फेडरल बैंक की राजनगर शाखा में 1.46 करोड़ रुपये के गोल्ड लोन फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद बैंक की वैशाली शाखा में इसी तरह के फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आई है

फेडरल बैंक की राजनगर शाखा में 1.46 करोड़ रुपये के गोल्ड लोन फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद बैंक की वैशाली शाखा में इसी तरह के फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आई है। वैशाली शाखा में 10 गोल्ड लोन खातों में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर करीब 45 लाख रुपये का लोन जारी किया गया। बैंक स्तर पर मामले की जांच के बाद पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज करने की मांग की गई है। फेडरल बैंक की वैशाली शाखा में हुए फर्जीवाड़े में तीन खाताधारक ऐसे हैं, जो आरडीसी शाखा में भी लोन फर्जीवाड़े में आरोपित हैं।
आरडीसी में जब बैंक की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया था तब बैंक के वैल्यूअर और लोन के लिए केस लाने वाली फिनटेक कंपनी रूपीन के पूर्व अधिकारियों द्वारा वैशाली ब्रांच में भी कुछ गोल्ड लोन केस प्रोसेस किए जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद बैंक ने अंदरूनी जांच कराई तब पता चला कि 10 लोन खातों में सोने के नकली गहने रखे गए हैं। राजनगर शाखा में सामने आए मामले में 20 खातों में नकली आभूषण गिरवी रखकर करीब 1.46 करोड़ रुपये का लोन दिए जाने की शिकायत पर 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।इस संबंध में फेडरल बैंक की वैशाली शाखा के प्रबंधक गगन शर्मा का कहना है कि उन्होंने कौशांबी थाने में शिकायत दी थी, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ है।
फेडरल बैंक की आरडीसी शाखा में हुए 1.46 करोड़ रुपये के गोल्ड लोन फर्जीवाड़े में पुलिस ने बैंक की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक ने अपनी शिकायत में फिनटेक कंपनी रूपीन के दो अधिकारियों, वैल्यूअर एवं ग्राहकों पर आरोप लगाया है।
पूरे मामले में बैंक ने अपने कर्मचारियों को नामजद नहीं कराया है। जबकि रूपीन कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि बिना बैंककर्मियों की मिलीभगत के कई माह लोन फर्जीवाड़ा कैसे संभव होता।
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