2025 में महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की 10 दमदार स्कीम, लाखों के फायदे!
भारत
चेतना मंच
13 Aug 2025 11:14 AM
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव की लहर दौड़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, कौशल और उद्यमिता से जुड़ी योजनाएं महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि उन्हें गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में अग्रसर भी कर रही हैं। वर्ष 2017 से अब तक महिलाओं के लिए एक के बाद एक प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं जो "सबका साथ, सबका विकास" की सोच को साकार करती हैं। Uttar Pradesh News
बेटियों का भविष्य सुरक्षित
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने बेटियों को पढ़ाई के हर पड़ाव पर सहारा दिया है। जन्म से लेकर स्नातक/डिप्लोमा तक की पढ़ाई के छह चरणों में ₹25,000 की वित्तीय सहायता दी जा रही है। अगस्त 2023 में यह राशि ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई, जिससे बेटियां उच्च शिक्षा तक पहुंच सकें। अब तक 24 लाख से अधिक बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। इसके अलावा "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान के तहत 71 जिलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिससे समाज में बेटियों के प्रति सोच में बदलाव आया है।
स्वास्थ्य और पोषण में क्रांतिकारी पहलें
शबरी संकल्प पोषण योजना के तहत कुपोषण से जूझ रहे 39 जिलों में महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य किट और नकद सहायता दी जा रही है। 4.5 लाख से अधिक लोगों को इसका लाभ मिला है। इससे कुपोषण दर में 18% तक गिरावट दर्ज की गई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं को ₹5,000 की सहायता दी जा रही है। अब तक 67 लाख से ज्यादा महिलाओं को ₹2,734 करोड़ की मदद दी जा चुकी है, जिससे मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। परिणामस्वरूप राज्य में मातृ मृत्यु दर 197 से घटकर 167 हो चुकी है।
रोजगार और कौशल से आत्मनिर्भरता की ओर
"लखपति दीदी" योजना के जरिए 1.37 लाख महिलाएं सालाना ₹1 लाख या उससे अधिक की कमाई कर रही हैं। महिलाओं को कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन जैसे आजीविका स्रोतों से जोड़ा गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत 10 लाख छात्राओं को आत्मरक्षा, 80,000 को स्काउट-गाइड और 10 लाख से ज्यादा को डिजिटल/वित्तीय साक्षरता से जोड़ा गया है। कौशल विकास मिशन के तहत आईटीआई और कौशल केंद्रों में 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को बढ़ावा
बीसी सखी योजना के तहत गांव-गांव में 50,000 से अधिक महिलाओं को बैंकिंग प्रतिनिधि बनाया गया है जिन्होंने अब तक ₹31,626 करोड़ के लेनदेन कराए हैं। इससे उन्हें ₹85 करोड़ से अधिक की आय हुई है। महिला सामर्थ्य योजना के तहत SHG समूहों को गृह उद्योग शुरू करने के लिए ₹25,000 अनुदान और ₹2 लाख तक के ऋण पर ब्याज छूट दी जा रही है। इससे 4,500 समूहों की 1.2 लाख महिलाओं की औसत आय 35% तक बढ़ी है।
सुरक्षा और सामाजिक सहारा
महिला सुरक्षा के लिए 181 हेल्पलाइन, 1090 पावरलाइन और पिंक बूथ जैसे उपाय लागू किए गए हैं। लखनऊ में 100 पिंक बूथ और नोएडा में 11 नए बूथ बनाए गए हैं, जहां महिलाएं तुरंत सहायता पा सकती हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत ₹1,00,000 की सहायता राशि देकर अब तक 4.76 लाख जरूरतमंद जोड़ों के विवाह कराए जा चुके हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिली है।
कानूनी और सामाजिक सशक्तिकरण की नई मिसाल
प्रदेश के सभी जिलों में वन-स्टॉप सखी केंद्र चल रहे हैं जो हिंसा से पीड़ित महिलाओं को आश्रय, चिकित्सा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं। रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के माध्यम से गंभीर हिंसा पीड़ित महिलाओं को तत्काल आर्थिक और पुनर्वास सहायता दी जाती है। महिला शक्ति केंद्रों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों, योजनाओं और विकल्पों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही स्वाधार गृह, उज्ज्वला केंद्र और सखी निवास छात्रावासों के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को पुनर्वास और सुरक्षित आवास की सुविधा दी जा रही है।
मिशन शक्ति अभियान ने महिला सुरक्षा, शिक्षा और जागरूकता को जन आंदोलन का रूप दिया है। इसके तहत कानूनी शिविर, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, सशक्तिकरण रैलियां, और सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। महिला पुलिसकर्मी परिवारों की काउंसलिंग कर रही हैं और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।उत्तर प्रदेश में महिला कल्याण को लेकर चल रहे इन बहुआयामी प्रयासों का असर साफ दिखाई दे रहा है। लाखों महिलाएं अब पढ़-लिखकर नौकरी कर रही हैं स्वरोजगार शुरू कर रही हैं और अपने अधिकारों को लेकर सजग हो चुकी हैं। राज्य सरकार की योजनाएं उन्हें आत्मनिर्भर और गरिमामयी जीवन जीने की दिशा में मजबूत बना रही हैं। Uttar Pradesh News