
मिर्जापुर जिले के अत्रैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर यह घोटाला(Toll Plaza Scam) हुआ था, जहां टोल मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए नकद लेन-देन में अनियमितताएं पाई गईं। एसटीएफ की जांच में यह सामने आया कि टोल प्लाजा पर फास्टैग/ब्लैकलिस्टेड फास्टैग वाले वाहनों से अलग हैंडहेल्ड मशीनों से पैसे लिए गए। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई, लेकिन नकद लेन-देन में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।
सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 98% टोल कलेक्शन ईटीसी सिस्टम से हो रहा है। जब अवैध फास्टैग वाले वाहन टोल प्लाजा में प्रवेश करते थे, तो बूम बैरियर नहीं खुलता था और इस कारण वाहन चालक से अतिरिक्त नकद शुल्क लिया जाता था। टोल ऑपरेटर इस राशि को छूट या उल्लंघन के रूप में दिखाकर अवैध पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) मशीनों से रसीदें जारी करते थे। इसके अलावा, ओवरलोड वाहनों से अतिरिक्त नकद वसूली की भी संभावना है।
इस घोटाले(Toll Plaza Scam) के बाद सरकार ने एनएचएआई के तहत यूजर फीस एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया और उस पर एक साल का बैन भी लगाया। इसके अलावा, एसटीएफ ने आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है और 13 यूजर फीस संग्रह एजेंसियों पर दो साल का बैन लगाया गया है। सरकार अब टोल प्लाजा पर ऑडिट कैमरे लगाने और एआई आधारित प्रणाली के जरिए डेटा को सटीक तरीके से मापने का विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।
सरकार की यह कड़ी कार्रवाई यह दर्शाती है कि वह इस घोटाले(Toll Plaza Scam) को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए ठोस कदम उठा रही है।Toll Plaza Scam: