बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की एक टिप्पणी को लेकर विवाद अब उत्तर प्रदेश के आगरा तक पहुंच गया है। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े इस मामले में अदालत में शिकायत दाखिल होने के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आखिर शिकायतकर्ता ने अदालत में कौन से ऐतिहासिक प्रमाण रखे और अब इस मामले मे

भगवान श्रीकृष्ण पर कथित टिप्पणी को लेकर आगरा कोर्ट पहुंचा मामला, अधिवक्ता ने धार्मिक भावनाएं आहत होने का लगाया आरोप; 14 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
UP News : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी का विवाद अब आगरा की अदालत तक पहुंच गया है। एक अधिवक्ता ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री के बयान से भगवान श्रीकृष्ण के वंशजों की धार्मिक भावनाओं और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इस मामले में अदालत ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 14 दिसंबर तय की है। खास बात यह है कि विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री अपनी टिप्पणी पर खेद भी जता चुके हैं।
पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान दिए गए धीरेंद्र शास्त्री के बयान से शुरू हुआ। आरोप है कि कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की शारीरिक मुद्राओं की तुलना करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कई लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद मामला धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
इस मामले में आगरा के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने सिविल कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की है। उनका आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे उनके वंशजों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। शिकायतकर्ता ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का मातृ पक्ष से वंशज बताते हुए अपनी शिकायत में ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया है।
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मानव रूप में हुआ था और उनके वंशज आज भी देश में मौजूद हैं। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में जादौन, जडेजा और भाटी जैसे समुदायों का उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता ने मथुरा गजेटियर और पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम की ऐतिहासिक रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि कथित टिप्पणी से भगवान श्रीकृष्ण के वंशजों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।
अधिवक्ता की ओर से दाखिल शिकायत पर आगरा की सिविल जज कंचन कुमार की अदालत में प्रारंभिक सुनवाई हुई। अदालत ने मामले को दर्ज करते हुए अगली सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है। इस मामले में फिलहाल शिकायत और आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसे धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर समझा गया है। उनका उद्देश्य भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच किसी प्रकार का अंतर पैदा करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनके शब्दों या व्याख्या से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं और क्षमा मांगते हैं।
इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों और प्रायोजकों से विवादित कथावाचकों से दूरी बनाने की अपील की थी। वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस की एक चौपाई का उल्लेख किया था। इस तरह धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी का विवाद धार्मिक चर्चा के साथ राजनीतिक बयानबाजी का विषय भी बन गया। फिलहाल इस मामले में सभी की नजरें आगरा कोर्ट में होने वाली 14 दिसंबर की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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