आचार संहिता केस में अब्बास की बढ़ी टेंशन, कोर्ट ने तय किए आरोप
अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े एक चर्चित मामले में मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने अब्बास अंसारी समेत पांच आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है। अब यह केस औपचारिक बहस से आगे निकलकर साक्ष्य और गवाही के चरण में प्रवेश कर रहा है। कोर्ट ने अगली कार्यवाही के लिए 4 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।
कोर्ट के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
अब्बास अंसारी की पेशी को लेकर न्यायालय परिसर को छावनी जैसी सुरक्षा में तब्दील कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में चुनावी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी, मुख्य द्वार पर गहन तलाशी और जांच के बाद ही लोगों को भीतर जाने की अनुमति मिली। परिसर के भीतर और बाहर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई, ताकि किसी भी तरह की हलचल या अप्रिय स्थिति पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।
क्या है मामला?
यह केस 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के वक्त का है। आरोप है कि प्रचार के दौरान अब्बास अंसारी निर्धारित सीमा से अधिक वाहनों के काफिले के साथ निकले थे, जो आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आता है। इस संबंध में 12 फरवरी 2022 को दक्षिणटोला थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर तत्कालीन थानाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने अब्बास अंसारी, शाहिद लारी, साकिब लारी, इसराइल अंसारी और रमेश राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बुधवार को इसी केस में सभी आरोपी अदालत में पेश हुए। अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी। पेशी के दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इंकार किया। उन्होंने संक्षेप में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
सुप्रीम कोर्ट से गैंगस्टर एक्ट केस में मिली थी राहत
इस बीच, कानूनी मोर्चे पर एक राहत की भी चर्चा रही। इससे पहले 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एवं समाज-विरोधी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज एक मामले में अब्बास अंसारी की पूर्ण जमानत याचिका मंजूर की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एम. पांचोली की पीठ ने सुनवाई में यह भी माना था कि वे लंबे समय से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और अब तक जमानत की शर्तों के दुरुपयोग का कोई आरोप सामने नहीं आया है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े एक चर्चित मामले में मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने अब्बास अंसारी समेत पांच आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है। अब यह केस औपचारिक बहस से आगे निकलकर साक्ष्य और गवाही के चरण में प्रवेश कर रहा है। कोर्ट ने अगली कार्यवाही के लिए 4 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।
कोर्ट के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
अब्बास अंसारी की पेशी को लेकर न्यायालय परिसर को छावनी जैसी सुरक्षा में तब्दील कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में चुनावी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी, मुख्य द्वार पर गहन तलाशी और जांच के बाद ही लोगों को भीतर जाने की अनुमति मिली। परिसर के भीतर और बाहर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई, ताकि किसी भी तरह की हलचल या अप्रिय स्थिति पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।
क्या है मामला?
यह केस 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के वक्त का है। आरोप है कि प्रचार के दौरान अब्बास अंसारी निर्धारित सीमा से अधिक वाहनों के काफिले के साथ निकले थे, जो आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आता है। इस संबंध में 12 फरवरी 2022 को दक्षिणटोला थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर तत्कालीन थानाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने अब्बास अंसारी, शाहिद लारी, साकिब लारी, इसराइल अंसारी और रमेश राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बुधवार को इसी केस में सभी आरोपी अदालत में पेश हुए। अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी। पेशी के दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इंकार किया। उन्होंने संक्षेप में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
सुप्रीम कोर्ट से गैंगस्टर एक्ट केस में मिली थी राहत
इस बीच, कानूनी मोर्चे पर एक राहत की भी चर्चा रही। इससे पहले 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एवं समाज-विरोधी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज एक मामले में अब्बास अंसारी की पूर्ण जमानत याचिका मंजूर की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एम. पांचोली की पीठ ने सुनवाई में यह भी माना था कि वे लंबे समय से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और अब तक जमानत की शर्तों के दुरुपयोग का कोई आरोप सामने नहीं आया है। UP News












