प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र के सकौती टांडा कस्बे में रविवार को जाट समाज का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महाराजा सूरजमल की भव्य प्रतिमा का अनावरण रहा।

UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र के सकौती टांडा कस्बे में रविवार को जाट समाज का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महाराजा सूरजमल की भव्य प्रतिमा का अनावरण रहा। इसी अवसर पर जाट पार्लियामेंट के नाम से एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई, जिसमें समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा के बाद 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, गणमान्य व्यक्ति और युवा शामिल हुए। प्रतिमा अनावरण के बाद आयोजित बैठक में समाज के वर्तमान और भविष्य से जुड़े विषयों जैसे शिक्षा, सामाजिक एकता, विवाह व्यवस्था और आरक्षण पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में सबसे अधिक चर्चा का विषय विवाह व्यवस्था रहा। एक प्रस्ताव में बिरादरी के बाहर विवाह न करने की बात कही गई, जबकि दूसरे प्रस्ताव में लड़के और लड़कियों की शादी 23 से 25 वर्ष की आयु के बीच करने की सलाह दी गई। इसका उद्देश्य युवाओं को पहले शिक्षा और करियर पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करना बताया गया।
जाट पार्लियामेंट में युवाओं को उच्च शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और कौशल विकास की ओर प्रेरित करने का निर्णय लिया गया।
इसके साथ ही स्वरोजगार और व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी युवाओं को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी। समाज के युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ने के लिए विशेष पहल की बात कही गई। महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि मनाने के साथ-साथ उनके योगदान को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी रखी गई। इसी क्रम में चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग भी प्रमुख रूप से सामने आई।
बैठक में समाज को नशे से मुक्त करने के लिए अभियान चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया। युवाओं में जागरूकता फैलाने और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में क्षेत्रवाद और गोत्रवाद से ऊपर उठकर जाट समाज की एकता को मजबूत करने का आह्वान किया गया। साथ ही 36 बिरादरियों के साथ आपसी भाईचारा बढ़ाने और अन्य समाजों के प्रति सम्मान बनाए रखने का संकल्प भी लिया गया।
बैठक में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में जाट समाज को ओबीसी आरक्षण दिलाने के लिए प्रयास तेज करने की बात कही गई। साथ ही उच्च पदों पर कार्यरत समाज के लोगों से जरूरतमंदों की मदद करने की अपील भी की गई। मेरठ में आयोजित इस जाट पार्लियामेंट के फैसले समाज के भीतर परंपराओं को बनाए रखते हुए आधुनिक चुनौतियों से निपटने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं। जहां एक ओर शिक्षा, रोजगार और नशामुक्ति पर जोर दिया गया, वहीं विवाह और सामाजिक संरचना को लेकर पारंपरिक सोच भी सामने आई। यह बैठक आने वाले समय में समाज की दिशा और सोच को प्रभावित कर सकती है।