समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर दालमंडी, वाराणसी के व्यापारियों की स्थिति को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि दालमंडी से जुड़े सरकारी फैसले ऐतिहासिक संरक्षण के नाम पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार चौड़ीकरण के नाम पर व्यापारियों को डराने-धमकाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों से लिए जा रहे सरकारी फैसलों के चलते दालमंडी के व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी सरकार ने हमेशा विकास कार्यों में स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता दी, लेकिन वर्तमान सरकार उनकी अनदेखी कर रही है।
सपा प्रमुख ने प्रधानमंत्री द्वारा किए गए ‘क्योटो जैसे बनारस’ के वादे पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि क्योटो में धरोहरों को संरक्षित किया गया है, तोड़ा नहीं गया, जबकि बनारस में धरोहरों के साथ-साथ बाजार भी खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि शहर की हालत आज किसी से छिपी नहीं है।
अखिलेश ने मेरठ और अकबरनगर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह अन्य शहरों में भी बाजारों को ध्वस्त किया गया और लोगों की आजीविका पर गहरा प्रहार हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी सरकार ने वाराणसी मेट्रो परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे रोक दिया। उन्होंने कहा कि 2027 में सपा की सरकार आने पर बनारस में मेट्रो चलायी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं के बावजूद शहर की नदी धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि दालमंडी के पोलिंग बूथ पर भाजपा को लगातार हार मिलती रही है, इसलिए अब उसी क्षेत्र के व्यापारियों को ‘सजा’ दी जा रही है। प्रेसवार्ता के दौरान मौजूद दालमंडी के व्यापारियों ने भी सरकार से चौड़ीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की।
व्यापारियों ने कहा कि दालमंडी सदियों से बनारस का प्रमुख और ऐतिहासिक बाजार रहा है जो हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। उन्हें लोहता या अन्य क्षेत्रों में भेजने का निर्णय व्यावहारिक नहीं है क्योंकि वहां ग्राहकों का आना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि दुकानें न तोड़ी जाएं और निर्णय तुरंत वापस लिया जाए।