चर्चित नरेश कुमार हत्याकांड में करीब पांच साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। फैक्ट्री संचालक की हत्या कर शव को बोरे में भरकर खाली प्लॉट में फेंकने के मामले में मृतक की पत्नी, उसके प्रेमी और प्रेमी के भाई को दोषी करार दिया गया है। अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के आगरा स्तिथ ताजगंज क्षेत्र में हुए चर्चित नरेश कुमार हत्याकांड में करीब पांच साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। फैक्ट्री संचालक की हत्या कर शव को बोरे में भरकर खाली प्लॉट में फेंकने के मामले में मृतक की पत्नी, उसके प्रेमी और प्रेमी के भाई को दोषी करार दिया गया है। अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट शिव कुमार की अदालत ने मृतक की पत्नी प्रेमिता उर्फ प्रमिता निवासी सिद्धार्थ नगर गोबर चौकी, उसके प्रेमी रविकांत राजपूत और रविकांत के भाई शशिकांत राजपूत निवासी नगला केवल, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और कुल 2.80 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। UP News
मामला वर्ष 2021 का है। ताजगंज थाना क्षेत्र में जूते की फैक्ट्री चलाने वाले नरेश कुमार की हत्या कर शव को बोरे में बंद कर खाली प्लॉट में फेंक दिया गया था। 8 जून 2021 की सुबह नरेश के पिता सुरेश चंद को बेटे की हत्या की सूचना मिली थी। सुरेश चंद ने परिजनों के साथ नगला कली स्थित पुष्पांजलि होम्स पहुंचकर देखा तो घर के पीछे खाली प्लॉट में नरेश का शव बोरे से बंधा हुआ मिला। उन्होंने घटना के बाद ही अपनी बहू प्रेमिता पर शक जताया था। UP News
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रेमिता और रविकांत राजपूत के बीच नजदीकियां थीं। जांच के दौरान रविकांत के भाई शशिकांत की भूमिका भी सामने आई। पुलिस ने तीनों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की। जांच में महिला के मोबाइल की कॉल डिटेल और सीडीआर से प्रेमी के साथ लगातार संपर्क के साक्ष्य मिले। पुलिस को घटनास्थल से खून से सनी ईंट और शराब की बोतल भी मिली थी, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि प्रेमिता और रविकांत एक राजनीतिक संगठन से जुड़े थे और इसी दौरान दोनों के बीच संबंध बने थे। नरेश इन संबंधों का विरोध करता था। इस मामले में मृतक की 14 वर्षीय बेटी की अदालत में दी गई गवाही बेहद अहम साबित हुई। घटना के समय उसकी उम्र करीब 10 साल थी। बेटी ने अदालत को बताया कि वारदात वाली रात उसकी मां ने उसे और उसके भाई-बहनों को कमरे में बंद कर दिया था। कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था और बच्चों को कोल्ड ड्रिंक देकर टीवी की आवाज तेज कर दी गई थी। उसने बताया कि रात करीब तीन बजे जब दरवाजा खुलवाने की कोशिश की गई तो शुरुआत में मां ने दरवाजा नहीं खोला। बाद में कमरे में खून के निशान दिखाई दिए और मां के रात में स्नान करने की बात भी सामने आई। UP News
पुलिस जांच के दौरान उस कमरे की दीवारों और फर्श पर खून के धब्बे मिले थे। कमरे का सामान बिखरा हुआ था, जिससे वहां संघर्ष होने की आशंका जताई गई। मौके से खून से सनी ईंट और शराब की बोतल बरामद हुई थी। इसके अलावा शव से करीब 100 मीटर की दूरी पर एक बोरा मिला, जिसमें बेडशीट, तकिया, दस्ताने और खून से सने कपड़े रखे हुए थे। इन सभी वैज्ञानिक और भौतिक साक्ष्यों ने पुलिस जांच को मजबूती दी और अदालत में आरोप साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। UP News
अभियोजन पक्ष की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी मृत्युंजय सिंह और एडीजीसी विजय वर्मा ने अदालत में मामले की पैरवी की। अभियोजन ने वादी सुरेश चंद, मृतक के भाई सोनू, चिकित्सक, पुलिस अधिकारियों, विवेचक और मृतक की बेटी समेत कुल दस गवाह पेश किए। इसके अलावा वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित किया गया। अदालत ने सभी तथ्यों, गवाहियों और साक्ष्यों को देखते हुए तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। UP News
विज्ञापन