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आध्यात्मिक नगरी काशी अब आधुनिक शहरी विकास के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। लगभग 30 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद वाराणसी में पहली बार पूरी तरह से गेटेड, हाईटेक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस टाउनशिप विकसित की जा रही है।

UP News : आध्यात्मिक नगरी काशी अब आधुनिक शहरी विकास के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। लगभग 30 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद वाराणसी में पहली बार पूरी तरह से गेटेड, हाईटेक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस टाउनशिप विकसित की जा रही है। वाराणसी विकास प्राधिकरण ने कल्लीपुर क्षेत्र में प्रस्तावित आनंद काशी टाउनशिप की पहली झलक जारी कर दी है, जिसके बाद शहर के रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई चर्चा शुरू हो गई है। यह परियोजना केवल एक आवासीय योजना नहीं होगी, बल्कि आधुनिकता और काशी की सांस्कृतिक विरासत का संगम भी बनेगी। टाउनशिप के डिजाइन में बनारस की पारंपरिक स्थापत्य कला, स्थानीय निर्माण सामग्री और प्राचीन शिल्पकला की झलक दिखाई देगी, जबकि सुविधाएं किसी आधुनिक स्मार्ट सिटी से कम नहीं होंगी।
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वीडीए के अधिकारियों के अनुसार, शहर में लंबे समय बाद ऐसी समेकित गेटेड टाउनशिप विकसित की जा रही है, जहां सुरक्षा, सुविधाएं और बेहतर जीवनशैली को प्राथमिकता दी जाएगी। परियोजना में 80 से 100 फीट चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित यातायात व्यवस्था और उच्च स्तरीय आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। पूरी योजना को स्मार्ट और फ्लेक्सिबल अर्बन सिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुसार इसमें विस्तार और तकनीकी बदलाव संभव हो सकें।
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आनंद काशी टाउनशिप को पर्यावरण-अनुकूल और तकनीक आधारित बनाया जाएगा। यहां सौर ऊर्जा आधारित रूफटॉप सिस्टम, एलईडी स्ट्रीट लाइटिंग, स्मार्ट मीटरिंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, दोहरी पाइपलाइन व्यवस्था, स्मार्ट बिन, इंटीग्रेटेड कंट्रोल डैशबोर्ड और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंसर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन और डिजिटल निगरानी प्रणाली के जरिए निवासियों को बेहतर और सुरक्षित जीवनशैली प्रदान करने की योजना है।
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वीडीए की योजना के मुताबिक यह टाउनशिप लगभग 250 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसके लिए भूमि क्रय और लैंड पूलिंग दोनों मॉडल अपनाए गए हैं। पहले चरण में करीब 150 एकड़ भूमि पर विकास कार्य शुरू करने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार अब तक 135 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण रजिस्ट्री के माध्यम से किया जा चुका है, जबकि लगभग 15 एकड़ भूमि लैंड पूलिंग मॉडल से प्राप्त हुई है। किसानों को मुआवजे के रूप में 550 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
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