हिंदू महिला से जबरन विवाह, घरेलू हिंसा और अब बच्चों के खतना का दबाव
प्रदेश राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने अपने जीवन से जुड़ी ऐसी पीड़ा बयान की, जिसे सुनकर वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्षों से वह जबरन विवाह, घरेलू हिंसा और लगातार मिल रही धमकियों का सामना कर रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने अपने जीवन से जुड़ी ऐसी पीड़ा बयान की, जिसे सुनकर वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्षों से वह जबरन विवाह, घरेलू हिंसा और लगातार मिल रही धमकियों का सामना कर रही है। महिला का कहना है कि अब उसके बच्चों पर भी धार्मिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वह बेहद भयभीत और परेशान है।
अपहरण के बाद दबाव में कराया गया निकाह, महिला का आरोप
पीड़िता के अनुसार उसकी परेशानी की शुरुआत साल 2009 में हुई, जब मोहम्मदाबाद क्षेत्र के रहने वाले अफसर हुसैन ने कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया। महिला का दावा है कि उसे कई वर्षों तक महाराष्ट्र के एक गांव में जबरन रखा गया। उसका कहना है कि जब वह 2012 में वापस अपने क्षेत्र में आई, तो स्थानीय दबाव के चलते आरोपी से उसका निकाह करा दिया गया। इस विवाह से महिला के दो बच्चे हैं एक बेटी और एक बेटा। महिला का आरोप है कि यह रिश्ता उसकी इच्छा के खिलाफ बना और इसके बाद से ही उसके साथ प्रताड़ना का सिलसिला जारी है।
तीन तलाक के बाद भी नहीं खत्म हुआ विवाद
महिला ने बताया कि वर्ष 2018 में उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया था। हालांकि तलाक के बाद भी वह लगातार उसके जीवन में हस्तक्षेप करता रहा। पीड़िता का कहना है कि तलाक के बावजूद आरोपी उसे धमकाता है और बच्चों को अपने साथ ले जाने की बात करता है। महिला का आरोप है कि वह बच्चों के धार्मिक रीति-रिवाजों को बदलने के लिए दबाव बना रहा है और इसी बात को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद और अधिक बढ़ गया है।
बच्चों को लेकर बढ़ा विवाद, खतना कराने का दबाव
पीड़िता के मुताबिक आरोपी अब उसके छोटे बेटे का खतना कराने की बात कर रहा है और बच्चों की धार्मिक पहचान बदलने का दबाव बना रहा है। महिला का कहना है कि उसने इसका विरोध किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। डर और असुरक्षा के माहौल के कारण महिला फिलहाल अपने घर से दूर रहकर किसी तरह जीवन गुजारने को मजबूर है।
हमले और पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
महिला ने महिला आयोग के समक्ष यह भी आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले उस पर चाकू से हमला किया गया था, जिससे उसके सिर में चोट आई। उसने दावा किया कि इस मामले में पुलिस ने सही तरीके से कार्रवाई नहीं की और मेडिकल रिपोर्ट भी सही ढंग से तैयार नहीं कराई। पीड़िता ने भावुक होकर कहा कि शिकायत करने के बाद भी उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है और उल्टा उसके चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
महिला आयोग ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश
महिला की शिकायत सुनने के बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़िता का निष्पक्ष मेडिकल परीक्षण कराया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोग ने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़िता को सुरक्षा तथा न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
UP News : उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने अपने जीवन से जुड़ी ऐसी पीड़ा बयान की, जिसे सुनकर वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्षों से वह जबरन विवाह, घरेलू हिंसा और लगातार मिल रही धमकियों का सामना कर रही है। महिला का कहना है कि अब उसके बच्चों पर भी धार्मिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वह बेहद भयभीत और परेशान है।
अपहरण के बाद दबाव में कराया गया निकाह, महिला का आरोप
पीड़िता के अनुसार उसकी परेशानी की शुरुआत साल 2009 में हुई, जब मोहम्मदाबाद क्षेत्र के रहने वाले अफसर हुसैन ने कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया। महिला का दावा है कि उसे कई वर्षों तक महाराष्ट्र के एक गांव में जबरन रखा गया। उसका कहना है कि जब वह 2012 में वापस अपने क्षेत्र में आई, तो स्थानीय दबाव के चलते आरोपी से उसका निकाह करा दिया गया। इस विवाह से महिला के दो बच्चे हैं एक बेटी और एक बेटा। महिला का आरोप है कि यह रिश्ता उसकी इच्छा के खिलाफ बना और इसके बाद से ही उसके साथ प्रताड़ना का सिलसिला जारी है।
तीन तलाक के बाद भी नहीं खत्म हुआ विवाद
महिला ने बताया कि वर्ष 2018 में उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया था। हालांकि तलाक के बाद भी वह लगातार उसके जीवन में हस्तक्षेप करता रहा। पीड़िता का कहना है कि तलाक के बावजूद आरोपी उसे धमकाता है और बच्चों को अपने साथ ले जाने की बात करता है। महिला का आरोप है कि वह बच्चों के धार्मिक रीति-रिवाजों को बदलने के लिए दबाव बना रहा है और इसी बात को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद और अधिक बढ़ गया है।
बच्चों को लेकर बढ़ा विवाद, खतना कराने का दबाव
पीड़िता के मुताबिक आरोपी अब उसके छोटे बेटे का खतना कराने की बात कर रहा है और बच्चों की धार्मिक पहचान बदलने का दबाव बना रहा है। महिला का कहना है कि उसने इसका विरोध किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। डर और असुरक्षा के माहौल के कारण महिला फिलहाल अपने घर से दूर रहकर किसी तरह जीवन गुजारने को मजबूर है।
हमले और पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
महिला ने महिला आयोग के समक्ष यह भी आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले उस पर चाकू से हमला किया गया था, जिससे उसके सिर में चोट आई। उसने दावा किया कि इस मामले में पुलिस ने सही तरीके से कार्रवाई नहीं की और मेडिकल रिपोर्ट भी सही ढंग से तैयार नहीं कराई। पीड़िता ने भावुक होकर कहा कि शिकायत करने के बाद भी उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है और उल्टा उसके चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
महिला आयोग ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश
महिला की शिकायत सुनने के बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़िता का निष्पक्ष मेडिकल परीक्षण कराया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोग ने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़िता को सुरक्षा तथा न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।












