मिर्जापुर के मड़िहान क्षेत्र में अडानी थर्मल पावर प्लांट के विस्तार को लेकर विवाद बढ़ गया है। ददरी खुर्द गांव में सरकारी जमीन के कथित इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया

UP News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अडानी समूह के प्रस्तावित थर्मल पावर प्लांट के विस्तार को लेकर विरोध तेज हो गया है। मड़िहान तहसील क्षेत्र के ददरी खुर्द गांव में पावर प्लांट के विस्तार के दौरान कथित तौर पर सरकारी जमीन के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और सरकारी जमीन को मुक्त कराने की मांग की है। मड़िहान थाना क्षेत्र के राजस्व ग्राम ददरी खुर्द में अडानी समूह की ओर से 1600 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट से जुड़ा काम किए जाने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परियोजना के लिए किसानों की उपजाऊ जमीन कम कीमत पर खरीदी गई और इसके साथ ही बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन के इस्तेमाल का भी मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से आरोप लगाया गया कि नाले, नदी और जंगल क्षेत्र समेत करीब 100 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का कथित रूप से पावर प्लांट के विस्तार में इस्तेमाल किया जा रहा है। संगठन ने स्थानीय तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सरकारी भूमि के वास्तविक क्षेत्रफल और उसके इस्तेमाल की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पावर प्लांट परियोजना से स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के सामने कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ज्ञापन में कम मुआवजा मिलने, क्षेत्र में पानी की कमी और पावर प्लांट से निकलने वाली राख के कारण प्रदूषण की आशंका जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार एडवोकेट ने दावा किया कि परियोजना से स्थानीय पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में हुई जनसुनवाई के दौरान प्रभावित किसानों की समस्याओं को पर्याप्त तरीके से नहीं सुना गया। UP News:
इन मुद्दों को लेकर करणी सेना के साथ अधिवक्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों और प्रभावित क्षेत्र के किसानों एवं ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकारी जमीन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तत्काल निष्पक्ष कमेटी गठित की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में सरकारी जमीन के अवैध इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो उसे तत्काल मुक्त कराया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने पावर प्लांट के विस्तार पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि किसानों और जनहित से जुड़े मुद्दों का समाधान होने तक परियोजना के विस्तार को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल इस मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रशासनिक जांच का इंतजार है। सरकारी भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल, उसके इस्तेमाल की वैधता, किसानों को दिए गए मुआवजे और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे सवाल जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। UP News:
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