अखिलेश यादव का 11 सितंबर का बुलंदशहर दौरा हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलने के बाद रद्द हो गया। हेलीपैड पर पानी को लेकर सपा और प्रशासन आमने-सामने हैं।

UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्तावित बुलंदशहर दौरे को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने शासन-प्रशासन और विपक्ष के बीच एक बार फिर टकराव को सामने ला दिया है। अखिलेश यादव का 11 सितंबर को बुलंदशहर जाने का कार्यक्रम था, लेकिन पुलिस लाइन मैदान में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम निरस्त हो गया। इसके बाद सपा मुखिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोल दिया।
अखिलेश यादव ने बुलंदशहर के प्रस्तावित हेलीपैड का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दावा किया कि मौके पर दूर-दूर तक जलभराव नहीं है। उनका आरोप है कि सीमेंट, गारा और पेवर ब्लॉक्स आदि का हवाला देकर प्रशासन उनके कार्यक्रम को रद्द कराने का बहाना तलाश रहा है। सपा प्रमुख ने मांग की कि सपा पदाधिकारियों की मौजूदगी में किसी निष्पक्ष तकनीकी विशेषज्ञ से हेलीपैड की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। अखिलेश के इस बयान के बाद सपा कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली और बुलंदशहर की स्थानीय राजनीति अचानक गरमा गई। UP News:
अखिलेश यादव ने हेलीपैड विवाद को केवल हेलीकॉप्टर की लैंडिंग तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सड़क मार्ग से बुलंदशहर आने की स्थिति को लेकर भी सरकार पर तंज कसा। उनका सवाल था कि यदि वह सड़क मार्ग से बुलंदशहर पहुंचने का प्रयास करेंगे तो क्या एक्सप्रेसवे, हाईवे अथवा सड़कों की खराब स्थिति का बहाना बनाकर उनके कार्यक्रम में बाधा खड़ी की जाएगी? अखिलेश ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश की सड़कों की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्षी नेताओं के कार्यक्रमों के लिए कभी मौसम तो कभी दूसरी व्यवस्थाओं का हवाला दिया जाता है तो जनता सवाल पूछेगी कि आखिर हेलीपैड और मौसम केवल विपक्ष के लिए ही क्यों खराब होता है?
दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अखिलेश यादव के आरोपों को राजनीतिक साजिश के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस प्रशासन ने हेलीकॉप्टर की लैंडिंग की अनुमति नहीं देने के पीछे सुरक्षा और मैदान की स्थिति को कारण बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित अधिकारी से मैदान की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई थी और लैंडिंग के लिए मैदान को सुरक्षित नहीं माना गया। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से भी मैदान में पानी होने का हवाला दिया गया है। यानी एक तरफ सपा का दावा है कि हेलीपैड पर दूर-दूर तक जलभराव नहीं है, जबकि प्रशासन सुरक्षा मानकों और मैदान में पानी को अनुमति न देने का कारण बता रहा है।
अखिलेश यादव के दौरे की अनुमति का मामला सामने आने के बाद बुलंदशहर में सपा नेताओं का गुस्सा भी सामने आया। सपा जिलाध्यक्ष मतलूब अली सहित पार्टी पदाधिकारियों ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रशासन सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि यदि सुरक्षा अथवा तकनीकी कारणों से हेलीकॉप्टर उतारने में कोई वास्तविक समस्या है तो निष्पक्ष विशेषज्ञों से जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की जा रही है।
हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलने के बाद अखिलेश यादव का 11 सितंबर का प्रस्तावित बुलंदशहर दौरा निरस्त हो गया है। इससे पहले कार्यक्रम की तारीख को लेकर भी बदलाव की बात सामने आई थी। अब दौरा रद्द होने के बाद यह पूरा मामला राजनीतिक मुद्दा बन गया है। एक तरफ समाजवादी पार्टी इसे विपक्षी कार्यक्रम में प्रशासनिक अड़चन के तौर पर देख रही है, वहीं प्रशासन इसे सुरक्षा और हेलीपैड की तकनीकी उपयुक्तता से जोड़ रहा है। UP News:
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष और सरकार के बीच टकराव के मुद्दे तेजी से राजनीतिक रंग ले रहे हैं। ऐसे समय में अखिलेश यादव के बुलंदशहर दौरे का रद्द होना और उसके बाद सपा मुखिया का सीधे शासन-प्रशासन पर हमला बोलना निश्चित तौर पर राजनीतिक चर्चा को और तेज करने वाला घटनाक्रम है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में हेलीपैड की स्थिति हेलीकॉप्टर लैंडिंग के लिए असुरक्षित थी या फिर कार्यक्रम को रोकने के पीछे कोई प्रशासनिक अथवा राजनीतिक वजह थी? इसका निर्णायक जवाब निष्पक्ष तकनीकी जांच और प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट से ही सामने आएगा। फिलहाल बुलंदशहर में एक तरफ प्रशासन अपने सुरक्षा संबंधी तर्क पर कायम है, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव इसे लेकर सरकार पर हमलावर हैं। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष बनाम सरकार की बहस का एक और बड़ा मुद्दा बन सकता है। UP News:
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