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UP News: विहिप ने 1989 में श्रीराम मंदिर आंदोलन के लिए पहला बड़ा अभिययान शुरू किया। इसमें हर एक व्यक्ति से सवा रुपए का चंदा देने की अपील की गई और घर-घर से पूजित शिलाएं भी मांगीं गईं।

UP News: राम मंदिर में चढ़ावे के चोरी के दावों के बीच एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। 1989 में देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने यह आरोप लगाए है। दुबे के मुताबिक 'श्रीराम मंदिर के लिए 1985 में ‘श्रीराम जन्मभूमि न्यास' बना। परमहंस रामचंद्र दास इसके अध्यक्ष थे। न्यास में विहिप के अशोक सिंघल, गिरिराज, रामविलास वेदांती, चंपत राय समेत कई लोग थे।
1989 के आंदोलन में मांगी गई थी शिलाएं
विहिप ने 1989 में श्रीराम मंदिर आंदोलन के लिए पहला बड़ा अभिययान शुरू किया। इसमें हर एक व्यक्ति से सवा रुपए का चंदा देने की अपील की गई और घर-घर से पूजित शिलाएं भी मांगीं गईं। विहिप ने कहा था कि श्रीराम मंदिर के निर्माण में इन शिलाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। इस अभियान ने पूरे देश में श्रीराम मंदिर के आंदोलन को तेज कर दिया। लोगों ने खुलकर दान दिया।
2002 के बाद शिलाएं गयाब
दुबे ने बताया कि वो अयोध्यावासी हैं और उनका काम ऐसी शिलाओं का लेखा-जोखा तैयार करने का था। उन्होंने बताया कि सोने-चांदी और अष्टधातु की इन शिलाओं की कुल संख्या 1250 थी। शिलाएं कारसेवकपुरम में सुरक्षा के लिए जहां रखी गईं, वहां 3 ताले लगाए गए थे। 2002 तक ये शिलाएं थीं। इसके बाद से पता नहीं चला।
दुबे का आरोप है कि इसके पीछे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका रही है। रिपोर्ट के मुताबिक दुब ने चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों के और भी आरोप लगाए।
राम मंदिर चढ़ावे का विवाद : -
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