाल नहीं। एआई केवल स्क्रिप्ट पढ़ते हैं। ऐसे में अगर गलत खबर फीड कर दी जाए तो वह बिना सोचे-समझे प्रसारित हो जाएगी।
भावनाओं की कमी
इंसानी एंकर की तरह एआई एंकर खबरों में संवेदना, सहानुभूति या भावनाएं नहीं दिखा सकते। खबरों में मानवीय जुड़ाव कम हो जाएगा।
4. फेक न्यूज का खतरा
एआई के जरिए ग़लत खबरें या प्रोपेगेंडा आसानी से फैलाया जा सकता है। इससे समाज में अफवाहें और भ्रम की स्थिति बन सकती है।
तकनीक का विकास रोकना संभव नहीं है। एआई न्यूज एंकर एक क्रांतिकारी कदम हैं लेकिन इनके उपयोग में संतुलन ज़रूरी है। एआई को पत्रकारों की जगह नहीं बल्कि उनकी मदद के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जहां एआई तेजी से खबरें पढ़ सकता है, वहीं पत्रकारों का काम खबरों की गहराई से पड़ताल करना, सवाल उठाना और सच्चाई सामने लाना है।
भविष्य में एआई और पत्रकारिता का साथ चलना ही सही रास्ता होगा। अगर सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह पत्रकारिता के लिए अवसर बन सकता है, न कि खतरा।