यह कि सदन में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता और किसी भी धार्मिक पीठ से जुड़े व्यक्ति को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो। इस बयान को विपक्ष ने धार्मिक पद की गरिमा से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद उस समय उभर आया जब मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेस्वरानंद को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। हुआ यह कि सदन में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता और किसी भी धार्मिक पीठ से जुड़े व्यक्ति को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो। इस बयान को विपक्ष ने धार्मिक पद की गरिमा से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री की टिप्पणी को अत्यंत अपमानजनक बताया। उन्होंने लिखा कि जब व्यक्ति में अहंकार हावी हो जाता है तो उसकी भाषा और व्यवहार मर्यादा से भटक जाते हैं।
अखिलेश ने यह भी कहा कि किसी धर्मगुरु के पद और प्रतिष्ठा पर टिप्पणी करना उचित नहीं है और ऐसा करना नैतिक रूप से गलत है।
अन्य मुद्दों को भी जोड़ाअपने बयान में अखिलेश यादव ने महाकुंभ से जुड़े मामलों और मुआवजा वितरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि जनता को हर मामले में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य पर अहंकार हावी हो जाता है तो वह इसी प्रकार की बयानबाजी बिना सोचे समझे करने लगता है।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी अब विधानसभा की कार्यवाही का स्थायी हिस्सा बन चुकी है। सत्तापक्ष इसे संदर्भ में देखे जाने की बात कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में धर्म, मर्यादा और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जो आगे भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।UP News