गैस किल्लत का खौफ : सिलेंडरों से भरा ट्रक चोरी, हाईवे पर मिला खाली वाहन

झांसी से एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ट्रक में करीब 524 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर लदे थे, जिनकी कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है।

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एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चोरी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 06:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के झांसी से एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ट्रक में करीब 524 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर लदे थे, जिनकी कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है। कुछ दिनों बाद यह ट्रक हाईवे किनारे खाली हालत में मिला, जबकि सभी सिलेंडर गायब थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

करारी प्लांट से लोड हुआ था सिलेंडरों से भरा ट्रक

जानकारी के मुताबिक यह ट्रक भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन के करारी स्थित प्लांट से जुड़ा था। 2 मार्च को ट्रक में 524 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर लोड किए गए थे, जिन्हें कानपुर देहात के गजनेर इलाके में पहुंचाया जाना था। ट्रक चालक ने सिलेंडर लोड होने के बाद वाहन को प्लांट के बाहर खड़ा कर दिया और होली के त्योहार के कारण घर चला गया। इसी दौरान अज्ञात बदमाश ट्रक लेकर फरार हो गए। 

पारीछा के पास हाईवे किनारे मिला खाली ट्रक

कुछ दिनों बाद जीपीएस लोकेशन के आधार पर ट्रक की जानकारी मिली। जब ट्रक मालिक मौके पर पहुंचे तो पाया कि ट्रक परीछा थर्मल पावर प्लांट के पास हाईवे किनारे खड़ा था, लेकिन उसमें रखे सभी गैस सिलेंडर गायब थे। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने ट्रक में लगा डिवाइस भी तोड़ दिया, जिससे वाहन की लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया। 

पुलिस ने दर्ज किया चोरी का मामला

इस मामले में ट्रक मालिक की शिकायत पर सिपरी बाजार पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ चोरी का केस दर्ज किया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस घटना में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना का समय भी काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत जैसे देशों में भी गैस की उपलब्धता और कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे समय में इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों की चोरी ने स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।


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मेरठ के सेंट्रल मार्केट में लगभग 1470 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

मेरठ में शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में लगभग 1470 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी चल रही है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर होनी है, जिसमें अदालत ने इस बाजार के अधिकांश दुकानों को अवैध निर्माण बताया है।

dharna
धरना-प्रदर्शन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 05:41 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ में शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में लगभग 1470 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी चल रही है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर होनी है, जिसमें अदालत ने इस बाजार के अधिकांश दुकानों को अवैध निर्माण बताया है। अब प्रशासन ने यह काम आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है, जिसका असर इलाके में तनाव के रूप में देखा जा रहा है।

व्यापारियों और संगठनों की प्रतिक्रिया

इस फैसले का विरोध व्यापारी संगठनों और किसान मजदूर समूहों ने किया है। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन की नीति के खिलाफ आवाज उठाई। कई व्यापारियों तथा समर्थकों के बीच पुलिस के साथ बहस भी हुई है। अधिकारियों ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया, जिससे बाजार बंद रहने और विरोध तेज होने जैसी स्थिति बनी है। 

प्रशासन की तैयारी

आवास एवं विकास परिषद और स्थानीय प्रशासन ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। अधिकारियों ने कहा है कि अवैध माने गए निमार्णों को हटाने के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट की मदद ली जा सकती है। कुछ हिस्सों के लिए पहले ही नियंत्रण और नोटिस जारी किए गए हैं ताकि जो दुकानदार स्वयं हटाना चाहते हैं वे समय पर कदम उठा सकें।

व्यापारियों की मांग

व्यापारी लगातार प्रशासन और सरकार से कह रहे हैं कि उन्हें स्थानांतरित, पुनर्वास या किसी वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए ताकि उनका व्यवसाय और रोजी-रोटी प्रभावित न हो। कई लोग चाहते हैं कि मामला बातचीत और समाधान के रास्ते से सुलझाया जाए। यह विवाद कुछ समय से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस बाजार के अवैध निर्माण के खिलाफ फैसले दिए हैं और कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुपालन के लिए अब प्रशासन सक्रिय हो गया है।



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उत्तर प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, लागू हुई नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 04:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब केंद्र के पीएमजी मॉडल की तर्ज पर स्टेट PMG पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनके निर्माण के दौरान आने वाली रुकावटों का जल्द समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

इस नई व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने शासन से लेकर जिला स्तर तक के अफसरों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों के साथ-साथ सरकारी निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए स्टेट PMG पोर्टल का सक्रिय और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश के अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अड़चनों की पहचान समय रहते हो, ताकि विभागीय स्तर पर फाइलों में देरी और समन्वय की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।

उत्तर प्रदेश की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार पहले से ही अपनी वित्तपोषित और अहम परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल का उपयोग करती रही है। अब उत्तर प्रदेश ने इसी व्यवस्था को राज्य स्तर पर अपनाकर परियोजना प्रबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिश की है। इस पोर्टल के जरिए उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं के सामने आने वाले मुद्दों को संबंधित विभागों, जिलों और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और अटके हुए मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में वे सड़क और अन्य विकास कार्य भी इस व्यवस्था के दायरे में लाए जाएंगे, जो स्थानीय अवरोधों या धार्मिक स्थलों जैसी वजहों से लंबे समय से फंसे हुए हैं।

10 करोड़ से ज्यादा लागत वाली परियोजनाएं होंगी पोर्टल से लिंक

नियोजन विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को स्टेट PMG पोर्टल से जोड़ा गया है। ये परियोजनाएं सीएमआईएस पोर्टल पर दर्ज हैं और अब एपीआई के माध्यम से उनकी जानकारी स्वत: स्टेट PMG प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लंबित अनुमतियों और निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी एक ही मंच पर मिल सकेगी। इससे निगरानी अधिक व्यवस्थित होगी और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

समीक्षा बैठकों से होगा लंबित मामलों का निस्तारण

सरकार ने यह भी तय किया है कि पोर्टल पर दर्ज समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी बड़ी परियोजना सिर्फ फाइलों में अटककर न रह जाए, बल्कि जमीन पर उसका काम तेजी से आगे बढ़े। इन बैठकों के जरिए उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होगी और जिन परियोजनाओं में अनुमति, समन्वय या प्रशासनिक बाधा आ रही है, उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नई पहल के जरिए विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना चाहती है। साथ ही, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को बेहतर करके मल्टी-स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े अनुमोदन, अवरोध और अन्य मुद्दों को स्टेट PMG पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी को भी नई दिशा देगा। UP News

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