पहलगाम आतंकी हमले में पति शुभम द्विवेदी को खोने वाली ऐशान्या द्विवेदी ने अपने जन्मदिन पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, “मैंने भगवान को माफ किया।” शादी के महज डेढ़ महीने बाद पति को खोने वाली ऐशान्या आज भी उस दर्द और शुभम की यादों के साथ जिंदगी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

UP News : पहलगाम का वह खौफनाक मंजर शायद ऐशान्या द्विवेदी की जिंदगी से कभी मिट नहीं सकता। जिस उम्र में एक नवविवाहिता अपने पति के साथ भविष्य के सपने बुन रही थी, उसी उम्र में आतंक की गोलियों ने उससे उसका जीवनसाथी छीन लिया। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में कानपुर के शुभम द्विवेदी की मौत हो गई थी। ऐशान्या उस हमले की प्रत्यक्ष पीड़ितों में शामिल थीं। अब अपने जन्मदिन पर ऐशान्या ने सोशल मीडिया पर जो शब्द लिखे हैं, उन्होंने एक बार फिर उस दर्द को सामने ला दिया है, जिसे वह लंबे समय से अपने भीतर लेकर जी रही हैं। उनका संदेश सिर्फ एक पत्नी के शोक की कहानी नहीं है, बल्कि उस सवाल की अभिव्यक्ति है, जिसका जवाब शायद किसी के पास नहीं—आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यों हुआ?
ऐशान्या और शुभम की शादी 12 फरवरी 2025 को हुई थी। दोनों ने शादी के बाद कश्मीर घूमने का फैसला किया था। लेकिन जिस कश्मीर की खूबसूरत यादें उनके वैवाहिक जीवन का हिस्सा बननी थीं, वही यात्रा ऐशान्या की जिंदगी की सबसे भयावह स्मृति बन गई। 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हमला किया। इस हमले में 26 लोगों की जान गई। शुभम द्विवेदी भी आतंकियों की गोलियों का शिकार हुए। ऐशान्या ने बाद में बताया था कि वह अपने पति को अपनी आंखों के सामने गोली लगते हुए देखने के बाद भी उस सदमे से बाहर नहीं निकल पाईं।
जन्मदिन सामान्य तौर पर जिंदगी में खुशियां लेकर आता है। परिवार और मित्र शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन ऐशान्या के लिए जन्मदिन की तारीख उन तमाम सवालों को भी सामने ले आई, जिनसे वह रोज जूझती हैं। जिस व्यक्ति के साथ उन्हें अपना जन्मदिन, अपनी शादी की सालगिरह और जिंदगी के तमाम पड़ाव देखने थे, वह अब तस्वीरों में है। ऐशान्या पहले भी बता चुकी हैं कि कई बार वह शुभम की तस्वीर के सामने बैठकर उनसे बात करने की कोशिश करती हैं। वह उन्हें बताना चाहती हैं कि आज उन्होंने क्या किया, क्या महसूस किया, लेकिन सामने से जवाब देने वाला कोई नहीं है।
ऐशान्या के जन्मदिन पर सामने आया उनका संदेश इसी दर्द की अगली कड़ी है। “मैं आज भगवान को माफ करती हूं...”—उनके इस भाव ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। यह वाक्य जितना छोटा है, उसके पीछे छिपा दर्द उतना ही गहरा है। एक ऐसी महिला, जिसने अपने जीवनसाथी को शादी के कुछ ही सप्ताह बाद खो दिया, जब भगवान से सवाल करने और फिर उन्हें माफ करने की बात करती है तो यह किसी धार्मिक बहस से ज्यादा उसके निजी दुख और उस दुख से निकलने की कोशिश को दर्शाता है। यहां 'माफ करना' ऐशान्या की अपनी भावनात्मक अभिव्यक्ति है—एक ऐसी अभिव्यक्ति जिसमें शिकायत, पीड़ा, स्वीकार और आगे बढ़ने की कोशिश एक साथ दिखाई देती है।
पहलगाम हमले के बाद ऐशान्या ने कई बार उस घटना को याद किया है। उन्होंने बताया कि शुभम का आखिरी चेहरा उनके जेहन से नहीं निकलता। एक अन्य बातचीत में उन्होंने कहा था कि वह उस घटना को न भुला सकती हैं और न ही उससे पूरी तरह बाहर निकल सकती हैं। उनकी पीड़ा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक साल बाद भी वह उस दिन को याद करते हुए भावुक हो जाती हैं। फिर भी ऐशान्या ने खुद को केवल दुख तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और पहलगाम हमले में मारे गए सभी 26 लोगों के लिए राष्ट्रीय सम्मान की मांग भी की।
ऐशान्या ने यह भी कहा है कि उनका उद्देश्य केवल मुआवजा या नौकरी मांगना नहीं है। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण शुभम की यादों को जिंदा रखना है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए सम्मान और न्याय की बात उठाई है। यही वजह है कि उनका हर सार्वजनिक बयान केवल व्यक्तिगत दर्द नहीं रहता। उसमें पहलगाम हमले में मारे गए दूसरे परिवारों का दर्द भी दिखाई देता है।
हमले को एक साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन ऐशान्या के लिए कैलेंडर बदलने से वह रात नहीं बदली, जिस रात उनकी जिंदगी भी बदल गई। उन्होंने एक बातचीत में यह भी कहा था कि सार्वजनिक जगह पर हंसने पर लोग सवाल करते हैं कि पति की मौत के बाद वह कैसे हंस सकती हैं। ऐशान्या ने इसका जवाब देते हुए अपनी पहचान के उस हिस्से को सामने रखा जिसमें वह शुभम की पत्नी होने के साथ-साथ स्वयं भी एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं। उनका यह दर्द बताता है कि शोक का कोई तय समय नहीं होता। किसी प्रिय व्यक्ति को खोने के बाद जिंदगी आगे बढ़ती जरूर है, लेकिन यादें साथ चलती रहती हैं।
ऐशान्या का जन्मदिन वाला संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल एक वाक्य नहीं है। इसके पीछे शादी, सपने, कश्मीर की यात्रा, आतंक का वह दिन, पति को खोने का सदमा और उसके बाद अकेले जिंदगी संभालने की कोशिश—पूरी कहानी मौजूद है। “मैंने भगवान को माफ किया” कहना उनके लिए शायद उस सवाल को छोड़ देने की कोशिश है जिसका जवाब उन्हें कभी नहीं मिल सकता।
जिस लड़की ने शादी के महज कुछ सप्ताह बाद अपना पति खो दिया, क्या उसके लिए जन्मदिन कभी पहले जैसा हो पाएगा? शायद नहीं। लेकिन ऐशान्या के शब्द यह जरूर बताते हैं कि वह उस दर्द के साथ जीना सीखने की कोशिश कर रही हैं। शुभम उनके साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनका प्रेम और उनके लिए न्याय की आवाज ऐशान्या की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
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