प्रदेश की राजनीति इन दिनों पोस्टर, मीम और फिल्मों के जरिए नए तरह के टकराव का गवाह बन रही है। अखिलेश का ल्यारी राज से शुरू हुआ विवाद अब धुंआ-धर पोस्टरों, एआई वीडियो और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों पोस्टर, मीम और फिल्मों के जरिए नए तरह के टकराव का गवाह बन रही है। अखिलेश का ल्यारी राज से शुरू हुआ विवाद अब धुंआ-धर पोस्टरों, एआई वीडियो और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब अखिलेश का ल्यारी राज शीर्षक से पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में अखिलेश यादव को अपराध और दंगों से जोड़ते हुए दिखाया गया, जबकि योगी आदित्यनाथ को धुरंधर सीएम के रूप में प्रस्तुत किया गया। ये पोस्टर केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि गोंडा, जौनपुर, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में भी लगाए गए। इसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकतार्ओं में नाराजगी फैल गई और कई जगहों पर पोस्टर फाड़ दिए गए।
पोस्टर वॉर यहीं नहीं रुका। जवाब में सपा की ओर से धुंआ-धर पोस्टर सामने आए, जिनमें 2017 के बाद की घटनाओं को हाईलाइट किया गया। इस बीच अखिलेश यादव के बयान ने विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पोस्टर लगाने वालों को खुद नहीं पता था कि धुंआ-धर क्या होता है, लेकिन अब पूरे प्रदेश को पता चल गया है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा तीखा हो गया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब सपा नेता आईपी सिंह द्वारा एक एआई वीडियो मीम शेयर किया गया। इस वीडियो में सीएम योगी को एक फिल्मी थीम पर दिखाया गया था, जिसके साथ विवादित हेडिंग्स जोड़ी गई थीं। इस पर आपत्ति जताते हुए एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद:
* हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई
* विवादित पोस्टर और बैनर हटवाए गए
* पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
यानी पोस्टर वॉर अब सीधे कानून के दायरे में आ चुका है।
इस पूरे विवाद के पीछे फिल्म धुरंधर भी एक बड़ा कारण बनकर उभरी है। विपक्ष इसे प्रोपेगेंडा बता रहा है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष इसका समर्थन कर रहा है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस मुद्दे पर सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार में गुंडे-माफिया को बढ़ावा मिला, जबकि वर्तमान सरकार कानून-व्यवस्था को मजबूत कर रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पोस्टर वॉर एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे रही है, जहां प्रचार और पलटवार के तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। लेकिन इस तरह के टकराव जब कानून-व्यवस्था तक पहुंचने लगें, तो यह लोकतांत्रिक माहौल के लिए चुनौती भी बन सकता है।