अखिलेश ने चिंता जताई कि अगर जरूरत की चीजें भी लगातार विदेश से आने लगें, तो यूपी का किसान आखिर उगाएगा क्या, बेचेगा किसे और कमाएगा कैसे? उन्होंने कहा कि किसान की आमदनी कमजोर हुई तो इसका असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहेगा।

UP News : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से मौजूदा भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश ने चिंता जताई कि अगर जरूरत की चीजें भी लगातार विदेश से आने लगें, तो यूपी का किसान आखिर उगाएगा क्या, बेचेगा किसे और कमाएगा कैसे? उन्होंने कहा कि किसान की आमदनी कमजोर हुई तो इसका असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि इससे घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों का इलाज और बेटियों की शादी जैसे जिम्मेदारियों पर सीधा बोझ बढ़ेगा।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि किसानों को नुकसान पहुंचाकर किसी भी सरकार का टिकना आसान नहीं है। उन्होंने भाजपा से यह भी पूछा कि आखिर देश-प्रदेश के हितों को छोड़कर विदेशियों के सामने समर्पण जैसी मजबूरी क्या है। सपा प्रमुख ने दावा किया कि भाजपा की नीति खेती-किसानी को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर करने वाली है। कभी भूमि अधिग्रहण जैसे कदमों से किसान की जमीन पर दबाव, तो कभी ऐसे कानूनों/नीतियों से किसानों को संकट में धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने “बिचौलियों” का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा की सोच उत्पादन बढ़ाने से ज्यादा कमीशनखोरी और मध्यस्थता को बढ़ावा देती है, और किसान हितों के नाम पर बैठे “कृषि-बिचौलियों” का पर्दाफाश होना चाहिए।
इससे पहले सोमवार को भी अखिलेश यादव ने राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अभिभाषण जनहित के समाधान से ज्यादा “सरकारी उपलब्धियों की तारीफ” का मंच दिखता है और कागजों पर हरियाली उगाने से जनता भ्रमित नहीं होने वाली। सपा प्रमुख का आरोप है कि भाजपा शासन में उत्तर प्रदेश की प्रगति में गतिरोध आया है और सरकार ने विश्वास व सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने का काम किया। अखिलेश ने दावा किया कि समाजवादी सरकार के समय मेट्रो परियोजनाएं जितनी आगे बढ़ीं, उसके बाद रफ्तार थमी। उन्होंने यह भी कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसा नया मॉडल खड़ा करने के बजाय सरकार प्रचार में आगे है। साथ ही उन्होंने अन्नदाता किसानों की बदहाली और युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नौकरियां नहीं हैं, उद्योग बंद हो रहे हैं और निवेश के नाम पर आयोजन ज्यादा हो रहे हैं। अखिलेश यादव ने राज्यपाल के अभिभाषण को आंकड़ों और जुमलों का प्रदर्शन बताते हुए कहा कि युवाओं को नौकरी का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हालात अलग हैं। उन्होंने महिला सुरक्षा, छेड़छाड़/लूटपाट जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्रों की दुर्दशा पर ठोस समाधान नजर नहीं आता। गन्ना किसानों के बकाये के सवाल पर भी उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने के बजाय पुराने वर्षों का जबानी हिसाब गिना रही है। UP News