आत्महत्या का सबसे बड़ा रिकॉर्ड आया सामने! NCRB की नई रिपोर्ट में...
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:02 PM
हाल ही में आई नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट ने एक गंभीर सचाई को उजागर किया है। देश में स्कूल के छात्रों के आत्महत्या करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर सेकेंडरी क्लास यानी 9वीं और 10वीं के छात्र सबसे अधिक प्रभावित हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर चिंता जताई थी और IITs समेत विभिन्न कोचिंग संस्थानों में छात्र आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कई संस्थानों को नोटिस भी जारी किया है ताकि इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। NCRB Report
2023 में छात्र आत्महत्या का रिकॉर्ड तोड़ा
NCRB की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस साल में छात्र आत्महत्या की दर सबसे अधिक दर्ज की गई है। साल 2023 में देशभर में कुल 13,892 छात्रों ने आत्महत्या की जो कुल आत्महत्या के मामलों का 8.1% हिस्सा है। जबकि 2022 में यह संख्या 13,044 थी जो कुल मामलों का 7.6% था। तुलना करें तो 2014 में छात्र आत्महत्या का आंकड़ा मात्र 8032 था जो कुल आत्महत्या का 6.1% था।
सेकेंडरी क्लास के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों में आत्महत्या की दर सबसे ज्यादा है। कुल छात्र आत्महत्या में से 24.6% मामले इसी वर्ग के हैं। इसके बाद मिडिल क्लास (6 से 8वीं) के छात्रों की आत्महत्या दर 18.6% और हायर सेकेंडरी (11वीं-12वीं) के छात्रों की 17.5% दर्ज की गई है। प्राइमरी क्लास के छात्रों की आत्महत्या की दर भी चिंता का विषय है जो 14.8% है।
प्रोफेशनल कोर्स के छात्रों में आत्महत्या की दर सबसे कम
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेशनल कोर्स (जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि) कर रहे छात्रों में आत्महत्या की दर सबसे कम यानी केवल 0.4% है। वहीं ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों में यह दर 5.5% है और डिप्लोमा कोर्स में 1.7% है। साथ ही, जिन युवा शिक्षा नहीं ग्रहण कर रहे हैं उनमें आत्महत्या की दर 11.8% है जो एक गंभीर चेतावनी है। यह रिपोर्ट यह साफ दिखाती है कि बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी समस्याओं पर ध्यान देना कितना जरूरी है। परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए ठोस और कारगर कदम उठाने होंगे ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रहे। NCRB Report