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इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का एक वीडियो तेजी से चर्चा में है। इस वीडियो में वे सपा समर्थक और सोशल मीडिया पर ‘छोटे सिपाही’ के नाम से पहचाने जाने वाले नवरत्न लाल यादव से बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का एक वीडियो तेजी से चर्चा में है। इस वीडियो में वे सपा समर्थक और सोशल मीडिया पर ‘छोटे सिपाही’ के नाम से पहचाने जाने वाले नवरत्न लाल यादव से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने नवरत्न को पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने की सलाह दी और बेवजह की रीलबाजी से दूरी बनाए रखने को कहा।
गुरुवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय में सोशल मीडिया पर सक्रिय कार्यकर्ताओं, समर्थकों और कंटेंट क्रिएटर्स की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का फोकस उत्तर प्रदेश की राजनीति, पार्टी की विचारधारा और आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव के लिए डिजिटल मोर्चे को मजबूत करना था। बैठक में अखिलेश यादव ने साफ कहा कि सोशल मीडिया सिर्फ लोकप्रियता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के बीच जिम्मेदार संदेश पहुंचाने का भी प्लेटफॉर्म है। बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने नवरत्न लाल यादव से सीधे पढ़ाई को लेकर सवाल किए। उन्होंने पूछा कि क्या अब वह लिखना-पढ़ना सीख गए हैं, हस्ताक्षर कर लेते हैं या नहीं, और मोबाइल में नाम कैसे लिखते हैं। इस पर नवरत्न ने जवाब दिया कि वह बोलकर टाइप करते हैं। इसके बाद अखिलेश ने उनसे एबीसीडी सीखने और पढ़ाई में आगे बढ़ने को लेकर भी सवाल किए। यह पूरा संवाद अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हलचल के बीच खूब देखा जा रहा है।
बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने नवरत्न को यह भी समझाया कि केवल रील बनाना ही मकसद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे पर वीडियो बनाकर या सोशल मीडिया पर हल्की सामग्री डालकर समय बर्बाद करने से बचना चाहिए। उनका इशारा साफ था कि युवा समर्थक अपनी ऊर्जा सकारात्मक और उपयोगी कामों में लगाएं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहां राजनीति और सोशल मीडिया का सीधा असर जनता तक पहुंचता है, वहां ऐसे संदेश को सपा नेतृत्व की गंभीर रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
नवरत्न लाल यादव पिछले कई वर्षों से समाजवादी पार्टी समर्थकों के बीच चर्चा का विषय रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है। इंस्टाग्राम पर लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं, जबकि फेसबुक पर भी उनकी पहुंच काफी व्यापक बताई जाती है। उत्तर प्रदेश की सियासत में नवरत्न की पहचान एक ऐसे समर्थक की रही है, जिसने कम उम्र में ही सपा और मुलायम सिंह यादव परिवार के प्रति अपनी भावनात्मक जुड़ाव से लोगों का ध्यान खींचा।
नवरत्न लाल यादव का नाम उस समय प्रमुखता से सामने आया था, जब अक्टूबर 2022 में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वह सैफई जाने के लिए घर से निकल पड़े थे। रास्ता भटक जाने के कारण वह कानपुर पहुंच गए थे, जिसके बाद उनका वीडियो सोशल media पर वायरल हो गया था। उस घटना के बाद अखिलेश यादव ने खुद रुचि ली थी और पार्टी नेताओं के जरिए नवरत्न को सैफई बुलाया गया था। वहीं से नवरत्न और अखिलेश यादव की मुलाकात चर्चा का विषय बनी थी। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सोशल मीडिया दुनिया में लगातार पहचाने जाने लगे। समाजवादी पार्टी के भीतर नवरत्न को लेकर यह माना जाता रहा है कि अखिलेश यादव उनकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर संवेदनशील हैं। यही वजह है कि इस बार भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन्हें डांटने के बजाय समझाने का तरीका अपनाया। यह संदेश सिर्फ नवरत्न के लिए नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में सक्रिय उन तमाम युवा सोशल मीडिया समर्थकों के लिए भी था, जो राजनीति को केवल वायरल वीडियो तक सीमित कर देते हैं।
बैठक में मौजूद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स से अखिलेश यादव ने कहा कि वे अपने पोस्ट, वीडियो और डिजिटल कंटेंट के जरिए समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया पर डाली गई हर बात सिर्फ निजी अभिव्यक्ति नहीं होती, बल्कि उसका सामाजिक असर भी पड़ता है। उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिए कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह की बैठकों का सिलसिला आगे भी जारी रखा जाए, ताकि उत्तर प्रदेश में पार्टी का डिजिटल संदेश अधिक संगठित और जिम्मेदार तरीके से लोगों तक पहुंचे। UP News