Agra Gwalior Expressway: 88 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आगरा से ग्वालियर के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगा। इस एक्सप्रेसवे के बनने से न सिर्फ यात्रियों को फायदा मिलेगा बल्कि व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा होने के बाद तीन राज्यों के बीच कनेक्टिविटी पहले से कहीं बेहतर हो जाएगी। 88 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आगरा से ग्वालियर के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगा। इस एक्सप्रेसवे के बनने से न सिर्फ यात्रियों को फायदा मिलेगा बल्कि व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि यह एक्सप्रेसवे आगे चलकर 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। फिलहाल इस परियोजना की अनुमानित लागत भूमि अधिग्रहण समेत करीब 4613 करोड़ रुपये बताई गई है।
अभी आगरा से ग्वालियर जाने में धौलपुर और मुरैना के रास्ते भारी ट्रैफिक और कई जगहों पर धीमी रफ्तार वाली सड़कों के कारण करीब ढाई से तीन घंटे तक लग जाते हैं लेकिन आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह दूरी करीब 75 से 80 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रियों को लंबा ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ वाले रास्तों से राहत मिलेगी।
आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ेगा। यह एक्सप्रेसवे आगरा जिले के देवरी गांव से शुरू होकर ग्वालियर बाईपास के पास सुसेरा गांव तक जाएगा। इस परियोजना में उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के करीब 20.2 किलोमीटर क्षेत्र के 14 गांव शामिल हैं। राजस्थान के धौलपुर जिले में लगभग 27 किलोमीटर हिस्सा आएगा जहां 18 गांव इस दायरे में हैं। वहीं मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर जिले में करीब 41.2 किलोमीटर क्षेत्र और 31 गांव इस एक्सप्रेसवे का हिस्सा होंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का रूट नेशनल हाईवे-44 (NH-44) के समानांतर रखा गया है। हालांकि यह एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा जिसे नई जमीन का अधिग्रहण करके बनाया जा रहा है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाने का मुख्य उद्देश्य पुराने रास्तों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और यात्रियों को तेज व सुरक्षित सफर देना है।
आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली-NCR से जुड़े लोगों को भी मिलेगा। यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा इनर रिंग रोड के जरिए दिल्ली से ग्वालियर की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद दिल्ली से ग्वालियर की यात्रा करीब चार घंटे में पूरी होने की उम्मीद है जबकि अभी इसमें छह से सात घंटे तक का समय लग जाता है। उत्तर दिशा में यह एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। वहीं मुरैना के पास प्रस्तावित चंबल एक्सप्रेसवे (अटल प्रगति पथ) से कनेक्शन मिलने की योजना है जिससे यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से भी जुड़ सकेगा।
आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का रूट चंबल नदी और उसके बीहड़ क्षेत्र के आसपास से होकर गुजरेगा। इस वजह से निर्माण के दौरान पर्यावरण और वन्यजीवों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। परियोजना में 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर और एक रेलवे ओवरब्रिज बनाने की योजना है। चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी के आसपास विशेष ग्रीन बेल्ट और अंडरपास बनाए जाएंगे ताकि वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो। आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे के लिए 93 प्रतिशत से ज्यादा भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी सामने आई है। आगरा के कुछ हिस्सों में मुआवजे से जुड़े मामलों को सुलझाने की प्रक्रिया जारी है। NHAI का लक्ष्य इस परियोजना को 2027-28 तक पूरा करने का है। इसके बाद यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच सड़क संपर्क और मजबूत हो जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार और माल परिवहन को फायदा मिलेगा। मुरैना और धौलपुर के औद्योगिक क्षेत्रों को दिल्ली-NCR के बड़े बाजारों तक पहुंच आसान होगी। इसके अलावा आगरा के पर्यटन स्थलों तक मध्य प्रदेश और राजस्थान के पर्यटकों की पहुंच भी आसान हो जाएगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे आगरा, धौलपुर, मुरैना और ग्वालियर के कुल 63 गांवों से होकर गुजर रहा है। इनमें उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के देवरी, धनौली, रोहता, जारुआ कटरा, नैनाना जाट, भाहई, बुढ़ाना, शमशाबाद, तोरा, राजपुर, उंटगिर, सुजैनपुर, नगला लालजीत और सलेमाबाद जैसे गांव शामिल हैं। राजस्थान के धौलपुर जिले के कई गांव और मध्य प्रदेश के मुरैना व ग्वालियर जिले के गांव भी इस परियोजना के दायरे में आएंगे। एक्सप्रेसवे बनने के बाद इन क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क और विकास के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
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