मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी चेतन सिंह राठौड़ की धार्मिक पदयात्रा इन दिनों चर्चा में है। 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा के संकल्प के साथ निकले चेतन अब तक करीब 12 हजार किलोमीटर पैदल चल चुके हैं और नौ ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी कर चुके हैं।

UP News : आस्था, संकल्प और देश को करीब से जानने की चाहत इंसान को कितनी दूर तक ले जा सकती है, इसकी मिसाल मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी चेतन सिंह राठौड़ हैं। 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की पदयात्रा पर निकले चेतन अब तक करीब 12 हजार किलोमीटर पैदल सफर कर चुके हैं। इस दौरान वह 12 ज्योतिर्लिंगों में से नौ ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पैदल पूरी कर चुके हैं। सोमवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर पहुंचने पर चेतन सिंह राठौड़ ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत को करीब से देखने, अलग-अलग राज्यों की संस्कृति समझने और लोगों से मिलने का भी अवसर है।
चेतन सिंह राठौड़ की पदयात्रा गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों से होकर गुजर चुकी है। रास्ते बदलते रहे, मौसम बदलता रहा और मुश्किलें भी सामने आती रहीं, लेकिन उनका संकल्प बना रहा। करीब 12 हजार किलोमीटर पैदल चलने के बाद भी उनकी यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। वर्तमान में वह झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। चेतन के मुताबिक 12 ज्योतिर्लिंगों में से नौ ज्योतिर्लिंगों की यात्रा वह पैदल पूरी कर चुके हैं। धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के साथ-साथ इस यात्रा ने उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों को करीब से देखने का अवसर भी दिया। उनकी यात्रा का अंतिम पड़ाव तमिलनाडु का रामेश्वरम होगा। रामेश्वरम पहुंचने के बाद 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की उनकी पदयात्रा पूरी होने की उम्मीद है।
चेतन ने बताया कि यह उनकी पहली इतनी लंबी पदयात्रा है। हजारों किलोमीटर के सफर में कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आईं, जब रात गुजारने के लिए जगह तक नहीं मिली। लंबे सफर में थकान और दूसरी परेशानियां भी उनके सामने आती रहीं। लेकिन इस यात्रा में उन्हें लोगों का अपनापन भी देखने को मिला। कई जगह स्थानीय लोगों ने मदद की और रहने-खाने की व्यवस्था में सहयोग किया। उनके अनुसार यात्रा के दौरान अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोगों से मुलाकात होती है, लेकिन यही अनुभव इंसान को जिंदगी को नए नजरिए से देखने का मौका देते हैं। चेतन सिंह राठौड़ का मानना है कि हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार पैदल यात्रा जरूर करनी चाहिए। उनके अनुसार पैदल चलने से रास्ते और मंजिल के बीच छिपी जिंदगी को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने युवाओं से भारत के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करने की अपील की। उनका कहना है कि देश को केवल किताबों या तस्वीरों के जरिए नहीं, बल्कि उसके गांवों, शहरों, लोगों और संस्कृतियों के बीच जाकर भी समझा जा सकता है।
नौ ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी कर चुके चेतन अब बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बाद उनकी यात्रा दक्षिण भारत की ओर जाएगी और तमिलनाडु के रामेश्वरम में इसका अंतिम पड़ाव होगा। 12 हजार किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके चेतन के कदम अभी रुके नहीं हैं। उनके लिए यह यात्रा मंजिल तक पहुंचने से कहीं अधिक खुद को और भारत को करीब से जानने की कोशिश बन चुकी है। UP News :
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