प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए एक और मेगा प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। गोरखपुर से शामली तक बनने वाला करीब 750 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब जमीन पर उतरने लगा है।

UP News : उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए एक और मेगा प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। गोरखपुर से शामली तक बनने वाला करीब 750 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब जमीन पर उतरने लगा है।उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे प्रभावित गांवों के किसानों को बड़ा मुआवजा मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में इस एक्सप्रेसवे के लिए जिन क्षेत्रों से मार्ग गुजरेगा, वहां की जमीनों की पहचान का काम तेजी से किया जा रहा है।
* करीब 50 गांवों की गाटा संख्या सूची तैयार कर ली गई है
* यह सूची संबंधित विभागों को भेजी जा चुकी है
* अन्य गांवों की सूची भी जल्द तैयार की जा रही है।
प्रशासन का उद्देश्य है कि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी रिकॉर्ड स्पष्ट और व्यवस्थित कर लिए जाएं।
गाटा सूची तैयार होने के बाद संबंधित जमीनों के बैनामों (रजिस्ट्री) पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:
* जमीन की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी रोकना
* अधिग्रहण में पारदर्शिता बनाए रखना
* भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचना
इसके बाद चरणबद्ध तरीके से जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस परियोजना में शामिल किसानों के लिए सरकार द्वारा बेहतर मुआवजा पैकेज देने की तैयारी है।
* बाजार दर से अधिक भुगतान की संभावना
* प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी ध्यान
* स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के अवसर।
हालांकि अंतिम मुआवजा दरों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन किसानों को मोटा मुआवजा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे केवल गोरखपुर से शामली तक प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर पानीपत तक ले जाने की योजना है। इससे:
* पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधी कनेक्टिविटी
* दिल्ली-एनसीआर से बेहतर जुड़ाव
* व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई गति मिलेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ हो सकता है।
इस परियोजना के तहत 100 से अधिक गांवों की जमीन प्रभावित होगी।
* बिजनौर जिले के कई गांव शामिल
* नजीबाबाद और धामपुर तहसील क्षेत्र भी प्रभावित
* पहले सभी गांवों में बैनामा रोकने की योजना थी, लेकिन बाद में रणनीति में बदलाव किया गया। प्रशासन अब चरणबद्ध तरीके से अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए एक गेमचेंजर परियोजना साबित हो सकता है। जहां एक ओर यह प्रदेश में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देगा, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए मुआवजा और पुनर्वास एक बड़ा मुद्दा रहेगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार किस तरह विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाती है।