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प्रदेश के हमीरपुर जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना के सत्यापन अभियान के दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो महीने तक चले विशेष वेरिफिकेशन अभियान में 904 ऐसे लाभार्थियों की पहचान हुई, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके बैंक खातों में लगातार वृद्धावस्था पेंशन की राशि भेजी जा रही थी।

UP News : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना के सत्यापन अभियान के दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो महीने तक चले विशेष वेरिफिकेशन अभियान में 904 ऐसे लाभार्थियों की पहचान हुई, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके बैंक खातों में लगातार वृद्धावस्था पेंशन की राशि भेजी जा रही थी। जांच के बाद समाज कल्याण विभाग ने इन सभी मामलों में पेंशन भुगतान रोक दिया है और सरकारी धनराशि की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना के पात्र और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए विशेष सर्वे कराया गया। यह अभियान तत्कालीन जिलाधिकारी घनश्याम मीना के निर्देश पर शुरू हुआ था। अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन किया और बैंक रिकॉर्ड तथा स्थानीय अभिलेखों का मिलान किया। जांच में पता चला कि 904 पेंशनधारकों का निधन हो चुका था, फिर भी उनके खातों में पेंशन की किस्तें भेजी जा रही थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जिले में लगभग 53,943 लोग वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे हैं।
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समाज कल्याण विभाग की जांच में सामने आया कि मृत लाभार्थियों के खातों में लगभग 27 लाख रुपये की सरकारी धनराशि जमा हो चुकी है। विभाग ने संबंधित बैंकों को सभी मृत पेंशनधारकों के खाते और विवरण उपलब्ध करा दिए हैं ताकि उपलब्ध राशि को नियमानुसार सरकारी खाते में वापस जमा कराया जा सके। जिन मामलों में धनराशि निकाली जा चुकी है, उनकी भी अलग से जांच की जाएगी।
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अधिकारियों के अनुसार अधिकांश मामलों में लाभार्थियों की मृत्यु की जानकारी समय पर समाज कल्याण विभाग और बैंकों तक नहीं पहुंची। इसी कारण पेंशन भुगतान की प्रक्रिया बंद नहीं हो सकी और किस्तें लगातार खातों में ट्रांसफर होती रहीं। विभाग का कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन पूरी तरह व्यक्तिगत लाभ योजना है और लाभार्थी के निधन के बाद किसी परिजन या नॉमिनी को इसका भुगतान करने का प्रावधान नहीं है।
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जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद 904 मृत लाभार्थियों के नाम पर जारी सभी पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। समाज कल्याण विभाग अब बैंक खातों में उपलब्ध सरकारी धनराशि की रिकवरी कर उसे राजकोष में वापस जमा कराने की कार्रवाई कर रहा है। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए नियमित सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।
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हमीरपुर में सामने आए इस मामले के बाद सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के सत्यापन को लेकर प्रशासन और अधिक सतर्क हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि समय-समय पर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तो अपात्र या मृत लाभार्थियों के नाम पर होने वाले भुगतान को रोका जा सकता है और सरकारी धन का दुरुपयोग भी कम होगा।
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