फर्जी PDA पर केशव मौर्य का हमला, 2027 में भाजपा के पक्ष में बड़ा दावा

लखनऊ के लोकभवन में आयोजित ‘9 वर्ष की उपलब्धियां’ कार्यक्रम के मंच से केशव मौर्य ने कहा कि बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने शासन, सुरक्षा, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में जो बदलाव देखा है, उसने प्रदेश की तस्वीर और पहचान दोनों बदल दी हैं।

केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar18 Mar 2026 03:54 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है और राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज होती दिख रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की खुलकर सराहना कीवहीं विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर भी जोरदार हमला बोला। लखनऊ के लोकभवन में आयोजित ‘9 वर्ष की उपलब्धियां’ कार्यक्रम के मंच से केशव मौर्य ने कहा कि बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने शासन, सुरक्षा, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में जो बदलाव देखा है, उसने प्रदेश की तस्वीर और पहचान दोनों बदल दी हैं। उन्होंने विपक्ष के ‘पीडीए’ नारे को राजनीतिक भ्रम फैलाने वाला बताकर जनता से अपील की कि वे ऐसे नारों की हकीकत को समझें और विकास की राजनीति को प्राथमिकता दें। अपने पूरे संबोधन में केशव मौर्य ने यह संदेश देने की कोशिश की कि आज का उत्तर प्रदेश पहले वाला उत्तर प्रदेश नहीं है, बल्कि यह तेजी से आगे बढ़ता, आत्मविश्वास से भरा और नई राजनीतिक दिशा तय करता प्रदेश बन चुका है।

उत्तर प्रदेश के पुराने दौर पर साधा निशाना

उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश ने वह दौर भी देखा है, जब प्रदेश में अपराध, अराजकता और माफियाओं का प्रभाव बढ़ गया था। उन्होंने बिना नरमी बरते पूर्ववर्ती सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश की पहचान विकास से नहीं, बल्कि बदहाल कानून व्यवस्था से जुड़ गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में प्रदेश में निवेश का माहौल नहीं था, क्योंकि उद्योग जगत को भरोसा नहीं था कि उत्तर प्रदेश सुरक्षित और स्थिर वातावरण दे पाएगा। केशव मौर्य ने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश बदल चुका है और अब यह राज्य विकास, निवेश, एक्सप्रेसवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर प्रशासन के लिए जाना जा रहा है।

2027 को लेकर भाजपा का बड़ा दावा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा और उसके सहयोगियों ने जो ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, उससे भी बड़ी सफलता पार्टी को 2027 में मिलेगी। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश की जनता विकास और सुशासन की राजनीति को समझती है और उसी आधार पर आगे भी अपना समर्थन देगी। केशव मौर्य ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ दल केवल नारे गढ़कर समाज के अलग-अलग वर्गों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता अब पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि राजनीतिक सपने देखना अलग बात है, लेकिन जमीन पर जनसमर्थन हासिल करना अलग। अपने भाषण में केशव मौर्य ने उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नौ वर्षों की उपलब्धियों को विस्तार से गिनाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के करोड़ों किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिला है और बड़ी धनराशि डीबीटी के जरिए सीधे उनके खातों में पहुंचाई गई है। उनके मुताबिक, यह पारदर्शी व्यवस्था उत्तर प्रदेश में किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए प्रदेश के जरूरतमंद लोगों को बिना किसी भेदभाव के सहायता दी गई। चाहे वह किसी भी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा हो, उत्तर प्रदेश सरकार ने जरूरत पड़ने पर हर पात्र व्यक्ति की मदद की है।

भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर भी बोला हमला

केशव मौर्य ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के मामले में अब पुरानी व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई गई है और भ्रष्टाचार व भाई-भतीजावाद पर कड़ा प्रहार किया गया है। उनके अनुसार, योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में शासन व्यवस्था को ऐसी दिशा दी है, जहां पात्रता और योग्यता को प्राथमिकता मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े बड़े काम भी इसी सरकार के दौरान आगे बढ़े। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता से भी जुड़ा बड़ा अध्याय है।

उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक भाजपा का दावा

केशव मौर्य ने अपने संबोधन को केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है और आने वाले चुनावों में इसका असर अन्य राज्यों में भी दिखाई देगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल का नाम लेते हुए दावा किया कि वहां भी भाजपा भविष्य में मजबूत स्थिति में पहुंचेगी। भाषण के अंत में उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश इस संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे, कानून व्यवस्था और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के जरिए उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाई देने में जुटी है। UP News

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उत्तर प्रदेश में है सौ प्रतिशत साक्षर गांव, धौर्रा माफी की अजब कहानी

अलीगढ़ जिले में स्थित धौर्रा माफी आज पढ़ा-लिखा गांव के नाम से जाना जाता है। जहां कभी ग्रामीण इलाकों को शिक्षा के मामले में पिछड़ा माना जाता था, वहीं यह गांव अब ज्ञान और जागरूकता का केंद्र बन चुका है। यहां के लोग शिक्षा को केवल जरूरत नहीं, बल्कि अपनी पहचान मानते हैं।

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पढ़ा-लिखा गांव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Mar 2026 03:53 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित धौर्रा माफी आज पढ़ा-लिखा गांव के नाम से जाना जाता है। जहां कभी ग्रामीण इलाकों को शिक्षा के मामले में पिछड़ा माना जाता था, वहीं यह गांव अब ज्ञान और जागरूकता का केंद्र बन चुका है। यहां के लोग शिक्षा को केवल जरूरत नहीं, बल्कि अपनी पहचान मानते हैं।

साक्षरता दर में जबरदस्त उछाल

जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार इस गांव की साक्षरता दर करीब 75% थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेजी से सुधार हुआ है। अब यह आंकड़ा 90% से सौ प्रतिशत के बीच बताया जाता है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि गांव के लोगों ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने का संकल्प लिया।

शिक्षा के पीछे मजबूत माहौल

धौर्रा माफी की सफलता के पीछे इसकी भौगोलिक स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। गांव के पास ही स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने यहां शिक्षा का वातावरण तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई है। विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और प्रोफेसरों का गांव से संबंध रहा है, जिससे यहां शिक्षा की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी मजबूत होती गई।

हर घर में शिक्षित लोग, हर क्षेत्र में पहचान

यह गांव सिर्फ साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लोग विभिन्न पेशों में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। बड़ी संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और सरकारी अधिकारी इसी गांव से निकलकर देश-विदेश में काम कर रहे हैं। इससे गांव के युवाओं को प्रेरणा मिलती है और वे भी शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने के लिए उत्साहित होते हैं।

लिम्का बुक में दर्ज हुई उपलब्धि

धौर्रा माफी की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2002 में इस गांव का नाम लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि शिक्षा के क्षेत्र में गांव ने एक अनोखा मुकाम हासिल किया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य, जहां एक लाख से अधिक गांव हैं, वहां धौर्रा माफी एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है। यह गांव दिखाता है कि यदि शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र भी विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। धौर्रा माफी आज इस बात का प्रतीक है कि जागरूकता, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। यह गांव न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।

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बीजेपी की निगाह मुस्लिम महिलाओं पर, योगी सरकार ने फिर दिया एक तोहफा

उत्तर प्रदेश में ईद से पहले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग जल्द ही एक ऐसा मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी।

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मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Mar 2026 01:18 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में ईद से पहले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग जल्द ही एक ऐसा मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इस प्रस्तावित ऐप के जरिए मुस्लिम महिलाएं बिना कहीं गए यानी घर बैठे महिलाएं घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य मामलों की शिकायत दर्ज कर सकेंगी। घर बैठे शिकायत की स्थिति (स्टेटस ट्रैकिंग) देख सकेंगी, निस्तारण रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगी साथ ही अपनी फीडबैक भी दे सकेंगी।

क्यों जरूरी है यह पहल?

आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान के अनुसार कई मुस्लिम महिलाएं सामाजिक पाबंदियों के कारण थाने या सरकारी दफ्तर नहीं जा पातीं। कई मामलों में महिलाएं एक बार बाहर आने के बाद दोबारा नहीं निकल पातीं इसलिए यह ऐप उन्हें घर बैठे न्याय पाने का माध्यम देगा। जिला स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को इस ऐप के बारे में जागरूक किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।

जनसुनवाई में क्या सामने आया?

हाल ही में हुई जनसुनवाई में कुल 44 मामलों की सुनवाई हुई, इनमें घरेलू हिंसा, दहेज और गुजारा भत्ता से जुड़े मामले शामिल थे। कई विभागों को समय पर कार्रवाई न करने पर चेतावनी भी दी गई। आयोग ने पुलिस से साफ कहा है कि पीड़ित महिलाओं की तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए, उन्हें अनावश्यक चक्कर न लगवाए जाएं साथ ही मामलों का एक हफ्ते के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यह ऐप मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा डिजिटल कदम साबित हो सकता है, जो उन्हें सामाजिक सीमाओं के बावजूद न्याय तक आसान पहुंच देगा। ईद के मौके पर यह पहल वास्तव में एक सशक्तिकरण का तोहफा मानी जा रही है।