पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जयंत चौधरी को लेकर दिए गए ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने इस बयान को लेकर सपा अध्यक्ष पर तीखा हमला बोला है।

UP News : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जयंत चौधरी को लेकर दिए गए ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने इस बयान को लेकर सपा अध्यक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश यादव की टिप्पणी को अमर्यादित और शर्मनाक बताते हुए सपा नेतृत्व से रालोद, उसके नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार के साथ-साथ जाट समाज से भी माफी मांगने की मांग की है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति में सहयोगी दलों के प्रति भी सम्मान की कमी रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति का नुकसान व्यापक रूप से विपक्षी और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को हुआ, जिसका फायदा भाजपा को मिला। UP News
मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव का अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी रालोद और उसके नेता को लेकर सार्वजनिक रूप से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कहा कि सपा नेतृत्व को अपने बयान पर सफाई देने के साथ संबंधित लोगों और समाज से माफी मांगनी चाहिए। बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा के रवैये में विरोधी दलों के साथ-साथ सहयोगी दलों के प्रति भी संकीर्णता और जातीय सोच दिखाई देती रही है। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों का राजनीतिक फायदा कई बार भाजपा को मिला है। UP News
मायावती ने अपने बयान में सपा और बसपा के पुराने राजनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने 1993 में दोनों दलों के बीच हुए गठबंधन और बाद में पैदा हुए विवादों को याद करते हुए कहा कि गठबंधन टूटने के बाद 2 जून 1995 को लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में उनके साथ गंभीर घटना हुई थी। मायावती ने इस घटना को अपने खिलाफ कथित साजिश से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस दौर की घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता। UP News
बसपा प्रमुख ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह गठबंधन खत्म हो गया। मायावती ने इसके लिए सपा के कथित अहंकारी और स्वार्थपूर्ण राजनीतिक रवैये को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और राजनीतिक विश्वास किसी भी गठबंधन की बुनियाद होते हैं। UP News
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