
वैसे तो हैदराबाद के आखिरी निज़ाम इतने अधिक सम्पन्न थे कि उन्होंने पहले वर्ल्ड वार के समय अपनी सम्पदा का 25 मिलियन पाउंड अंग्रेजों को दे दिया था। वहीं अगर उनके सम्राज्य की बात की जाए तो 80 हजार स्क्वायर-किलोमीटर जैसे बड़े क्षेत्र में फैला हुआ था। वे उस दौर के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे और उन्हीं के नाम पर उस्मानिया यूनिवर्सिटी की नींव भी पड़ी लेकिन हैदराबाद के आखिरी निज़ाम की रईसी से कहीं ज्यादा उनके कंजूसी के किस्से मशहूर हुआ करते थे। उनके पैसे को रोकने की आदत, काम पर रखे गए नौकरों को एक छोटा और गंदा कमरा देना, यहाँ तक कि उनके खुद के कमरे भी सिगरेट के कूड़े से भरे रहते थे और उन्हें वे कभी - कभार ही साफ कराया करते। कई मशहूर लेखकों ने उनकी इस कंजूसी की आदत के बारे में खुलकर लिखा है।
ज़ब हैदराबाद के निजामों के इतिहास (Hyderabad Nijaam History) को जानने के लिए कुछ प्रसिद्ध इतिहासकारों और लेखकों की किताब के पन्ने पलटाये जाते हैं तो कई अजीब शान - शौकत की बातें सामने निकल कर आती हैं। ऐसी ही एक बात निजामों के बारे में लिखी हुई है कि जाह मुकर्रम ने सुपारी और अखरोट खाने के लिए अलग से नौकर रखे थे जो उन्हें सुपारी और अखरोट पीस कर देते थे।