
1857 Kranti : Kotwal Dhan Singh Gurjar : 1857 में देश की आजादी के लिए पहली बार सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका गया था। आज ही के दिन (10 मई) को मेरठ में क्रांति की चिंगारी सुलगी थी। 1857 की क्रांति के महानायकों में एक बड़ा नाम था कोतवाल धनसिंह गुर्जर। जिन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। धनसिंह गुर्जर ने ऐसे कारनामें किए थे, जिसके चलते अंग्रेजों के बीच उनका खौफ था।
जब भी 1857 की क्रांति की बात होती है तो धन सिंह गुर्जर को हमेशा याद किया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने ही ऐतिहासिक विद्रोह को जन्म देने वाली घटनाओं को जन्म दिया था और उनकी ओर से उठाए गए एक कदम ने क्रांति की आग में चिंगारी का काम किया। धनसिंह गुर्जर का जन्म मेरठ के पांचाली गांव में हुआ था। दरअसल, 9 मई 1857 को कारतूस में जानवरों की चर्बी लगी होने के मामले में कई सिपाहियों को जेल भेज दिया गया था। इस घटना की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई और 10 मई को जिलेभर के ग्रामीण मेरठ पुलिस स्टेशन में सिपाहियों की रिहाई की मांग करने के लिए एकत्र हुए।
उस वक्त धन सिंह कोतवाली (थाना) के मुखिया थे। शहर की रक्षा करना क्षेत्र के कोतवाल के रूप में उनका कर्तव्य था। लेकिन, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से हाथ मिलाते हुए 800 से अधिक कैदियों को मुक्त करवाया गया। इसे दिल्ली की घेराबंदी के रूप में जाना जाता है। इसे आजादी की पहली जंग का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। उस दौरान धन सिंह गुर्जर ने 10 मई 1857 के दिन इतिहास प्रसिद्ध ब्रिटिश विरोधी जनक्रांति के विस्फोट में अहम भूमिका निभाई थी। एक पूर्व योजना के तहत विद्रोही सैनिकों और धन सिंह कोतवाल सहित पुलिस फोर्स ने अंग्रेजों के विरुद्ध साझा मोर्चा गठित कर क्रांतिकारी घटनाओं को अंजाम दिया था।
शाम 5 से 6 बजे के बीच, सदर बाजार की सशस्त्र भीड़ और सैनिकों ने सभी स्थानों पर एक साथ विद्रोह कर दिया। धनसिंह गुर्जर कोतवाल द्वारा निर्देशित पुलिस के नेतृत्व में क्रांतिकारी भीड़ ने ‘मारो फिरंगी’ का घोष कर सदर बाजार और कैंट क्षेत्र में अंग्रेजों का कत्लेआम कर दिया। धनसिंह कोतवाल के आह्वान पर उनके अपने गांव पांचली सहित घाट, नंगला, लिसाड़ी, डीलना आदि गांवों के हजारों लोग सदर कोतवाली क्षेत्र में जमा हो गए। प्रचलित मान्यता के अनुसार इन लोगों ने धन सिंह कोतवाल के नेतृत्व में रात दो बजे नई जेल तोड़कर 839 कैदियों को छुड़ा लिया और जेल में आग लगा दी।
4 जुलाई 1857 को बदले की भावना से ग्रस्त अंग्रेजी खाकी रिसाले ने धन सिंह कोतवाल के गांव पांचली को तोपों से उड़ा दिया। करीब 400 लोग मारे गए, 40 को फांसी दे दी गई। 1857 Kranti