उधर पकौड़ी लेने गया पति, इधर प्रेमी संग रफूचक्कर हुई दुल्हन

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से रिश्तों को झकझोर देने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नई नवेली दुल्हन ने अपने पति से बस स्टैंड पर पकौड़ी लाने की बात कही और इसी बीच वह कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ वहां से चली गई।

बस स्टैंड से दुल्हन गायब
बस स्टैंड से दुल्हन गायब
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 12:16 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से रिश्तों को झकझोर देने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नई नवेली दुल्हन ने अपने पति से बस स्टैंड पर पकौड़ी लाने की बात कही और इसी बीच वह कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ वहां से चली गई। जब पति नाश्ता लेकर वापस लौटा तो पत्नी गायब मिली। काफी तलाश और पूछताछ के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा। अब पीड़ित पति की शिकायत पर यूपी पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

होली के बाद मायके से लौट रहे थे दोनों

जानकारी के मुताबिक, अमरोहा निवासी प्रीतम सिंह की शादी करीब तीन महीने पहले रिमझिम नाम की युवती से हुई थी। शादी के बाद दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। बताया जा रहा है कि होली के बाद प्रीतम अपनी पत्नी को उसके मायके से विदा कराकर वापस घर ला रहा था। इसी दौरान दोनों बस से सफर करते हुए उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे। बताया जा रहा है कि बस स्टैंड पर रुकने के दौरान महिला ने अपने पति से पकौड़ी लाने की इच्छा जताई। पत्नी की बात सुनकर पति तुरंत बस से नीचे उतर गया और पकौड़ी लेने चला गया। लेकिन जब वह कुछ देर बाद वापस लौटा, तो उसकी पत्नी वहां मौजूद नहीं थी। पहले उसे लगा कि शायद वह आसपास ही होगी, लेकिन समय बीतने के साथ उसकी चिंता बढ़ती चली गई। पति ने बस स्टैंड और आसपास के इलाके में काफी देर तक पत्नी की तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इतना ही नहीं, जब उसने पत्नी के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो फोन भी बंद मिला। इस घटना के बाद बस स्टैंड पर भी हलचल मच गई और पति ने आसपास मौजूद लोगों से जानकारी जुटानी शुरू की।

फोन पर बात करते हुए बस से उतरने की बात आई सामने

मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि महिला बस से उतरने से पहले किसी से फोन पर बात कर रही थी। यह जानकारी मिलने के बाद पति को शक हुआ कि उसकी पत्नी पहले से तय योजना के तहत किसी के साथ गई है। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पति ने थाने पहुंचकर अपनी पत्नी के कथित प्रेम संबंधों का जिक्र किया। पीड़ित प्रीतम सिंह ने यूपी पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी का पहले से गांव सागरपुर निवासी इमरान नाम के युवक से प्रेम संबंध था। पति का कहना है कि वही युवक उसकी पत्नी को अपने साथ ले गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस

मुरादाबाद पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बस स्टैंड और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा महिला के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी जांची जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किसके संपर्क में थी और फिलहाल कहां हो सकती है। यूपी पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा करने की कोशिश की जाएगी। UP News

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‘संकट में अंडरग्राउंड हो जाते हैं...’ LPG पर अखिलेश ने भाजपा को घेरा

अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि अगर भाजपा का दावा है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उत्तर प्रदेश समेत देशभर में लोगों की दिक्कतें दूर करने के लिए उसके मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मैदान में क्यों नहीं उतर रहे।

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 12:00 PM
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UP News : देश में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर बढ़ती बेचैनी के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जब आम परिवार रसोई गैस के लिए परेशान होकर एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, तब सत्ता पक्ष के नेता जनता के बीच कहीं दिखाई नहीं दे रहे। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि अगर भाजपा का दावा है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उत्तर प्रदेश समेत देशभर में लोगों की दिक्कतें दूर करने के लिए उसके मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मैदान में क्यों नहीं उतर रहे। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा संकट के समय जैसे अचानक खामोश और गायब हो जाती है। उन्होंने भाजपा नेताओं से अपील की कि वे दफ्तरों और बयानबाजी से बाहर निकलें, गैस एजेंसियों तक पहुंचें और जरूरतमंद परिवारों को समय पर सिलेंडर दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उत्तर प्रदेश में रसोई से जुड़ा मुद्दा बना सियासी सवाल

सपा अध्यक्ष ने कहा कि एलपीजी का मुद्दा सिर्फ सप्लाई या वितरण का प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे घर-घर की रसोई से जुड़ा सवाल है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहां करोड़ों परिवार घरेलू गैस पर निर्भर हैं, वहां सिलेंडर की किल्लत या वितरण में रुकावट आम आदमी के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जब रसोई का चूल्हा प्रभावित होता है, तो उसका असर सबसे पहले गरीब, निम्न मध्यम वर्ग, मजदूर और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जनता परेशान हो, तब सत्ता पक्ष को सबसे पहले मदद के लिए आगे आना चाहिए। लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा नहीं दिख रहा। अखिलेश यादव ने पूछा कि अगर लोगों को गैस नहीं मिल रही, तो वे अपनी समस्या लेकर कहां जाएं। क्या जनता जनप्रतिनिधियों के घर पहुंचे, उनके कार्यालयों के बाहर खड़ी हो या रास्ते में रोककर जवाब मांगे? अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की कार्यशैली यह बन चुकी है कि किसी भी किल्लत या जनसमस्या को पहले नकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब हालात बिगड़ने लगते हैं, तब भी सत्ता पक्ष सीधे जवाब देने से बचता है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि आम जनता की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जनता पहले से महंगाई, बेरोजगारी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े दबाव का सामना कर रही है। ऐसे समय में अगर गैस जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ती है, तो यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कोरोना काल का हवाला देकर साधा निशाना

सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कोरोना काल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर सरकार को घेरने वाले सवाल उठे थे। अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब वही चिंता घरेलू गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को लेकर भी सामने आती दिख रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि जब-जब संकट गहराता है, सबसे ज्यादा मार आम जनता पर पड़ती है। दूसरी ओर, सरकार और सत्ताधारी दल के लोग जवाबदेही से दूरी बनाते नजर आते हैं। उनके अनुसार, यही वजह है कि जनता के भीतर असंतोष बढ़ता है।

आपदा में कालाबाजारी का आरोप

अखिलेश यादव ने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि संकट की घड़ी में व्यवस्था सुधारने के बजाय हालात ऐसे छोड़ दिए जाते हैं, जहां कालाबाजारी को जगह मिल जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी कमी या किल्लत का सबसे ज्यादा फायदा वे लोग उठाते हैं, जो जरूरत की चीजों को मुनाफे का जरिया बना देते हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह निगरानी मजबूत करे और जनता को राहत दे।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में आम परिवार पहले ही बढ़ते खर्च से जूझ रहे हैं। ऐसे में रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत पर भी दबाव बढ़ना बेहद गंभीर बात है। सपा प्रमुख ने मांग की कि सरकार सिर्फ बयान जारी करने के बजाय जमीनी व्यवस्था दुरुस्त करे।

सेवा का दावा है तो जनता के बीच जाए भाजपा

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा और उसके समर्थक अक्सर सेवा और जनहित की बात करते हैं, लेकिन असली परीक्षा संकट के समय होती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार हालात संभालने में कठिनाई महसूस कर रही है, तो भाजपा के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता खुद राहत व्यवस्था में उतरें। गैस एजेंसियों से समन्वय करें, जरूरतमंदों की सूची बनाएं और परेशान परिवारों तक मदद पहुंचाएं। उन्होंने तंज करते हुए यह भी कहा कि अगर सत्ता पक्ष जनता को राहत नहीं दे पा रहा, तो कम से कम भूख और परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए मुफ्त भोजनालय जैसी व्यवस्था शुरू करे। उनके मुताबिक, सरकार का काम सिर्फ दावे करना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़ा होना है। UP News

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राहुल गांधी का लखनऊ दौरा आज, दलित समाज के बीच संदेश देने की तैयारी

शुक्रवार को राहुल गांधी राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में दलित चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सामाजिक समीकरणों की हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। बहुजन आंदोलन के बड़े प्रतीक कांशीराम की जयंती से ठीक पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लखनऊ दौरा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक मौजूदगी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और वंचित तबकों के बीच कांग्रेस की नई पकड़ बनाने की कोशिश का हिस्सा है। शुक्रवार को राहुल गांधी राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में दलित चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया है। कांग्रेस ने इस आयोजन को ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ का नाम दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इसे उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक एजेंडे के विस्तार के तौर पर पेश करना चाहती है।

उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय की जमीन पर नया संदेश देने की कोशिश

कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, महिलाओं तथा युवाओं के अधिकारों जैसे मुद्दों को केंद्र में रख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह पहल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कमजोर पड़े सामाजिक आधार को दोबारा खड़ा करने की कवायद के रूप में देखी जा रही है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति लंबे समय से जातीय और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मिशन-2027 के लिए कांग्रेस की शुरुआती सामाजिक तैयारी के तौर पर भी पढ़ा जा रहा है।

कांशीराम जयंती से पहले कार्यक्रम का समय भी बना सियासी संकेत

15 मार्च को कांशीराम जयंती है। उससे ठीक पहले लखनऊ में इस तरह का आयोजन होना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। कांशीराम उत्तर प्रदेश सहित देशभर की बहुजन राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनकी जयंती से पहले राहुल गांधी का दलित बुद्धिजीवियों और सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच पहुंचना कांग्रेस की सोच-समझकर बनाई गई रणनीति की ओर इशारा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि 11 मार्च को प्रस्तावित रायबरेली दौरा टलने के बावजूद लखनऊ कार्यक्रम को प्राथमिकता दी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस फिलहाल उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक और राजनीतिक हस्तक्षेप को नए सिरे से धार देने में जुटी है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने आसान नहीं है राह

हालांकि कांग्रेस की यह कोशिश जितनी महत्वपूर्ण दिख रही है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी अब भी एक मजबूत प्रतीकात्मक और भावनात्मक आधार रखती है, खासतौर पर जाटव समाज में उसकी पकड़ बनी हुई है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी पिछले एक दशक में दलित समुदायों के बीच अपने संगठन और सरकारी योजनाओं के जरिए प्रभाव बढ़ाया है। यही नहीं, समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में पिछड़े और सामाजिक न्याय की राजनीति के सवाल पर लगातार सक्रिय रहती है। ऐसे में कांग्रेस के लिए दलित और पिछड़े वोट बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बनाना सीधा मुकाबला नहीं, बल्कि लंबी राजनीतिक मेहनत का मामला होगा।

मिशन-2027 के लिए उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक तैयारी भी तेज

राहुल गांधी के लखनऊ दौरे के समानांतर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने की दिशा में भी सक्रिय नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव की तैयारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में 375 ‘न्याय योद्धा’ नियुक्त करने की योजना पर काम चल रहा है। इनकी भूमिका केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक-न्याय आधारित हस्तक्षेप की भी होगी। बताया जा रहा है कि ये न्याय योद्धा अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं पर नजर रखेंगे और उन लोगों की मदद करेंगे जो कानूनी लड़ाई लड़ने में सक्षम नहीं हैं। जरूरतमंदों को हर स्तर पर सहयोग देने की जिम्मेदारी इन योद्धाओं को सौंपी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी कांग्रेस के विधि विभाग को दी गई है। UP News

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