गंगा की पवित्र धारा आस्था का केंद्र है लेकिन अब वही गंगा एक बार फिर विवादों में है। चिकन पार्टी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब बियर पार्टी का एक नया वीडियो सामने आने से हड़कंप मच गया है। वायरल हो रहे इस वीडियो में कुछ लोग खुलेआम गंगा के बीच नाव पर बैठकर बियर पीते नजर आ रहे हैं।

UP News : गंगा की पवित्र धारा आस्था का केंद्र है लेकिन अब वही गंगा एक बार फिर विवादों में है। इफ्तार के नाम पर चिकन पार्टी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब बियर पार्टी का एक नया वीडियो सामने आने से हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में कुछ लोग खुलेआम गंगा के बीच नाव पर बैठकर बियर पीते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होने का दावा किया जा रहा है और प्रशासन हरकत में आ गया है।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो बीते रविवार का है। वीडियो में कुछ लोग नाव पर बैठे हैं और गंगा के बीच बियर पार्टी करते दिख रहे हैं। इससे पहले गंगा में चिकन पार्टी को लेकर विवाद हुआ था, ऐसे में इस नए वीडियो ने मामले को और तूल दे दिया है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह वीडियो आखिर कहां का है। शुरुआती जानकारी में इसे वाराणसी का बताया गया, लेकिन अब आशंका जताई जा रही है कि यह मिजार्पुर के अदलपुरा क्षेत्र का भी हो सकता है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वीडियो किस स्थान का है और इसमें नजर आ रहे लोग कौन हैं।
एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के मुताबिक, वीडियो की सत्यता और लोकेशन की जांच की जा रही है। साथ ही वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान करने का प्रयास भी जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना को लेकर मांझी समाज के लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि अप्रैल का पहला रविवार उनके लिए बेहद पवित्र होता है, जब वे शीतला माता के दरबार में बधावा लेकर जाते हैं। ऐसे पवित्र मौके पर इस तरह की हरकत न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है, बल्कि पूरे समाज की छवि को भी धूमिल करती है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या पवित्र स्थलों पर इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है? फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है, लेकिन यह घटना साफ संकेत देती है कि आस्था और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
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