उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार उत्तर प्रदेश में व्यापारिक माहौल बिगाड़ रही है और वाराणसी इसके ताज़ा उदाहरणों में से एक है। उन्होंने तंज भरे अंदाज़ में कहादालमंडी वालों को दाल की तरह दले नहीं। उन्हें इज्जत के साथ कारोबार करने दिया जाए।

वाराणसी के दालमंडी इलाके में चल रहे डिमोलिशन अभियान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार और बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए इसे “पॉलिटिकल डिमोलिशन” करार दिया और अधिकारियों को खुले मंच से चेतावनी दी कि “जो कुछ भी हो रहा है, सब नोट हो रहा है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में चल रहे चौड़ीकरण और डिमोलिशन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में विकास के नाम पर लोगों की रोज़ी–रोटी पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। अखिलेश ने साफ शब्दों में कहा - दालमंडी के लोगों को डराया जा रहा है, कारोबारियों को दबाव में लाया जा रहा है। ये सड़क चौड़ीकरण कम, और ‘पॉलिटिकल डिमोलिशन’ ज़्यादा है। यह डिमोलिशन तुरंत रोका जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने दावा किया कि आज उत्तर प्रदेश के जिन शहरों में मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं या बनाई जा रही हैं, उनकी नींव समाजवादी सरकार के दौर में रखी गई थी। उन्होंने कहा कि वाराणसी के लिए भी मेट्रो की DPR उनकी सरकार ने तैयार कराई थी, लेकिन बीजेपी सरकार ने आगे बढ़ाने के बजाय उत्तर प्रदेश में दिखावटी विकास और असली रोक” की नीति अपनाई। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने लखनऊ का मॉल बेच दिया,वाराणसी में न वरुणा नदी साफ होने दी, न रिवर फ्रंट बनने दिया। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में जो भी ठोस शहरी विकास परियोजनाएं हैं, वे पूर्ववर्ती सपा सरकार की योजनाओं का नतीजा हैं, जबकि मौजूदा सरकार “क्रेडिट की राजनीति” में लगी है। वाराणसी के चौड़ीकरण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार इसे “हेरिटेज और इतिहास बचाने” की योजना बताकर जनता के सामने पेश कर रही है, जबकि असल मकसद संकीर्ण सियासत को आगे बढ़ाना है। अखिलेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश की विरासत बचाने के नाम पर वाराणसी की पुरानी बस्तियों में रहने वाले छोटे दुकानदारों और कारोबारी परिवारों को उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, ये लोग हेरिटेज की आड़ में लोगों की दुकानें और घर तोड़ रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश की विरासत की रक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने इस पूरे मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की नौकरशाही को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन उनके फैसलों का रिकॉर्ड हमेशा के लिए दर्ज रहता है। अखिलेश ने कहा -अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि वे जो कर रहे हैं, सब नोट हो रहा है। कल को जब हालात बदलेंगे, तो इन्हें जवाब भी देना होगा। दालमंडी के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के पक्ष में खड़े होते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि वाराणसी का यह इलाका पीढ़ियों से कारोबार का केन्द्र रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार उत्तर प्रदेश में व्यापारिक माहौल बिगाड़ रही है और वाराणसी इसके ताज़ा उदाहरणों में से एक है। उन्होंने तंज भरे अंदाज़ में कहादालमंडी वालों को दाल की तरह दले नहीं। उन्हें इज्जत के साथ कारोबार करने दिया जाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीति लोगों को डराकर कारोबार बंद कराने की है। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापारी, छोटे उद्यमी और स्थानीय बाजार रीढ़ की हड्डी हैं, लेकिन सरकार बुलडोज़र और धमकियों की भाषा में बात कर रही है। उन्होंने कहा,“हर नागरिक को अपनी बात कहने का हक है,सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। किसी की जीविका छीनने का अधिकार सरकार को किसने दिया?” अखिलेश ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी “संकीर्ण सोच और गहरी साजिश” के तहत ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे न सिर्फ वाराणसी, बल्कि पूरे प्रदेश का सामाजिक व आर्थिक ताना–बाना प्रभावित हो रहा है।
दालमंडी डिमोलिशन को लेकर शुरू हुई यह लड़ाई अब वाराणसी से निकलकर पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रही है। सपा प्रमुख का कहना है कि यह सिर्फ एक शहर या एक मोहल्ले का मसला नहीं, बल्कि यह सवाल है कि उत्तर प्रदेश में विकास के नाम पर आम लोगों के अधिकारों और रोजी–रोटी के साथ कितना खिलवाड़ किया जा सकता है। अखिलेश यादव ने सरकार से मांग की कि वाराणसी के दालमंडी इलाके में चल रहे डिमोलिशन को तत्काल रोका जाए, प्रभावित लोगों से संवाद किया जाए और उत्तर प्रदेश में विकास को “डर और दबाव” नहीं, बल्कि “संवाद और सहमति” के रास्ते से आगे बढ़ाया जाए।