अकबर इलाहाबादी : हँसी की धार से समाज का सच लिखने वाला शायर

अकबर की चोट सबसे ज्यादा उन पर पड़ती थी जो अपनी मिट्टी से दूरी बनाकर नकली ‘मॉडर्न’ होने को तरक्की समझते थे। उनकी नजर में यह सिर्फ फैशन नहीं, पहचान का संकट था। यही कारण है कि भारतीय समाज ने उनकी आवाज़ को “लिसानु’ल-अस्र” यानी ‘अपने युग का प्रतिनिधि कवि’ कहकर सम्मान दिया।

अकबर इलाहाबादी की शायरी

अकबर इलाहाबादी की शायरी

locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar15 Jan 2026 02:11 PM
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