इस पूरे मामले में बचाव पक्ष ने 19 गवाह कोर्ट के सामने पेश किए थे, लेकिन अभियोजन के सिर्फ पाँच गवाह उनकी गवाही पर भारी पड़ गए। परिणामस्वरूप अदालत ने अब्दुल्ला को दोषी मानते हुए कठोर सजा का आदेश दिया।

UP New : उत्तर प्रदेश लगातार दो बार विधायक रह चुके सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को एक और मामले में बड़ी सजा मिली है। पहले से ही दो पैन कार्ड प्रकरण में सात साल की जेल काट रहे अब्दुल्ला को अदालत ने दो पासपोर्ट बनवाने के आरोप में भी सात वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस पूरे मामले में बचाव पक्ष ने 19 गवाह कोर्ट के सामने पेश किए थे, लेकिन अभियोजन के सिर्फ पाँच गवाह उनकी गवाही पर भारी पड़ गए। परिणामस्वरूप अदालत ने अब्दुल्ला को दोषी मानते हुए कठोर सजा का आदेश दिया।
अभियोजन की पैरवी स्वदेश शर्मा और वादी पक्ष के वकील संदीप सक्सेना ने की। अभियोजन के अनुसार, अब्दुल्ला ने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे जिनमें जन्म तिथि अलग-अलग दर्ज थी। इस संबंध में पासपोर्ट कार्यालय के अधिकारी नसीम अहमद की महत्वपूर्ण गवाही हुई थी। वादी और शहर विधायक संदीप सक्सेना ने बताया कि अदालत का निर्णय 412 पृष्ठों का है, जिसमें पूरे मामले का विस्तृत विवरण है। निर्णय में यह भी उल्लेख है कि किस तरह आजम खान के प्रभाव का इस्तेमाल कर अब्दुल्ला के दो पासपोर्ट जारी करवाए गए थे।
बचाव पक्ष का तर्क था कि अब्दुल्ला को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है और दो पासपोर्ट रखने का आरोप बेबुनियाद है। इसलिए कम से कम सजा दी जानी चाहिए थी। अभियोजन ने कहा कि आरोपी का अपराधिक इतिहास है और उसके खिलाफ कई अन्य मुकदमे भी लंबित हैं। इसलिए कठोरतम दंड दिया जाना आवश्यक है। बचाव पक्ष के गवाह हैं अखिलेश कुमार, जफरुद्दीन उर्फ जफर खान, आसिम खान, हरज्ञान सिंह, जावेद खान, जाहिद खान, खालिज अली, जुबैर खान, आसिफ अली, अनवार खान, जकी अली जाफरी, फरहान अली, जमीर अहमद, तनवीर फातिमा, अब्दुल करीम खान, डॉ. रंजीत कुमार, दिलीप शंकराचार्य आदि।
आकाश सक्सेना (वादी एवं विधायक), मनोज पाठक (प्राचार्य, सेंट पॉल्स स्कूल), सिपाही अखिलेश कुमार, पासपोर्ट अधिकारी नसीम अहमद, एसआई लखपत सिंह।
अब्दुल्ला आजम पर जन्मतिथि में हेरफेर कर राजनीति में प्रवेश का आरोप कई मामलों में साबित हो चुका है। दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में 7 साल की सजा, दो पैन कार्ड मामले में 7 साल की सजा हुई। अब दो पासपोर्ट मामले में भी 7 साल की सजा तथा छजलैट प्रकरण में भी सजा, जिसके बाद उनकी विधायक की सदस्यता समाप्त हुई। उनके खिलाफ अभी भी 34 मुकदमे विभिन्न अदालतों में लंबित बताए जाते हैं। अजम खान पर दर्ज यतीमखाना बस्ती प्रकरण में भी शुक्रवार को सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने एक गवाह को दोबारा बुलाने के लिए आवेदन दिया, जिस पर अदालत ने 23 दिसंबर की तारीख तय की है।