इच्छा मृत्यु पाकर बड़ा इतिहास बना जाएंगे हरीश राणा

उत्तर प्रदेश के लाड़ले बेटे हरीश राणा की इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया चल रही है। पिछले 13 साल से अचेत अवस्था में पड़े हुए हरीश राणा को दिल्ली में एक्स के डॉक्टर इच्छा मृत्यु देने की प्रक्रिया पूरी करने के काम में जुटे हुए हैं।

उत्तर प्रदेश के लाड़ले बेटे हरीश राणा
उत्तर प्रदेश के लाड़ले बेटे हरीश राणा
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar16 Mar 2026 02:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के लाड़ले बेटे हरीश राणा की इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया चल रही है। पिछले 13 साल से अचेत अवस्था में पड़े हुए हरीश राणा को दिल्ली में एक्स के डॉक्टर इच्छा मृत्यु देने की प्रक्रिया पूरी करने के काम में जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में रहने वाले हरीश राणा मरने के बाद हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो जाएंगे। उत्तर प्रदेश गाजियाबाद शहर की एक सोसायटी में 13 साल से बिस्तर पर पड़े हुए हरीश राणा भारत के वह पहले व्यक्ति हैं जिन्हें भारत की अदालत ने इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान कर दी है।

धीरे-धीरे जीवन रक्षक उपकरण हटाए जा रहे हैं

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले हरीश राणा दिल्ली के एम्स अस्पताल में हैं। भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एम्स के डाक्टरों की एक पूरी टीम हरीश राणा के शरीर में लगे हुए जीवनरक्षण उपकरण हटाए जा रहे हैं। एम्स के निदेशक की तरफ से इस बात की अधिकारिक घोषणा की जाएगी कि हरीश राणा को इच्छा मृत्यु प्राप्त हो गई है। पूरा देश एम्स के निदेशक की घोषणा का उदासी के साथ इंतजार कर रहा है। इच्छा मृत्यु अधिकारिक घोषणा के साथ ही हरीश राणा एक बड़ा इतिहास बनाकर किसी दूसरी दुनिया में चले जाएंगे।

हरीश राणा का परिवार नहीं भूल पाएगा उस घटना को

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले हरीश राणा के परिवार के ऊपर 13 साल पहले बड़ा कहर टूट पड़ा था। 13 साल पहले पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने की वजह से हरीश को गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद वो कोमा में चले गए। तब से वह कोमा में ही है। इतने वर्षों तक माता-पिता ने उनकी देखभाल कर रहे थे, लेकिन बूढ़े हो रहे माता-पिता अपने बच्चे का दर्द महसूस कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पहले हरीश के गले में ट्रेकियोस्टोमी कर एक ट्यूब डाली गई थी। इसके अलावा उनके पेट में भी एक न्यूट्रीशन ट्यूब डाली गई थी, जिसके जरिए न्यूट्रीशन मिलता है। यानी बाहर से लिक्विड फूड दिया जा रहा है। बता दें कि 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय दया मृत्यु की अनुमति दी थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें लगे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को फेज वाइज हटाने की अनुमति दी गई। शुक्रवार को एम्स ने आंकोएनेस्थीसिया और पैलिएटिव केयर के विशेषज्ञ के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक कमिटी गठित की। इसके बाद शनिवार को हरीश को एंबुलेंस के जरिए एम्स शिफ्ट किया गया, जहां उन्हें एम्स के कैंसर सेंटर के पैलिएटिव केयर वॉर्ड में भर्ती कराया गया। एम्स द्वारा गठित कमेटी के नेतृत्व में उसका पैलिएटिव केयर किया जा रहा है, ताकि दर्द रहित तरीके से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पूरी हो सके।

हरीश राणा की अंतिम यात्रा का वीडियो वायरल

सुप्रीम कोर्ट के निष्क्रिय दया मृत्यु (Passive Euthanasia) के आदेश के बाद हरीश राणा को शनिवार 14 सितंबर 2026 को एम्स में शिफ्ट किया गया। इस बीच अस्पताल ले जाने से पहले का एक भावुक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह विडियो हरीश राणा के घर का है, जब उन्हें एम्स ले जाने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि उनके पिता अशोक राणा की पहले की गई घोषणा के मुताबिक, हरीश की विदाई की प्रक्रिया गोपनीय होगी, लेकिन विडियो में ब्रह्माकुमारी संस्था की एक गुरु मां हरीश को तिलक लगाकर आध्यात्मिक ढंग से विदाई देती नजर आ रही है। विडियो में वह हरीश से कह रही है कि सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाओ। इस दृश्य ने भावुक कर दिया है और ब्रहाकुमारी आश्रम की एक बहन ने बताया कि कुछ बहने शनिवार को हरीश राष्णा के घर गई थी। वहां उन्होंने हरीश को तिलक लगाकर परमात्मा की तरफ से आशीर्वाद देकर विदा किया। वहीं, स्थानीय लोगों और परिचितों ने हरीश के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते समय में हिम्मत देने की अपील की है। UP News

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बहुत खास है उत्तर प्रदेश का इतिहास

भारत में कुल 28 प्रदेश तथा आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी प्रदेशों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा प्रदेश है। भारत के प्रदेशों की आबादी की बात करें तो सबसे ज्यादा आबादी उत्तर प्रदेश में रहती है। उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ के आसपास है।

उत्तर प्रदेश का गौरवशाली इतिहास
उत्तर प्रदेश का गौरवशाली इतिहास
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar16 Mar 2026 02:16 PM
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UP News : भारत में कुल 28 प्रदेश तथा आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी प्रदेशों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा प्रदेश है। भारत के प्रदेशों की आबादी की बात करें तो सबसे ज्यादा आबादी उत्तर प्रदेश में रहती है। उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ के आसपास है। हाल ही में चल रही जनगणना में आबादी का सही आंकड़ा प्रकाश में आएगा। वर्ष-2011 में हुई जनगणना में उत्तर प्रदेश की आबादी 19 करोड़ 98 लाख 12 हजार 341 थी। उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत ही खास तथा शानदारहै।

भारत की आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को हुआ था उत्तर प्रदेश का गठन

उत्तर प्रदेश के पूरे भूभाग के प्राचीन इतिहास की बात करें तो उत्तर प्रदेश का इतिहास 4000 वर्ष पुराना है। वर्तमान उत्तर प्रदेश का आधुनिक इतिहास 26 जनवरी 1950 से शुरू हुआ है। भारत की आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश का विधिवत गठन किया गया था। इससे पहले अंग्रेजों की सरकार ने 1 अप्रैल 1937 को उत्तर प्रदेश वाले पूरे भू-भाग को यूनाइटेड प्रोविंस (united provinces) के नाम से प्रदेश बनाया था। वर्तमान इतिहासकार उत्तर प्रदेश के इतिहास को 26 जनवरी 1950 से शुरू होने वाले इतिहास के रूप में मानते हैं। आज जहां तक उत्तर प्रदेश का भू-भाग फैला हुआ है उस भू-भाग का पुराना इतिहास आर्यकाल, नंद राजवंश, मौर्य राजवंश तथा बौद्ध धर्म से भी जुड़ा हुआ है।

उत्तर प्रदेश को गांवों का प्रदेश कहा जाता है

उत्तर प्रदेश में गांवों की संख्या अधिक होने के कारण उत्तर प्रदेश को गांवों का प्रदेश भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में 1 लाख 63 हजार 747 गांव है। उत्तर प्रदेश में 915 शहर तथा कस्बे मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 18 मंडल (कमिश्नरी) तथा 75 जिले हैं। उत्तर प्रदेश के 18 मंडल तथा 75 जिले 822 विकास खंडों (ब्लॉक) में बंटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोकसभा की सीट होने के कारण उत्तर प्रदेश का भारत की राजनीति में विशेष महत्व है। भारत के उच्च सदन राज्यसभा के लिए उत्तर प्रदेश की 31 सीटें निर्धारित हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 404 तथा विधान परिषद की 101 सीट हैं । उत्तर प्रदेश का राजकीय पशु बाराहसिंगा है। उत्तर प्रदेश का राज्यकीय पक्षी सारस है। उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह एक वृत्त के अंदर बने हुए धनुष-बाण, बहती गंगा-यमुना तथा दो मछलियां हैं। उत्तर प्रदेश  का यह राजकीय चिन्ह सभी सरकारी दस्तावेजों पर अंकित रहता है।

उत्तर प्रदेश का बड़ा भूगोल है

बात यदि उत्तर प्रदेश के भूगोल की करें तो उत्तर प्रदेश 23°52'N और 31°28'N अक्षांशों और 77°3′और 84°39'E देशांतरों के बीच स्थित है। उत्तर प्रदेश की सीमा 9 राज्यों हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा ,उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की सीमा से लगी हुई है। उप्र की सीमा नेपाल देश के साथ भी लगी हुई है। उत्तर प्रदेश में अनेक नदियाँ हैं, जिनमें गंगा, यमुना, बेतवा, केन, चम्बल, घाघरा, गोमती, सोन नदियां प्रमुख्य हैं। प्रदेश में औसतन 1279 mm बारिश होती है।

जल की व्यापक मौजूदगी है उत्तर प्रदेश में 

उत्तर प्रदेश में बिजली उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और सिंचाई के लिए कई परियोजनाएं चलाई गई हैं। इनमें प्रमुख गोविंद बल्लभ पंत सागर बांध, परीछा बांध है। इसके अलावा मातलिता बांध, भैंसोरा बांध, भगवानपुर बांध, बाघला बांध, चित्तौड़गढ़ बांध, गणेशपुर बांध, आदि हैं। भारत में सबसे बड़ा मानव निर्मित जलाशय गोविंद बल्लभ पंत सागर बांध उत्तर प्रदेश में ही स्थापित है। उत्तर प्रदेश में हिंदू और मुस्लिम धर्म को मानने वालों की जनसंख्या ज्यादा है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य का लिंगानुपात 912 है। महिला साक्षरता दर 59.26 प्रतिशत और पुरुष साक्षरता दर 79.24 प्रतिशत है। प्रदेश की कुल साक्षरता दर 69.72 प्रतिशत है। पिपरावा, कौशाम्बी, श्रावस्ती, सारनाथ (वाराणसी), कुशीनगर, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, झांसी, मेरठ आदि ऐतिहासिक महत्व के स्थान हैं।  UP News



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उत्तर प्रदेश में बना था भारत का पहला सैनिक स्कूल, यहीं से शुरू हुआ सैनिक स्कूलों का सफर

भारत में सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए सैनिक स्कूल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन स्कूलों का उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति की भावना के साथ तैयार करना है, ताकि वे आगे चलकर भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बन सकें।

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भारत का पहला सैनिक स्कूल
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar16 Mar 2026 02:21 PM
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UP News : भारत में सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए सैनिक स्कूल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन स्कूलों का उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति की भावना के साथ तैयार करना है, ताकि वे आगे चलकर भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बन सकें। हालांकि बहुत से लोग यह मानते हैं कि भारत का पहला सैनिक स्कूल महाराष्ट्र में स्थापित हुआ था, लेकिन इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी एक सैनिक स्कूल की स्थापना हो चुकी थी। आइए विस्तार से जानते हैं भारत में सैनिक स्कूलों की शुरुआत और उनके इतिहास के बारे में।

सैनिक स्कूलों की शुरुआत का उद्देश्य

भारत सरकार ने सैनिक स्कूलों की स्थापना का उद्देश्य उन प्रतिभाशाली छात्रों को सेना में जाने के लिए तैयार करना था, जो ग्रामीण या साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन देश की सेवा का बड़ा सपना रखते हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ सैन्य अनुशासन, खेलकूद, शारीरिक प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। इससे छात्र आगे चलकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और अन्य रक्षा संस्थानों की परीक्षाओं के लिए तैयार हो जाते हैं।

उत्तर प्रदेश में खुला था पहला सैनिक स्कूल

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में सैनिक स्कूल की शुरुआत सबसे पहले लखनऊ में हुई थी। यहां 1960 में उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल की स्थापना की गई थी। यह स्कूल उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल सोसाइटी के अंतर्गत संचालित होता है। इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य राज्य के छात्रों को सेना में अधिकारी बनने के लिए प्रारंभिक स्तर से ही प्रशिक्षित करना था। इस स्कूल में छात्रों को कक्षा 6 या 9 से प्रवेश दिया जाता है और यहां शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, खेल और नेतृत्व कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

आधिकारिक तौर पर पहला सैनिक स्कूल कहां बना

हालांकि सैनिक स्कूल मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की शुरुआत बाद में हुई। आधिकारिक रूप से देश का पहला सैनिक स्कूल 23 जून 1961 को सातारा में स्थापित किया गया था। यह स्कूल सैनिक स्कूल सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाता है, जो भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। सातारा में स्थापित इस सैनिक स्कूल से ही पूरे देश में सैनिक स्कूलों के नेटवर्क का विस्तार शुरू हुआ।

देशभर में बढ़ता गया सैनिक स्कूलों का नेटवर्क 

सातारा में सैनिक स्कूल की सफलता के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में इसी मॉडल पर नए सैनिक स्कूल खोले जाने लगे। आज भारत में 33 से अधिक सैनिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने नई शिक्षा नीति और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत भी कई नए सैनिक स्कूल खोलने की पहल की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इसका लाभ मिल सके।

एनडीए और सीडीएस की तैयारी का मजबूत आधार

सैनिक स्कूलों की खास बात यह है कि यहां छात्रों को सेना में अधिकारी बनने के लिए शुरुआती स्तर से ही तैयार किया जाता है। इन स्कूलों में छात्रों को एनसीसी प्रशिक्षण, खेल और शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और नेतृत्व कौशल, एसएसबी इंटरव्यू की तैयारी जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यही कारण है कि हर साल सैनिक स्कूलों से पढ़े हुए कई छात्र एनडीए और सीडीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफल होकर भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में अधिकारी बनते हैं।


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