समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर ऐसा पोस्ट किया है, जिसे पश्चिमी यूपी की राजनीति और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ चल रही सियासी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत लगातार गरमाती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर ऐसा पोस्ट किया है, जिसे पश्चिमी यूपी की राजनीति और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ चल रही सियासी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव की पोस्ट ऐसे समय आई है, जब सहारनपुर से लेकर मेरठ और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा, रालोद और भाजपा के बीच राजनीतिक संदेशों की लड़ाई तेज हो गई है। UP News
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और किसान राजनीति से जुड़े मुद्दे को लेकर टिप्पणी की है। पोस्ट के साथ सामने आए संदेश में उन्होंने किसान-विरोधी होने के आरोपों के जवाब में अपने 2012-17 के शासनकाल का हवाला देते हुए राजनीतिक पलटवार किया है। हालांकि पोस्ट में जयंत चौधरी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए इसे केवल सामान्य राजनीतिक टिप्पणी मानना आसान नहीं है। खासकर तब, जब पिछले कुछ सप्ताह से अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर जुबानी जंग लगातार तेज हुई है। UP News
दरअसल, अखिलेश यादव की जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक तल्खी खुलकर सामने आई थी। जयंत चौधरी ने इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए इसे जाट समाज को निशाना बनाने से जोड़ दिया था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच ‘ABCD’, ‘G-J’ और अब ‘XYZ’ जैसे राजनीतिक कटाक्षों का दौर भी देखने को मिला। जयंत चौधरी ने हाल में सहारनपुर की स्वाभिमान रैली में भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि कोई दुश्मन न बने, लेकिन अखिलेश बार-बार बयान दे रहे हैं। उन्होंने ‘G’ से गन्ना और ‘J’ से जाट का राजनीतिक संदेश भी दिया। UP News
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी की राजनीतिक सक्रियता बढ़ने के बीच अखिलेश यादव की गतिविधियों को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 3 सितंबर को सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में रालोद ने ‘स्वाभिमान रैली’ के जरिए अपना शक्ति प्रदर्शन किया। रैली में जयंत चौधरी ने किसान, गन्ना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। रालोद की यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की राजनीति लंबे समय से किसान और जाट समाज के इर्द-गिर्द मजबूत रही है। अब जयंत चौधरी जाट आधार के साथ गुर्जर और अन्य ग्रामीण समुदायों के बीच भी अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। UP News
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा की चुनौती केवल रालोद से नहीं है। यहां भाजपा-रालोद गठबंधन, बसपा की संभावित सक्रियता और मुस्लिम, जाट, गुर्जर, दलित, यादव तथा अन्य पिछड़े वर्गों के बीच बदलते राजनीतिक समीकरण 2027 के चुनाव को बेहद रोचक बना सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषणों में पश्चिमी यूपी को आगामी विधानसभा चुनाव की महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रयोगशाला के तौर पर देखा जा रहा है। सपा जहां अपने PDA यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं रालोद किसान, जाट, गुर्जर और ग्रामीण समाज के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि अखिलेश यादव के पश्चिमी यूपी से जुड़े हर बयान और सोशल मीडिया पोस्ट को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। UP News
जयंत चौधरी के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी यूपी में अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन को भाजपा के साथ गठबंधन के बावजूद मजबूत बनाए रखना है। वहीं अखिलेश यादव के सामने चुनौती यह है कि 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के दौरान बने सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से कैसे तैयार किया जाए। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद साथ मैदान में उतरे थे, लेकिन इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं और जयंत चौधरी एनडीए का हिस्सा बन गए। अब दोनों दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव तैयार कर रहे हैं। UP News
सहारनपुर का घटनाक्रम इस पूरी राजनीतिक लड़ाई का सबसे ताजा उदाहरण है। पहले जयंत चौधरी ने यहां बड़ी स्वाभिमान रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाई और उसके बाद अखिलेश यादव के पश्चिमी यूपी केंद्रित राजनीतिक संदेशों ने सियासी चर्चा को और बढ़ा दिया है। जयंत चौधरी ने सहारनपुर में PDA पर भी निशाना साधते हुए अपने लिए किसान और सामाजिक सम्मान आधारित राजनीतिक नैरेटिव को आगे बढ़ाया। वहीं अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में किसान, रोजगार, महंगाई और सामाजिक समीकरणों को जोड़कर अपनी राजनीति को धार देने की कोशिश कर रहे हैं। UP News
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। यहां मुकाबला केवल भाजपा बनाम सपा तक सीमित रहने के बजाय भाजपा-रालोद गठबंधन, सपा और संभावित रूप से बसपा के बीच सामाजिक समीकरणों की लड़ाई का रूप ले सकता है। ऐसे में अखिलेश यादव का जयंत चौधरी पर लगातार राजनीतिक निशाना और पश्चिमी यूपी पर बढ़ता फोकस इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सपा आगामी चुनाव में इस क्षेत्र को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करना चाहती। अखिलेश यादव की ताजा पोस्ट में जयंत चौधरी का नाम भले सीधे तौर पर न हो, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में इसका राजनीतिक संदेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जरूर पढ़ा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश का यह सियासी दांव जाट-किसान बहुल पश्चिमी यूपी में कितना असर पैदा करता है और जयंत चौधरी इसका अगला जवाब किस अंदाज में देते हैं। UP News
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