झांसी में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके भाई अली अहमद और उमर अहमद को पैरोल मिली है।

UP News : झांसी में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके भाई अली अहमद और उमर अहमद को पैरोल मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से प्रयागराज लाया गया। उमर लखनऊ जेल में बंद था, जबकि अली अहमद झांसी जिला जेल में बंद है। शनिवार को अली अहमद को झांसी जेल से प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। जिस वाहन में उसे ले जाया गया, उसकी खिड़कियों पर पर्दे लगाए गए थे। इससे बाहर मौजूद लोगों और मीडिया को वाहन के भीतर बैठे अली को देखने या उससे बातचीत करने का मौका नहीं मिला। अली की रवानगी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
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अली अहमद के जेल से बाहर निकलने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी मौके पर पहुंच गए थे। सभी की नजर इस बात पर थी कि पैरोल पर बाहर आने के बाद अली अपने छोटे भाई आबान की मौत पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
हालांकि, जेल से बाहर निकले वाहन की खिड़कियों पर पर्दे लगाए गए थे। इसके चलते अली का चेहरा भी स्पष्ट रूप से कैमरों में नहीं आ सका। वाहन के आसपास सुरक्षा बल तैनात रहे और पुलिस निगरानी में काफिला प्रयागराज के लिए रवाना हुआ।
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आबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अली और उमर की पैरोल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर की थी। कोर्ट ने दोनों को कड़ी सुरक्षा में अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाने का निर्देश दिया था।
रिपोर्टों के मुताबिक दोनों को अंतिम संस्कार में सीमित समय के लिए शामिल होने की अनुमति दी गई है। साथ ही पैरोल की अवधि में मीडिया से बातचीत नहीं करने समेत अन्य प्रतिबंध लगाए गए हैं।
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उधर, अली का बड़ा भाई उमर भी लखनऊ जेल से पैरोल पर प्रयागराज पहुंचा। उसका काफिला कसारी-मसारी कब्रिस्तान की ओर गया, जहां आबान को सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। कसारी-मसारी कब्रिस्तान में बड़ी संख्या में लोग जुटे। भीड़ बढ़ने के बाद पुलिस ने सुरक्षा और बैरिकेडिंग को मजबूत किया। अंतिम संस्कार को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
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आबान अहमद की मौत झांसी में हुए सड़क हादसे में हुई थी। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। हादसे में अन्य लोग भी घायल हुए थे और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। मामले की जांच जारी है।
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आबान का पार्थिव शरीर प्रयागराज लाया गया और कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। इसी कब्रिस्तान में अतीक अहमद, अशरफ और असद की कब्रें भी हैं। आबान के अंतिम संस्कार में उसके दोनों भाइयों के शामिल होने के लिए अदालत ने पैरोल मंजूर की है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। अली और उमर की आवाजाही से लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक पुलिस की निगरानी रही।
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